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- एनालॉग पनीर पर लगेगी...

नई दिल्ली। देश में नकली और मिलावटी पनीर की बढ़ती शिकायतों के बीच अब एनालॉग पनीर पर रोक लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) इस मामले में केंद्रीय स्तर पर नियम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एफएसएसएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजित पुनहानी ने इस संबंध में जानकारी दी है।
बताया जा रहा है कि एनालॉग पनीर यानी ऐसा उत्पाद जिसमें पारंपरिक दूध से बने पनीर की जगह अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, उसकी बिक्री और पहचान को लेकर नए नियम बनाए जा सकते हैं। इसके लिए 24 सितंबर को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
24 सितंबर की बैठक में तय होगी रणनीति
एफएसएसएआई की ओर से आयोजित होने वाली इस बैठक में देशभर में एनालॉग पनीर पर रोक लगाने और इसकी बिक्री को नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा होगी।
बैठक में राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसमें यह तय किया जाएगा कि एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और निगरानी को लेकर किस तरह की व्यवस्था लागू की जाए।
खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना जरूरी है। इसी उद्देश्य से देशभर में एक समान नियम बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
नकली पनीर की बिक्री को लेकर उठे सवाल
पिछले कुछ समय से देश के कई हिस्सों में नकली और मिलावटी पनीर की बिक्री को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में पनीर में दूध के अलावा अन्य पदार्थों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं।
कई जगहों पर जांच के दौरान गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले पनीर के नमूने भी पाए गए हैं। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है।
अभियान के बाद बढ़ा मुद्दा
नकली और मिलावटी पनीर को लेकर दैनिक जागरण ने अपने अभियान के माध्यम से दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सामने आ रहे मामलों को प्रमुखता से उठाया था।
रिपोर्टों में नकली पनीर, मिलावट और कथित रूप से डिटर्जेंट जैसे पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था। इसके बाद खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभागों ने इस विषय पर गंभीरता दिखाई।
क्या होता है एनालॉग पनीर
एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद होता है, जिसमें पारंपरिक पनीर की तरह केवल दूध के घटकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि इसमें अन्य वसा, प्रोटीन या दूसरे पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है।
खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी उत्पाद को पनीर के नाम से बेचा जाता है तो उपभोक्ताओं को उसकी सही जानकारी मिलनी चाहिए। लेबलिंग और गुणवत्ता मानकों की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है, ताकि ग्राहक सही विकल्प चुन सकें।
उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंता
खाद्य सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाती रही हैं। दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावट का मुद्दा लंबे समय से चिंता का विषय रहा है।
पनीर का इस्तेमाल देशभर में बड़ी मात्रा में किया जाता है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर इसकी मांग और बढ़ जाती है। ऐसे में गुणवत्ता नियंत्रण और जांच व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।
राज्यों के साथ मिलकर बनेगा प्लान
एफएसएसएआई केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के जरिए खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। 24 सितंबर की बैठक में राज्यों से सुझाव लिए जाएंगे और आगे की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
इसके तहत यह भी देखा जाएगा कि एनालॉग पनीर की पहचान कैसे की जाए, इसकी बिक्री पर निगरानी कैसे बढ़ाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएं।
बाजार में शुद्ध खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने पर जोर
सरकार और खाद्य सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य बाजार में उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है। इसके लिए समय-समय पर मानकों में बदलाव और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाता है।
अब एनालॉग पनीर को लेकर होने वाली बैठक के बाद यह स्पष्ट होगा कि देशभर में इसके उत्पादन और बिक्री पर किस तरह के नए नियम लागू किए जाते हैं।
फिलहाल एफएसएसएआई की ओर से इस दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और 24 सितंबर की बैठक को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





