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Mango डिप्लोमेसी से रिश्तों में नई परीक्षा

Kanchan Paikara
3 July 2026 4:47 PM IST
Mango डिप्लोमेसी से रिश्तों में नई परीक्षा
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New Delhi | नई दिल्ली : ढाका से कोलकाता और अगरतला तक इस बार आम की मिठास जरूर पहुंची है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या यह मिठास भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ी हुई कड़वाहट को कम कर पाएगी। बांग्लादेश सरकार की ओर से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री को आम भेजा जाना सिर्फ एक मौसमी सौजन्य नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दक्षिण एशियाई राजनीति में इसे एक बार फिर ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। यह वही परंपरा है जिसमें देशों के बीच रिश्तों में गर्मजोशी लाने के लिए आम जैसे फलों का उपयोग प्रतीकात्मक रूप से किया जाता है।
हाल के वर्षों में भारत और बांग्लादेश के संबंधों में पहले जैसी सहजता देखने को नहीं मिली है। शेख हसीना सरकार के बाद सत्ता परिवर्तन के चलते दोनों देशों के बीच विश्वास का संकट पैदा हुआ। विशेष रूप से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों पर हुए कथित हमलों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया। भारत ने कई बार इन घटनाओं पर चिंता जताई और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ता गया।
इसके बाद बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के साथ तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार बनने की चर्चा और उसके प्रयासों ने स्थिति को नया मोड़ दिया है। नई राजनीतिक परिस्थितियों में भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिशें शुरू हुई हैं।
इसी पृष्ठभूमि में आम भेजने की यह पहल केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि कूटनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है। यह संकेत माना जा रहा है कि दोनों देश अपने रिश्तों को फिर से सामान्य और मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
दक्षिण एशिया में फलों के माध्यम से कूटनीति का इतिहास काफी पुराना रहा है। आम को केवल एक फल नहीं बल्कि सद्भाव, संवाद और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इससे पहले भी कई देश, खासकर पाकिस्तान और बांग्लादेश, इस तरह की ‘फ्रूट डिप्लोमेसी’ का इस्तेमाल करते रहे हैं।
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