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EAC-PM रिपोर्ट में जनसंख्या पर नई बहस

Kavita2
18 Sept 2026 10:55 AM IST
EAC-PM रिपोर्ट में जनसंख्या पर नई बहस
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल ने भारत की जनसंख्या नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार की नीतियों के मुख्य उद्देश्य के रूप में जनसंख्या नियंत्रण पर जोर देने का समय अब बदल गया है। उन्होंने देश की बदलती जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) स्थिति को देखते हुए परिवार नियोजन के ढांचे में नए सिरे से विचार करने की जरूरत बताई है।

संजीव सान्याल ने ‘द घोस्ट ऑफ पॉपुलेशन पास्ट: हाउ पॉपुलेशन कंट्रोल पर्सिस्ट्स इन इंडिया’ (The Ghost of Population Past: How Population Control Persists in India) नाम की एक रिपोर्ट साझा की है। इस रिपोर्ट को EAC-PM की डायरेक्टर आकांक्षा अरोड़ा और सलाहकार विराट सिंह ने तैयार किया है।

रिपोर्ट में भारत में जनसंख्या से जुड़े मौजूदा रुझानों का विश्लेषण किया गया है। इसमें कहा गया है कि देश के कई हिस्सों में कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे जा चुकी है। इससे भविष्य में आबादी की संरचना में बदलाव को लेकर नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

कुल प्रजनन दर का मतलब एक महिला द्वारा अपने जीवनकाल में जन्म दिए जाने वाले औसत बच्चों की संख्या से होता है। रिप्लेसमेंट लेवल वह स्तर होता है जिस पर एक पीढ़ी की आबादी लंबे समय तक स्थिर बनी रहती है। यदि प्रजनन दर इससे नीचे चली जाती है तो समय के साथ आबादी की वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है।

सान्याल ने कहा कि भारत में जनसंख्या से जुड़ी नीतियों को अब केवल संख्या कम करने के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने बदलती परिस्थितियों के अनुसार परिवार नियोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक नीतियों को तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के अलग-अलग राज्यों में जनसंख्या से जुड़े रुझान एक जैसे नहीं हैं। कुछ राज्यों में प्रजनन दर तेजी से कम हुई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी जनसंख्या वृद्धि की स्थिति अलग है। ऐसे में पूरे देश के लिए एक समान दृष्टिकोण के बजाय क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी बताया गया है।

भारत ने पिछले कई दशकों में परिवार नियोजन कार्यक्रमों के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने की दिशा में काम किया है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा में वृद्धि और जागरूकता अभियानों के कारण कई क्षेत्रों में परिवारों के आकार में बदलाव आया है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह चिंता जताई गई है कि कम होती प्रजनन दर के साथ आने वाली चुनौतियों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इनमें बुजुर्ग आबादी का बढ़ना, कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या में बदलाव और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, कम प्रजनन दर वाले देशों को भविष्य में श्रम शक्ति, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जनसंख्या नीति को केवल नियंत्रण तक सीमित रखने के बजाय व्यापक सामाजिक और आर्थिक योजना से जोड़ने की जरूरत होती है।

रिपोर्ट में भारत की जनसांख्यिकीय स्थिति में हो रहे बदलावों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें यह सुझाव दिया गया है कि परिवार नियोजन से जुड़ी नीतियों को बदलती जरूरतों के अनुसार विकसित किया जाना चाहिए।

संजीव सान्याल का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में जनसंख्या, रोजगार और आर्थिक विकास को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। देश की बड़ी युवा आबादी को लंबे समय तक आर्थिक अवसरों से जोड़ना और भविष्य की जरूरतों के अनुसार नीतियां बनाना प्रमुख मुद्दे हैं।

फिलहाल EAC-PM की रिपोर्ट ने भारत में जनसंख्या नीति को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है। रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच आगे चर्चा होने की संभावना है।

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