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New Delhi: किराड़ी में जलभराव पर स्थायी समाधान का प्रस्ताव मंत्री ने किया सार्वजनिक

Admindelhi1
23 Jan 2026 2:24 PM IST
New Delhi: किराड़ी में जलभराव पर स्थायी समाधान का प्रस्ताव मंत्री ने किया सार्वजनिक
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"जलभराव से निपटने के लिए मंत्री ने कार्ययोजना साझा की"

नई दिल्ली: किराड़ी विधानसभा क्षेत्र में जलभराव को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों और राजनीतिक रूप से प्रेरित गलत सूचनाओं के बीच दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दस्तावेजी तथ्यों के साथ सच्चाई सामने रखी। उन्होंने पिछली आम आदमी पार्टी (आआपा) सरकार के दौरान 11 वर्षों की घोर अनदेखी को उजागर करते हुए जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्पष्ट और समयबद्ध कार्ययोजना को सार्वजनिक किया।

प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से किराड़ी को लेकर सोशल मीडिया पर झूठे नैरेटिव फैलाए जा रहे हैं। आज मैं तथ्यों के साथ सच्चाई रिकॉर्ड पर रख रहा हूं। उम्मीद है कि विपक्ष के नेता खासकर आआपा के लोग, इसे ध्यान से देख रहे होंगे।

मंत्री ने बताया कि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में किराड़ी में सीवरेज से जुड़े रख-रखाव के कार्यों पर मात्र 43 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि यह क्षेत्र दशकों पुराना है और लंबे समय से जलभराव की गंभीर समस्या से जूझता रहा है। उन्होंने कहा कि किराड़ी की कॉलोनियां वर्ष 2000 से भी पहले अस्तित्व में थीं। सरकारें बदलीं, लेकिन कोई भी सरकार एक समग्र सीवर नेटवर्क नहीं बना सकी। कांग्रेस और आआपा दोनों के शासन में दीर्घकालिक योजना का पूरी तरह अभाव रहा।

प्रवेश साहिब सिंह ने यह भी कहा कि पिछले एक दशक में मीडिया रिपोर्ट्स में हर साल वही तस्वीरें देखने को मिलीं- जलमग्न सड़कें, डूबे हुए घर- जो इस बात का प्रमाण हैं कि समस्या का समाधान करने के बजाय उसे नजरअंदाज किया गया। उन्होंने बताया कि किराड़ी सीवरेज परियोजना को दिसंबर 2020 में मंजूरी दी गई थी और इसकी निर्धारित पूर्णता तिथि दिसंबर 2024 थी। इसके बावजूद पिछली सरकार के कार्यकाल में प्रशासनिक विफलताओं और विभागीय समन्वय की कमी के कारण यह परियोजना वर्षों तक ठप पड़ी रही।

मंत्री ने बताया कि आधिकारिक प्रगति के अनुसार सीवर लाइन का कार्य 70 फीसद (286 किमी) से बढ़कर 84 फीसद (340 किमी) तक पहुंचा गया है। इस चरण में 54 किमी नई सीवर लाइन जोड़ी गई और प्रताप विहार, प्रेम नगर और भाग्य विहार के सीवेज पंपिंग स्टेशनों (एसपीएस) में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि कागजों पर परियोजनाएं थीं, लेकिन जमीन पर काम छोड़ दिया गया। भुगतान न होने के कारण ठेकेदारों ने काम रोक दिया और गंदा पानी खुले नालों में बहता रहा। परियोजना को अब चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना के तहत संशोधित लक्ष्य जून 2026 रखा गया है।

मंत्री ने ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि गंभीर योजना संबंधी खामियां सामने आई हैं। सीवेज पंपिंग स्टेशन और राइजिंग मेन पर खर्च तो किया गया, लेकिन उसके अनुरूप सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता विकसित नहीं की गई। उन्होंने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में लगभग 36 एमजीडी सीवेज का उत्पादन होता है, लेकिन केवल एक 15 एमजीडी का एसटीपी वर्तमान में चालू है। 25 एमजीडी का एसटीपी अब तक निर्माणाधीन ही है।

मंत्री ने कहा कि यह एकीकृत योजना की पूरी तरह विफलता को दर्शाता है। ढांचा तो बना दिया गया, लेकिन सीवेज के उपचार की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में नालों के रीमॉडलिंग का कार्य सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा किया जा रहा है, जबकि पीडब्ल्यूडी से जुड़े कार्य भी प्रगति पर हैं। सभी विभागों के बीच समन्वय के साथ काम किया जा रहा है।

प्रमुख परियोजनाएं इस प्रकार हैं। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग मुंडका हाल्ट से सप्लीमेंट्री ड्रेन तक नए नाले का निर्माण करेगी। यह 220 करोड़ रुपये की परियोजना, 760 क्यूसेक क्षमता वाली है। यह 1,520 एकड़ क्षेत्र के कैचमेंट को कवर करेगा। किराड़ी–रिठाला ट्रंक ड्रेन (डीडीए) यह 7.2 किमी लंबा ट्रंक ड्रेन है और 250 करोड़ रुपये की यह परियोजना, 1,160 क्यूसेक क्षमता वाली है। उन्होंने बताया कि केएसएन ड्रेन लगभग 112 करोड़ की लागत से रीमॉडलिंग कार्य प्रगति पर है। रोहतक रोड ड्रेन का सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण द्वारा रीमॉडलिंग और पीडब्ल्यूडी के कार्य भी जारी है। यह 183 करोड़ की परियोजना लगभग पूर्ण है। शर्मा कॉलोनी की 9.4 करोड़ की स्थानीय विकास परियोजना है। ड्रेन सुधार एवं मुबारकपुर ड्रेन से आउटफॉल कनेक्टिविटी है।

मंत्री ने कहा कि 11 साल तक लोगों को सिर्फ बहाने दिए गए। जैसे ही इस सरकार ने जिम्मेदारी संभाली, ज़मीन पर काम शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि किराड़ी फर्क जानता है, यहां अब नारे नहीं, सिर्फ नतीजे होंगे।

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