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New Delhi नई दिल्ली : मणिपुर में जारी जातीय तनाव के बीच यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने गंभीर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। 21 नागा जनजातियों की सर्वोच्च संस्था ने आरोप लगाया कि नागा बहुल क्षेत्रों में समुदाय के खिलाफ एक “सोची-समझी साजिश” के तहत प्रॉक्सी वॉर चलाया जा रहा है, जो सुरक्षा और सीमा स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है।
दिल्ली सॉलिडेरिटी ग्रुप के सहयोग से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूएनसी के वरिष्ठ नेता वारिया सत्संग ने कहा कि मणिपुर में कुकी उग्रवादी समूहों और म्यांमार स्थित केएनए(बी) द्वारा नागा नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे 2015 के भारत-नागा फ्रेमवर्क समझौते का खुला उल्लंघन बताया।
काउंसिल के अनुसार, हाल के हमलों में आधुनिक हथियारों, ड्रोन और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किया गया। संगठन ने दावा किया कि मई 2026 में हुई घटनाओं के बाद 6 नागा नागरिकों के शव बरामद हुए, जिससे समुदाय में गहरा आक्रोश है।
यूएनसी ने केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही स्वतंत्र न्यायिक जांच, प्रभावित क्षेत्रों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और नागा बहुल इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
यूएनसी ने बताया कि मई 2026 में नागा गांवों पर हमलों और अपहरण की घटनाओं के बाद 6 नागरिकों के शव मिले, जिससे समुदाय में भारी आक्रोश है।
काउंसिल ने केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल की जा सके और बाहरी हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित हो।यूएनसी ने स्वतंत्र न्यायिक जांच, प्रभावित क्षेत्रों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और नागा बहुल इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग रखी है।





