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EC पर कांग्रेस नेताओं की टिप्पणी से आहत हुए थे मनमोहन सिंह: Qureshi

New Delhi नई दिल्ली : पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एसवाई कुरैशी ने अपनी आगामी किताब में 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग और तत्कालीन केंद्र सरकार के कुछ कांग्रेस नेताओं के बीच हुए विवाद का जिक्र किया है। कुरैशी ने दावा किया है कि इस टकराव से उस समय के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह काफी दुखी हुए थे।
एसवाई कुरैशी ने यह बात अपनी जल्द रिलीज होने वाली किताब "इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज़, नॉट ए मेमॉयर" में लिखी है। किताब में उन्होंने अपने कार्यकाल से जुड़े कई अनुभव साझा किए हैं, जिनमें चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और राजनीतिक दबाव से जुड़े प्रसंग भी शामिल हैं।
यह मामला जनवरी 2012 का है, जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक माहौल गर्म था। चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने मुसलमानों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण बढ़ाने को लेकर बयान दिया था।
खुर्शीद ने घोषणा की थी कि मुस्लिम समुदाय के लिए नौकरी आरक्षण को 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया जाएगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मामले को चुनाव आयोग के सामने उठाया और आरोप लगाया कि यह बयान चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। बीजेपी ने कहा कि चुनाव के दौरान इस तरह की घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है।
शिकायत मिलने के बाद चुनाव आयोग ने मामले की जांच शुरू की। आयोग ने सलमान खुर्शीद को नोटिस जारी किया और आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर सख्त रुख अपनाया।
कुरैशी के अनुसार, चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आयोग की आलोचना शुरू कर दी थी। कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए उसे "घमंडी और मनमाना" तक बताया था।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपनी किताब में लिखा है कि एक संवैधानिक संस्था के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियों से वह नाराज थे। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री के प्रेस सचिव हरीश खरे के सामने अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी।
कुरैशी के मुताबिक, चुनाव आयोग देश की एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिसकी जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव कराना है। ऐसे में आयोग के फैसलों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया होना सामान्य है, लेकिन संस्था की गरिमा पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम से तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह भी काफी दुखी थे। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि मनमोहन सिंह चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करते थे।
2012 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव देश के सबसे बड़े चुनावों में से एक था। उस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी (BSP), समाजवादी पार्टी (SP), कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला था।
चुनाव आयोग उस समय आचार संहिता के पालन को लेकर काफी सक्रिय था। आयोग की कोशिश थी कि चुनाव प्रचार के दौरान धर्म, जाति और समुदाय के आधार पर वोट मांगने या मतदाताओं को प्रभावित करने वाले बयानों पर रोक लगाई जाए।
एसवाई कुरैशी 2010 से 2012 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण चुनाव हुए और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर कई कदम उठाए गए।
अपनी किताब में कुरैशी ने चुनाव आयोग की भूमिका, राजनीतिक दलों के साथ संबंध और चुनावी व्यवस्था से जुड़े कई अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने बताया है कि संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती के लिए उनकी स्वतंत्रता और सम्मान बनाए रखना जरूरी है।





