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मध्य पूर्व तनाव कम करने के लिए US-ईरान समझौते का मोदी ने किया स्वागत

Kavita2
15 Jun 2026 5:20 PM IST
मध्य पूर्व तनाव कम करने के लिए US-ईरान समझौते का मोदी ने किया स्वागत
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New Delhi नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले व्यवधानों को कम करेगा, बल्कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी इस समय अपने यूरोपीय दौरे के तहत स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में हैं। वहीं से उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत इस पहल का स्वागत करता है, क्योंकि पिछले कई महीनों से चल रहा यह संघर्ष वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता और कई देशों में जान-माल के नुकसान का कारण बना है।

अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने लिखा कि मध्य पूर्व में संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच आपसी समझौता एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास दुनिया को स्थिरता की दिशा में ले जाने में सहायक होते हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राहत मिलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि भारत को उम्मीद है कि इस समझौते का प्रभावी रूप से कार्यान्वयन किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे समुद्री मार्गों पर आवागमन की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और वैश्विक व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता केवल क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के लिए भी आवश्यक है। ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के दृष्टिकोण से यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे न केवल तनाव कम होगा बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। विशेष रूप से तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों में स्थिरता आने की संभावना है।

भारत लंबे समय से मध्य पूर्व में शांति और बातचीत आधारित समाधान का समर्थक रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान को उसी नीति की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी जाती है।

इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में भी इस समझौते को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई देशों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

फिलहाल, इस समझौते के क्रियान्वयन पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

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