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तीन साल बाद भी मणिपुर अशांत गौरव गोगोई ने उठाए सवाल

Ratna Netam
24 Oct 2026 3:03 PM IST
तीन साल बाद भी मणिपुर अशांत गौरव गोगोई ने उठाए सवाल
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इंफाल। मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और कुकी-ज़ो तथा मैतेई समुदायों के बीच नए तनाव को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। असम कांग्रेस के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने शनिवार, 24 अक्टूबर को राज्य की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हिंसा शुरू हुए तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मणिपुर में अब तक स्थायी शांति स्थापित नहीं हो सकी है। राज्य में लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं के कारण आम नागरिकों को भय, असुरक्षा और विस्थापन की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
तीन साल बाद भी मणिपुर में शांति नहीं
गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मणिपुर में तीन साल बाद भी हिंसा का दौर जारी है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के नागरिक भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।गोगोई ने कहा कि हिंसा के कारण समुदायों के बीच अविश्वास बढ़ रहा है। पुराने विवाद समाप्त होने से पहले ही नए तनाव सामने आ रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर सामान्य नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और विस्थापित परिवारों पर पड़ रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से जारी संकट के बावजूद केंद्र सरकार राज्य में स्थायी शांति बहाल करने में सफल नहीं हो पाई है।
300 से अधिक मौतें, हजारों लोग राहत शिविरों में
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा में 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लगभग 24 हजार लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।सितंबर 2026 में राज्य विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 31 अगस्त तक हिंसा में कम से कम 306 लोगों की मौत दर्ज की गई थी और 49 लोग लापता थे। बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों का पुनर्वास अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।गोगोई ने कहा कि विस्थापित परिवारों के सामने सुरक्षित आवास, बच्चों की शिक्षा, रोजगार और सामान्य जीवन में वापसी जैसी गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं।
नई हिंसक घटनाओं से बढ़ी चिंता
मणिपुर में हाल के दिनों में कुकी-ज़ो और मैतेई समुदायों के बीच तनाव बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा कुकी और नगा समुदायों के बीच बढ़ती हिंसा ने राज्य की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना दिया है।19 अक्टूबर को कांगपोकपी जिले में तीन मैतेई नागरिकों की हत्या के बाद विरोध प्रदर्शनों ने जोर पकड़ा। शुक्रवार को इंफाल के कांगला क्षेत्र में सैकड़ों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। राज्य के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने बताया कि हत्या के मामले में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग
गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि इतने लंबे समय के बाद भी राज्य में सामान्य स्थिति बहाल क्यों नहीं हो सकी है। उन्होंने हिंसा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, नागरिकों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की।उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की सिफारिशों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी। इसके अलावा जून 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित शांति समिति की प्रगति पर सवाल उठाए।कांग्रेस सांसद ने न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में देरी और सर्वदलीय बैठक की मांग को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
स्थायी शांति और पुनर्वास की चुनौती
मणिपुर में हिंसा का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। लंबे समय से विस्थापित परिवारों की आजीविका, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा भी प्रभावित हुई है।गोगोई ने केंद्र और राज्य सरकार से सभी समुदायों के बीच सार्थक बातचीत शुरू करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और विस्थापित लोगों के सम्मानजनक पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।फिलहाल राज्य में हालिया हिंसा के बाद सुरक्षा व्यवस्था और शांति बहाली की कोशिशों पर नजर बनी हुई है। मणिपुर में सामान्य स्थिति की वापसी के लिए समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।
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