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जंतर-मंतर पर भारी विरोध: 18 मेट्रो स्टेशन बंद, थमी लुटियंस दिल्ली की रफ्तार, स्कूली बच्चे बेहाल

नई दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली के दिल कहे जाने वाले जंतर-मंतर पर हुए विशाल प्रदर्शन और सुरक्षा घेरे के चलते पूरी लुटियंस दिल्ली में आम जनजीवन की रफ्तार अचानक थम गई। प्रशासनिक सुरक्षा और एहतियात के तौर पर जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गईं, जबकि 18 से अधिक मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थाई रूप से सील कर दिए गए। प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम का सीधा और गंभीर असर आम नागरिकों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों तथा विशेष रूप से स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों पर पड़ा।
प्रदर्शन के कारण लुटियंस दिल्ली और आसपास की प्रमुख सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। मंडी हाउस, कॉपरनिकस मार्ग और आसपास के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक इतना भीषण हो गया कि गाड़ियां घंटों तक एक ही जगह पर रेंगती रहीं। उमस भरी भीषण गर्मी के बीच कई स्कूली वैन और बसें जाम में फंस गईं। वैन के शीशों के पीछे पसीने से तर-बतर, भूख और प्यास से बेहाल छोटे-छोटे बच्चे काफी परेशान नजर आए। निजी स्कूल के छात्र साहिल ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वे कॉपरनिकस मार्ग पर पिछले दो घंटे से अधिक समय से फंसे हुए थे, जहाँ वाहनों के धुएं, तेज शोर और भीषण गर्मी ने विद्यार्थियों का बुरा हाल कर दिया।
मेट्रो स्टेशन बंद होने और इंटरनेट सेवा ठप होने से आम यात्रियों व छात्रों की मुसीबतें दोगुनी हो गईं। इंटरनेट बंद होने के कारण यूपीआई या ऑनलाइन पेमेंट की सुविधाएं काम नहीं कर रही थीं। इसके साथ ही रैपिडो, उबर या ओला जैसी कैब व बाइक टैक्सियां भी बुक नहीं हो पा रही थीं। राहुल नाम के एक छात्र ने बताया कि वे दोस्तों का एक समूह बनाकर नकद पैसे एकत्रित करके ई-रिक्शा के जरिए घर जाने को मजबूर हुए, लेकिन वे भी सड़कों पर लगे लंबे जाम में फंस गए।
सड़कों पर बने इस संकट के बीच कई बदहवास माता-पिता खुद अपनी गाड़ियों से बच्चों को लेने पहुंचे, लेकिन वे भी इसी भीषण ट्रैफिक जाम में उलझकर रह गए। अंततः कोई दूसरा उपाय न पाकर निराश अभिभावक अपने मासूम बच्चों की उंगलियां थामे और भारी-भरकम बस्ते अपने कंधों पर लादे तपती सड़कों पर पैदल ही घर की ओर बढ़ते दिखाई दिए। लुटियंस दिल्ली के केंद्र में उपजे इस ट्रैफिक और सेवा संकट ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और आपातकालीन योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





