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बारिश को तरसा देश एल नीनो के असर से मॉनसून हुआ कमजोर

Ratna Netam
18 Sept 2026 3:05 PM IST
बारिश को तरसा देश एल नीनो के असर से मॉनसून हुआ कमजोर
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नई दिल्ली : भारत में इस साल मॉनसून की स्थिति ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, एल नीनो प्रभाव के कारण देश में बारिश का वितरण प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है और सितंबर महीने में भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक बने मौसम संबंधी बदलावों का असर खेती, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।मॉनसून भारत की कृषि व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। देश के बड़ी संख्या में किसान खरीफ फसलों के लिए बारिश पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बारिश की कमी का सीधा असर फसल उत्पादन और खेती की लागत पर पड़ सकता है।
एल नीनो ने बदला बारिश का पैटर्न
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एल नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री सतह के तापमान में होने वाला बदलाव है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ सकता है। भारत में इसका संबंध अक्सर मॉनसून की गतिविधियों में बदलाव से जोड़ा जाता है।इस साल एल नीनो के प्रभाव के कारण कई क्षेत्रों में बारिश कमजोर रही। हालांकि मौसम पर केवल एक ही कारक का असर नहीं होता, बल्कि समुद्री परिस्थितियां, हवा का दबाव, स्थानीय मौसम प्रणाली और अन्य प्राकृतिक कारण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
17 साल में सबसे कमजोर मॉनसून की चर्चा
मौसम आंकड़ों के आधार पर इस मॉनसून सीजन में बारिश की कमी को लेकर चिंता जताई जा रही है। कई रिपोर्टों में इसे लंबे समय में कमजोर मॉनसून वर्षों में शामिल बताया गया है।बारिश की कमी का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रहा है। कुछ राज्यों में सामान्य से बेहतर बारिश हुई, जबकि कई इलाकों में कम वर्षा के कारण सूखे जैसे हालात बने।
सितंबर में भी नहीं सुधरे हालात
सितंबर महीने को मॉनसून की वापसी से पहले महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान होने वाली बारिश कई खरीफ फसलों के लिए बेहद जरूरी होती है। लेकिन इस बार कई क्षेत्रों में सितंबर में भी बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं।किसानों को उम्मीद रहती है कि मॉनसून के आखिरी दौर में अच्छी बारिश होगी, जिससे फसलों को फायदा मिल सके। लेकिन बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में अब चिंता बढ़ रही है।
खेती पर पड़ सकता है असर
कम बारिश का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर देखने को मिल सकता है। धान, दालें, तिलहन और अन्य खरीफ फसलें पर्याप्त पानी पर निर्भर रहती हैं।अगर बारिश कम होती है तो सिंचाई की जरूरत बढ़ जाती है। इससे किसानों की लागत बढ़ सकती है। वहीं, जिन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं, वहां उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है।
जल संसाधनों पर भी असर
मॉनसून की बारिश देश के जल भंडारों को भरने में अहम भूमिका निभाती है। कम बारिश होने से कई क्षेत्रों में जलाशयों, तालाबों और भूजल स्तर पर असर पड़ सकता है।गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता को लेकर भी चुनौती बढ़ सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां पहले से जल संकट की स्थिति रहती है।
मौसम विभाग की नजर बनी हुई है
मौसम विभाग लगातार बारिश के पैटर्न और बदलती परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है। वैज्ञानिक अलग-अलग मौसम प्रणालियों के आधार पर पूर्वानुमान जारी करते हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून के पूरे सीजन का आकलन केवल एक महीने की बारिश से नहीं किया जा सकता। क्षेत्रीय स्तर पर बारिश का वितरण और समय भी महत्वपूर्ण होता है।
किसानों को सतर्क रहने की सलाह
बारिश की अनिश्चित स्थिति को देखते हुए किसानों को मौसम पूर्वानुमान के आधार पर खेती से जुड़े फैसले लेने की सलाह दी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कम पानी वाली फसलों और बेहतर सिंचाई प्रबंधन से नुकसान को कम किया जा सकता है।भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मॉनसून की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। इस साल एल नीनो और अन्य मौसम परिस्थितियों के कारण बारिश में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अब सभी की नजर मॉनसून के आखिरी चरण और आने वाले मौसम संकेतों पर बनी हुई है।
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