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मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द, यूपी सरकार पर 10 लाख का जुर्माना
nidhi
29 Sept 2026 12:20 PM IST

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संभल हिंसा केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
नई दिल्ली: संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई निवारक हिरासत को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी निरस्त कर दिया, जिसमें अफरोज की हिरासत को बरकरार रखा गया था।
मुल्ला अफरोज पर नवंबर 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा में प्रमुख साजिशकर्ता होने का आरोप है। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। मामले में अफरोज को पहले गिरफ्तार किया गया था और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने 13 अक्टूबर 2025 को उसके खिलाफ NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत पर उठाए सवाल
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने की। अदालत ने NSA जैसी सख्त व्यवस्था के इस्तेमाल को लेकर राज्य सरकार के आधारों की जांच की और हिरासत आदेश को कानून के अनुरूप नहीं माना। अदालत ने इसे रद्द करते हुए अफरोज को राहत दी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस के सामने दिए गए कथित कबूलनामे को अकेले निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में संवैधानिक सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला भी रद्द
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जून 2026 में अफरोज की NSA हिरासत में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। रिकॉर्ड के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट संभल ने 13 अक्टूबर 2025 को NSA के तहत हिरासत आदेश पारित किया था, जिसे बाद में राज्य सरकार ने मंजूरी दी थी। अफरोज ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने अब हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए हिरासत को समाप्त कर दिया है।
यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत
सुप्रीम कोर्ट ने केवल हिरासत आदेश को रद्द नहीं किया, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत भी लगाई। अदालत ने निवारक हिरासत से जुड़ी शक्तियों के इस्तेमाल में कानूनी प्रक्रिया और नागरिक स्वतंत्रता के मानकों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
2024 की संभल हिंसा से जुड़ा मामला
नवंबर 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के अदालत द्वारा आदेशित सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। घटना के बाद कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए और मुल्ला अफरोज को भी आरोपी बनाया गया। पुलिस ने उसे जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसकी NSA के तहत हिरासत समाप्त हो गई है। हालांकि यह आदेश निवारक हिरासत से संबंधित है और हिंसा से जुड़े मूल आपराधिक मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण अलग न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
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