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मानसा SSP की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, हरसिमरत बादल ने स्पीकर से की शिकायत

Ratna Netam
31 Oct 2026 7:50 PM IST
मानसा SSP की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, हरसिमरत बादल ने स्पीकर से की शिकायत
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नई दिल्ली/मानसा। पंजाब की बठिंडा लोकसभा सीट से सांसद और शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता हरसिमरत कौर बादल ने मानसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) वैभव चौधरी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इस मामले में हस्तक्षेप करने और संसदीय विशेषाधिकारों से जुड़े पहलुओं की जांच कराने की मांग की है। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब में पुलिस प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है।हरसिमरत कौर बादल की ओर से उठाया गया मामला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी सांसद द्वारा पुलिस अधिकारी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत करना संसदीय प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय होता है। हालांकि, केवल शिकायत दर्ज होने या कार्रवाई की मांग किए जाने से किसी अधिकारी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन साबित नहीं हो जाता। इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित संसदीय प्रक्रिया और जांच के बाद ही निकल सकता है।
मानसा में चल रहे विवाद के बीच बढ़ा मामला
हरसिमरत कौर बादल की यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब मानसा में दो घटनाओं को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। इनमें नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या और किसान दलजीत सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला शामिल है।इन घटनाओं को लेकर स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग उठाई है।29 अक्टूबर को मानसा में दोनों मामलों को लेकर प्रदर्शन जारी था। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तैनाती भी की थी।
एसएसपी के साथ फोन पर हुई थी तीखी बातचीत
रिपोर्ट के अनुसार, हरसिमरत कौर बादल ने 29 अक्टूबर को किसान दलजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी से फोन पर बातचीत की।बातचीत के दौरान सांसद ने दलजीत सिंह के शव को कथित तौर पर परिवार की इच्छा के विरुद्ध ले जाने के मामले पर नाराजगी जताई। उन्होंने दलजीत के पिता के बारे में भी एसएसपी से जानकारी मांगी।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एसएसपी ने कथित तौर पर कहा कि यदि परिवार को संबंधित व्यक्ति के ठिकाने की जानकारी नहीं है, तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई जानी चाहिए।इस बातचीत के बाद सांसद और पुलिस प्रशासन के बीच मतभेद सामने आए। हालांकि, विशेषाधिकार हनन की मांग में किन विशिष्ट शब्दों या घटनाओं को आधार बनाया गया है, इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या पर भी उठाए सवाल
इससे पहले हरसिमरत कौर बादल ने मानसा में नशे के खिलाफ सक्रिय रहे परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे।उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही है। सांसद ने संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी।बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने की मांग भी की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मामले में नशे के अवैध कारोबार, कुछ अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण से जुड़े पहलुओं की जांच आवश्यक है।ये आरोप सांसद की ओर से लगाए गए हैं। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ इन आरोपों की पुष्टि किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष से नहीं हुई है।
क्या होता है विशेषाधिकार हनन का मामला?
भारतीय संसदीय व्यवस्था में सांसदों को कुछ विशेष अधिकार और संरक्षण प्राप्त होते हैं, ताकि वे बिना अनुचित बाधा के अपने संसदीय दायित्वों का निर्वहन कर सकेंयदि किसी सांसद को लगता है कि उसके संसदीय कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप किया गया है या सदन अथवा उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो वह निर्धारित नियमों के अंतर्गत मामला उठा सकता है।हालांकि, किसी सांसद और प्रशासनिक अधिकारी के बीच विवाद होना अपने आप में विशेषाधिकार हनन साबित नहीं करता। इसके लिए यह देखना आवश्यक होता है कि संबंधित आचरण ने किसी मान्य संसदीय विशेषाधिकार को प्रभावित किया है या नहीं।लोकसभा अध्यक्ष ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर मामला विशेषाधिकार समिति को भी भेजा जा सकता है।
लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी नजर
हरसिमरत कौर बादल ने एसएसपी वैभव चौधरी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष की ओर से इस विशेष शिकायत पर किसी औपचारिक निर्णय या कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि एसएसपी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू हो चुकी है।यदि मामला आगे बढ़ता है, तो शिकायत में लगाए गए आरोपों, संबंधित घटनाक्रम और अधिकारी के पक्ष का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा। संसदीय प्रक्रिया में किसी भी निष्कर्ष से पहले संबंधित तथ्यों का आकलन आवश्यक है।
पंजाब की राजनीति में भी बढ़ी हलचल
मानसा की घटनाओं को लेकर शिरोमणि अकाली दल लगातार पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार से सवाल पूछ रहा है। हरसिमरत कौर बादल ने राज्य में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा पुलिस नेतृत्व की जवाबदेही तय करने की मांग की है।वहीं, मानसा में विरोध प्रदर्शन कर रहे संगठनों की प्राथमिक मांग पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की है।एसएसपी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की मांग से अब यह विवाद संसदीय स्तर तक पहुंचने की संभावना पैदा हो गई है। आगे की स्थिति लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और शिकायत की जांच पर निर्भर करेगी।फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि सांसद की शिकायत में बताए गए आचरण को संसदीय विशेषाधिकारों का उल्लंघन माना जाता है या नहीं।
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