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दिल्ली में 30 अक्टूबर को मॉक संसद, 'लोकतंत्र बनाम अराजकता' पर होगी बड़ी बहस

Ratna Netam
29 Oct 2026 9:20 PM IST
दिल्ली में 30 अक्टूबर को मॉक संसद, लोकतंत्र बनाम अराजकता पर होगी बड़ी बहस
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नई दिल्ली : 29 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को राजनीतिक हलचल तेज होने वाली है। एक ओर विपक्षी INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर विरोध कार्यक्रम आयोजित करेगा, वहीं दूसरी ओर 'सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी' (Citizens for Democracy) नामक संगठन ने 'लोकतंत्र बनाम अराजकता' विषय पर मॉक संसद आयोजित करने की घोषणा की है। इस कार्यक्रम में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं, राजनीतिक जवाबदेही और देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा की जाएगी। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्व पर विचार-विमर्श करना और नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक करना है।
NDMC कन्वेंशन सेंटर में होगा आयोजन
सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी की ओर से आयोजित मॉक संसद का कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में रखा गया है। कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे शुरू होगा।आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से नागरिकों और सामाजिक प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। मॉक संसद के लिए संसद जैसी अस्थायी व्यवस्था तैयार की गई है, ताकि प्रतिभागी संसदीय चर्चा के स्वरूप में अपने विचार रख सकें।कार्यक्रम में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका, कानून का शासन, विरोध प्रदर्शन की मर्यादा और राजनीतिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है।आयोजकों ने संकेत दिया है कि उनका कार्यक्रम लगभग चार घंटे तक चल सकता है। हालांकि, इसमें शामिल होने वाले सभी वक्ताओं की अंतिम सूची सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
लोकतंत्र और अराजकता के बीच अंतर पर होगी चर्चा
आयोजकों ने कार्यक्रम का विषय 'लोकतंत्र बनाम अराजकता' रखा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन इसके साथ संवैधानिक संस्थाओं और कानून के प्रति सम्मान बनाए रखना भी आवश्यक है।कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा की जाएगी कि राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और सार्वजनिक आंदोलनों के दौरान लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया जा सकता है।संगठन का तर्क है कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, संवाद और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से होना चाहिए।हालांकि, लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सरकार की आलोचना भी नागरिकों के मूल अधिकारों का हिस्सा हैं। इसलिए राजनीतिक विरोध और अराजकता को एक समान मानना उचित नहीं होगा।इस आयोजन में अलग-अलग राजनीतिक विचारों और लोकतांत्रिक जवाबदेही को लेकर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
INDIA गठबंधन भी करेगा अलग कार्यक्रम
दिल्ली में 30 अक्टूबर को विपक्षी INDIA गठबंधन ने भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की है।विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध दर्ज कराना चाहते हैं।कांग्रेस के अनुसार, विपक्ष पहले अशोक होटल में कार्यक्रम आयोजित करना चाहता था। इसके बाद रामलीला मैदान में आयोजन की योजना बनाई गई, लेकिन अनुमति संबंधी परेशानियों के कारण कार्यक्रम को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सरकारी आवास पर स्थानांतरित किया गया।यह कार्यक्रम नई दिल्ली के 10, राजाजी मार्ग स्थित खड़गे के आवास पर प्रस्तावित है।विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' आयोजित करने की बात कही है। हालांकि, यह कोई औपचारिक संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोध का कार्यक्रम है।
राहुल गांधी और खड़गे समेत कई नेता रखेंगे बात
INDIA गठबंधन के प्रस्तावित कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई प्रमुख विपक्षी नेताओं के शामिल होने की संभावना है।रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इस चर्चा की अध्यक्षता करेंगी।राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे, जबकि राहुल गांधी समापन संबोधन दे सकते हैं।विपक्ष का कार्यक्रम शाम चार बजे से आठ बजे तक प्रस्तावित है। इसमें करीब दो दर्जन वक्ताओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने कार्यक्रम को औपचारिक संसद की नकल के बजाय जन महाभियोग और लोकतांत्रिक विरोध के रूप में प्रस्तुत करने की बात कही है।
भाजपा की भूमिका को लेकर भी चर्चा
सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी के कार्यक्रम को विपक्षी गठबंधन के आयोजन के समानांतर देखा जा रहा है।कुछ मीडिया रिपोर्टों में इसे भाजपा समर्थित पहल बताया गया है। हालांकि, आयोजकों ने कहा है कि कार्यक्रम में भाजपा का कोई नेता या सांसद शामिल नहीं होगा।आयोजकों के मुताबिक, यह नागरिकों का मंच है और इसमें लोकतंत्र तथा संवैधानिक व्यवस्था के प्रति समर्थन व्यक्त किया जाएगा।कार्यक्रम का उद्देश्य उन राजनीतिक गतिविधियों का विरोध करना बताया गया है, जिन्हें आयोजक व्यवस्था में अस्थिरता पैदा करने वाली कोशिशों के रूप में देखते हैं।दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग करना और चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है।
चुनाव आयोग को लेकर बढ़ रहा राजनीतिक टकराव
देश में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दलों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों तथा कुछ मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं।विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों को किसी न्यायिक या स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष के बिना प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष की आलोचना करते हुए चुनावी संस्थाओं में विश्वास बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।इन मतभेदों के बीच दिल्ली में एक ही दिन आयोजित होने वाले कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
एक नवंबर की रैली से पहले तेज हुई सियासत
INDIA गठबंधन ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़े विरोध प्रदर्शन की भी घोषणा की है।इस रैली में चुनावी पारदर्शिता, कथित वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की योजना है।कांग्रेस ने विभिन्न राज्यों से कार्यकर्ताओं और समर्थकों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।ऐसे में 30 अक्टूबर को आयोजित होने वाले दोनों कार्यक्रम आगामी राजनीतिक गतिविधियों की पृष्ठभूमि तैयार कर सकते हैं।
दिल्ली में एक ही दिन दो अलग राजनीतिक मंच
राजधानी में आयोजित होने वाली दोनों बैठकों के उद्देश्य अलग-अलग हैं। सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी लोकतांत्रिक संस्थाओं और व्यवस्था की स्थिरता पर चर्चा करना चाहता है, जबकि INDIA गठबंधन चुनाव आयोग की जवाबदेही और कथित चुनावी अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहा है।एक ही दिन होने वाले इन आयोजनों से राजनीतिक विमर्श और तेज होने की संभावना है।फिलहाल सभी की निगाहें 30 अक्टूबर को एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर टिकी हैं। दोनों मंचों से आने वाले बयान लोकतंत्र, चुनाव सुधार और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर चल रही बहस को आगे बढ़ा सकते हैं।
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