दिल्ली-एनसीआर

तिहाड़ जेल से इंसानियत और पर्यावरण का संदेश

Anurag
30 Jun 2026 4:01 PM IST
तिहाड़ जेल से इंसानियत और पर्यावरण का संदेश
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New Delhi:दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कैदी अब एक अनोखी और सकारात्मक मुहिम के जरिए राजधानी की पर्यावरणीय स्थिति को सुधारने में योगदान दे रहे हैं। जहां एक तरफ दिल्ली लगातार बढ़ते प्रदूषण और हरियाली की कमी से जूझ रही है, वहीं तिहाड़ के कैदी न सिर्फ पौधे तैयार कर रहे हैं, बल्कि पक्षियों और जानवरों के लिए भोजन की व्यवस्था भी कर रहे हैं। यह पहल जेल परिसर के भीतर ही चल रही है, जो अब एक सामाजिक और पर्यावरणीय अभियान का रूप ले चुकी है।

इस मुहिम के तहत कैदी जामुन और आम जैसी फलों की गुठलियों को इकट्ठा कर उन्हें अंकुरित करते हैं और उनसे पौधे तैयार करते हैं। ये पौधे धीरे-धीरे देखभाल के बाद बड़े होते हैं। कैदी इन्हें अपने बच्चों की तरह संभालते हैं, नियमित रूप से पानी देते हैं और उनकी देखभाल करते हैं ताकि वे स्वस्थ रूप से विकसित हो सकें। जब ये पौधे तैयार हो जाते हैं, तो इन्हें दिल्ली के विभिन्न इलाकों में लगाया जाता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां हरियाली की कमी है और प्रदूषण का स्तर अधिक है।
इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए गौरैया संरक्षण के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सह अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने बताया कि दिल्ली में लगातार पेड़ों की संख्या घटती जा रही है, जबकि प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। इसके कारण न केवल इंसानों को समस्या हो रही है, बल्कि पक्षियों और जानवरों के लिए भी प्राकृतिक संसाधन कम हो गए हैं। उन्होंने बताया कि फलदार पौधों की कमी के कारण कई पक्षी दिल्ली छोड़कर अन्य स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
इसी समस्या को देखते हुए तिहाड़ जेल में कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर फलदार पौधे उगाने की पहल शुरू की गई थी। शुरुआत में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें जेल के कैदी भी जुड़ गए और यह एक बड़ा अभियान बन गया। अब कैदी इस काम को न केवल जिम्मेदारी के रूप में ले रहे हैं, बल्कि इसमें सक्रिय भागीदारी भी निभा रहे हैं।
इसके साथ ही कैदी बेजुबान पक्षियों और जानवरों के लिए भी भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। वे फलों और अन्य खाद्य सामग्री का इंतजाम करते हैं ताकि जेल के आसपास और शहर के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले जीवों को भोजन मिल सके। इस पहल का उद्देश्य सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बल्कि एक ऐसा संतुलित पर्यावरण तैयार करना है जहां इंसान और जीव-जंतु दोनों को बेहतर जीवन मिल सके।
यह प्रयास यह भी दर्शाता है कि जेल जैसी जगहों में भी सकारात्मक बदलाव और पुनर्वास की संभावनाएं मौजूद हैं। कैदियों को इस तरह की गतिविधियों से न केवल मानसिक रूप से राहत मिलती है, बल्कि वे समाज के लिए उपयोगी कार्यों में भी योगदान दे पाते हैं।
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