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मोदी ने शी जिनपिंग से कही अहम बात रिश्ते सुधारने के लिए शांति जरूरी
Ratna Netam
12 Sept 2026 8:34 PM IST

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नई दिल्ली।भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के बीच प्रधानमंत्री **नरेंद्र मोदी** और चीनी राष्ट्रपति **शी जिनपिंग** की मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BRICS Summit 2026 के दौरान हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ संदेश दिया कि दोनों देशों के बीच स्थिर और सकारात्मक संबंधों के लिए **सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है।**
प्रधानमंत्री मोदी का यह रुख भारत की उस नीति को दोहराता है जिसमें कहा गया है कि सीमा पर शांति के बिना द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते। गलवान घाटी की घटना के बाद भारत लगातार चीन से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने और भरोसा बहाल करने की बात करता रहा है।
मोदी-शी मुलाकात पर दुनिया की नजर
BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर थी।
दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण संबंधों में तनाव रहा है।
2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई।
ऐसे समय में दोनों नेताओं की बातचीत को संबंध सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मोदी ने शांति को बताया जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन के रिश्तों में स्थिरता के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना सबसे जरूरी है।
भारत का लगातार कहना रहा है कि दोनों देशों को आपसी सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।
सीमा पर तनाव कम होने से ही व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
सीमा विवाद बना सबसे बड़ी चुनौती
भारत और चीन के बीच करीब 3,400 किलोमीटर लंबी सीमा है।
दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर कई क्षेत्रों में मतभेद रहे हैं।
सीमा विवाद दशकों पुराना है और इसे सुलझाने के लिए कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
हालांकि कुछ क्षेत्रों में तनाव कम करने के प्रयास हुए हैं, लेकिन पूरी तरह विश्वास बहाली अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
गलवान के बाद बदले रिश्ते
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प ने भारत-चीन संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
इस घटना में दोनों देशों के सैनिक हताहत हुए थे।
इसके बाद भारत ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की और चीन के साथ सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत शुरू हुई।
कई दौर की बातचीत के बाद कुछ क्षेत्रों में सैनिक पीछे हटे, लेकिन कई मुद्दे अभी भी चर्चा में हैं।
चीन के साथ संबंधों पर भारत का रुख
भारत का कहना है कि वह चीन के साथ अच्छे और स्थिर संबंध चाहता है, लेकिन इसके लिए सीमा पर शांति जरूरी है।
भारत ने कई बार स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
साथ ही भारत बातचीत के माध्यम से विवादों को सुलझाने के पक्ष में रहा है।
शी जिनपिंग का संदेश
बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने भी भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने दोनों देशों के बीच संवाद और आपसी समझ को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
चीन भी यह समझता है कि भारत एक बड़ी आर्थिक और राजनीतिक शक्ति बनकर उभर रहा है।
दोनों देशों के बीच स्थिर संबंध एशिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
BRICS मंच की अहमियत
BRICS ऐसा मंच है जहां भारत और चीन दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद वे इस समूह में साथ काम करते हैं।
BRICS Summit 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था, आतंकवाद, विकासशील देशों की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस मंच ने भारत और चीन को बातचीत का अवसर भी दिया।
व्यापार और आर्थिक संबंध
भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंध काफी बड़े हैं।
चीन भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।
हालांकि व्यापार घाटा और कुछ आर्थिक मुद्दों को लेकर भारत अपनी चिंताएं जाहिर करता रहा है।
दोनों देशों के बीच बेहतर राजनीतिक माहौल बनने से आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन
भारत के लिए चीन के साथ संबंधों में सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा है।
सीमा पर शांति बनाए रखना केवल सैन्य विषय नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा मामला है।
भारत अपनी सीमाओं पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ कूटनीतिक संवाद को भी जारी रखता है।
क्या बदलेंगे भारत-चीन रिश्ते?
मोदी और शी की मुलाकात से सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
सीमा विवाद, विश्वास की कमी और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे आसानी से खत्म नहीं होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों को छोटे-छोटे कदमों के जरिए भरोसा बहाल करना होगा।
एशिया के लिए क्यों जरूरी है शांति?
भारत और चीन एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं।
अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है तो पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
व्यापार, निवेश, ऊर्जा और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
लेकिन इसके लिए सीमा पर स्थिरता सबसे पहली शर्त मानी जाती है।
भारत की कूटनीतिक रणनीति
प्रधानमंत्री मोदी सरकार ने पिछले वर्षों में चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और संवाद दोनों को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई है।
भारत एक तरफ अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बातचीत के रास्ते खुले रखता है।
BRICS जैसे मंच इसी संतुलित कूटनीतिक नीति का हिस्सा हैं।
आगे की राह
अब नजर इस बात पर होगी कि मोदी-शी मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।
क्या सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों पर तेजी से प्रगति होगी?
क्या दोनों देश सैन्य तनाव कम करने के लिए नए कदम उठाएंगे?
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में सामने आएंगे।
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