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मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों की प्रदर्शनी का किया दौरा
SHIDDHANT
5 Jan 2026 9:48 PM IST

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Delhi दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को नई दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी 'द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन' का दौरा किया। इस प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष को प्रदर्शित किया गया है, जो बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाते हैं।
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दौरे की तस्वीर पोस्ट करते हुए अपने अनुभव पोस्ट किए। उन्होंने अनुभव को साझा करते हुए लिखा, "यह एक बहुत ही विनम्र करने वाली याद दिलाता है कि भगवान बुद्ध का संदेश समय से बंधा नहीं है। मन की शांति, सभी के लिए करुणा और काम में समझदारी। आज दुनिया को इस रोशनी की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है।"
पिपरहवा अवशेष 1898 में ब्रिटिश पुरातत्वविद् विलियम क्लॉप्टन पीप्स द्वारा उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में स्थित पिपरहवा स्तूप से प्राप्त किए गए थे। इनमें भगवान बुद्ध की अस्थियां, बौद्ध भिक्षुओं की अस्थियां और सोने-चांदी के बर्तन शामिल हैं। ये अवशेष भारत सरकार द्वारा विभिन्न देशों में प्रदर्शित किए जा चुके हैं और अब पहली बार इस विशेष प्रदर्शनी में दिल्ली में आम जनता के लिए खुले हैं।
प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों और बौद्ध कला के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। इसमें प्राचीन मूर्तियां, चित्र, पांडुलिपियां और डिजिटल प्रोजेक्शन के माध्यम से बुद्ध की शिक्षाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। आयोजकों के अनुसार, यह प्रदर्शनी भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और वैश्विक स्तर पर बौद्ध धर्म की शांतिपूर्ण शिक्षाओं को फैलाने का प्रयास है।
मल्लिकार्जुन खड़गे का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब देश-विदेश में अशांति, हिंसा और सामाजिक विभाजन की घटनाएं बढ़ रही हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी पोस्ट में बुद्ध की शिक्षाओं, करुणा, अहिंसा और समानता को आज की दुनिया के लिए सबसे प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि बुद्ध का संदेश केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक सार्वभौमिक मार्गदर्शन है। प्रदर्शनी का आयोजन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), संस्कृति मंत्रालय और विभिन्न बौद्ध संगठनों के सहयोग से किया गया है। इसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी, इतिहास प्रेमी और आम नागरिक शामिल हो रहे हैं।
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