दिल्ली-एनसीआर

मीडिया रिपोर्टिंग जारी रहेगी सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही को लेकर दूर किया भ्रम

Ratna Netam
5 Aug 2026 5:22 PM IST
मीडिया रिपोर्टिंग जारी रहेगी सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही को लेकर दूर किया भ्रम
x
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय की कार्यवाही की रिपोर्टिंग को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि उसके हालिया अंतरिम आदेश का अर्थ यह नहीं है कि मान्यता प्राप्त समाचार संस्थानों को अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग से रोका गया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मीडिया संस्थान पहले की तरह न्यायिक कार्यवाही, कानूनी घटनाक्रमों और अदालत के फैसलों की रिपोर्टिंग कर सकते हैं, लेकिन रिपोर्टिंग के दौरान न्यायालय की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। अदालत ने कहा कि उसके 24 जुलाई के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या की जा रही थी, इसलिए इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक हो गया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, ने यह स्पष्टीकरण उस याचिका की सुनवाई के दौरान दिया जिसमें देशभर की अदालतों में लाइव स्ट्रीमिंग और न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के लिए एक समान व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। पीठ ने कहा कि 24 जुलाई को जारी अंतरिम आदेश के पैराग्राफ 11 को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बन गई थी, जिसे दूर करना आवश्यक था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मान्यता प्राप्त समाचार माध्यम अदालतों की कार्यवाही की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं। वे जनता को महत्वपूर्ण कानूनी मामलों, न्यायिक फैसलों और सुनवाई से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। हालांकि, रिपोर्टिंग के दौरान अदालत की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग अथवा उसकी क्लिप का किसी भी रूप में उपयोग नहीं किया जाएगा। अदालत ने दोहराया कि न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग का प्रसार, पुनःप्रसारण या व्यावसायिक उपयोग निर्धारित नियमों के अधीन रहेगा।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया संस्थानों को रिपोर्टिंग की स्वतंत्रता अवश्य है, लेकिन उन्हें 24 जुलाई के आदेश के पैराग्राफ 10 में निर्धारित प्रतिबंधों का पालन करना होगा। यानी न्यायालय की रिकॉर्ड की गई ऑडियो या वीडियो सामग्री को बिना अनुमति सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म या किसी अन्य माध्यम पर साझा नहीं किया जा सकता। अदालत का कहना है कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखना और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गौरतलब है कि 24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी डिजिटल मंच पर अपलोड, पोस्ट, री-पोस्ट, साझा, प्रसारित, संग्रहित, संपादित या उससे आर्थिक लाभ नहीं कमाया जा सकता। यह आदेश अदालतों की रिकॉर्डिंग के अनियंत्रित प्रसार को रोकने और न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से जारी किया गया था।
यह मामला अदालतों की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए पूरे देश में एक समान नियम लागू करने की मांग से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह संबंधित नोडल मंत्रालयों के माध्यम से एक व्यापक प्रस्ताव तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। इस प्रस्ताव में न्यायालयों की लाइव स्ट्रीमिंग, रिकॉर्डिंग और उनके उपयोग से जुड़े नियमों का विस्तृत प्रारूप शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्टों को भी निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी अदालतों में लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग व्यवस्था को लेकर तैयार किए गए मॉडल नियमों की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें। रिपोर्ट में यह भी बताया जाए कि अदालतों में लगातार और बिना किसी तकनीकी बाधा के लाइव स्ट्रीमिंग सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं और भविष्य में किन सुधारों की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी प्रतिवादियों को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की गई है। माना जा रहा है कि इस दौरान अदालत देशभर में न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग को लेकर एक व्यापक और एकरूप नीति तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्टीकरण से मीडिया संस्थानों के बीच बनी भ्रम की स्थिति काफी हद तक दूर हो जाएगी। अब यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायालय की कार्यवाही की तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पर कोई रोक नहीं है, लेकिन ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के उपयोग को लेकर पहले से लागू प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। इससे एक ओर न्यायिक पारदर्शिता बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर अदालत की कार्यवाही के दुरुपयोग पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा।
Next Story