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'राहुल गांधी को नकली PM बना दो', विपक्ष पर भाजपा का जोरदार हमला
Ratna Netam
3 Nov 2026 2:25 PM IST

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन INDIA की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक जन-महाभियोग कार्यक्रम को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष की इस पहल पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए विपक्ष की मॉक संसद को राजनीतिक नाटक बताया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने का सपना केवल ऐसी नकली संसद में ही पूरा कर सकते हैं। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस के अभियान की आलोचना की और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए।राजनीतिक विवाद की शुरुआत विपक्षी गठबंधन INDIA की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित प्रतीकात्मक जन-महाभियोग कार्यक्रम से हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने मॉक संसद की कार्यवाही की अध्यक्षता की। कार्यक्रम के दौरान विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आरोप लगाए और उन्हें पद से हटाने की मांग करते हुए एक प्रतीकात्मक प्रस्ताव पारित किया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय केंद्र सरकार के प्रभाव में फैसले ले रहा है। उन्होंने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों में बदलाव से बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हुए हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं और इन्हें किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष की मॉक संसद पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस राहुल गांधी को राजनीतिक रूप से स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए सुझाव दिया कि यदि विपक्ष ने नकली संसद बनाई है, तो राहुल गांधी को उसका प्रधानमंत्री भी घोषित कर देना चाहिए। पात्रा ने कहा कि विपक्ष चाहे तो राहुल गांधी को हमेशा के लिए अपनी मॉक संसद का प्रधानमंत्री बनाए रख सकता है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसी मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का सपना विपक्ष की प्रतीकात्मक संसद तक ही सीमित रह जाएगा। शाह ने विपक्ष के कार्यक्रम की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेदों को लेकर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाना कितना उचित है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस के चुनाव आयोग विरोधी अभियान पर निशाना साधा है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का समर्थन करते हुए दावा किया कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरमा ने विपक्ष पर घुसपैठियों के नाम हटाए जाने का विरोध करने का आरोप लगाया। हालांकि, इस आरोप को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।दूसरी ओर, राहुल गांधी ने विपक्ष की मॉक संसद को लोकतंत्र और मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त संस्थागत अवसर नहीं मिल रहे हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो उन पर चर्चा करने के लिए विपक्ष को अलग से प्रतीकात्मक संसद आयोजित करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित बदलावों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दे पर आने वाले समय में और जानकारी सामने लाई जाएगी।विपक्षी गठबंधन के कार्यक्रम में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी दलों सहित कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। नेताओं ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव किसी भी लोकतंत्र की बुनियाद होते हैं। उनका कहना था कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।हालांकि, भाजपा ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनावी पराजय के लिए लगातार चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा नेताओं का तर्क है कि मतदाता सूची में सुधार और सत्यापन की प्रक्रिया चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
इस विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई है। भारतीय संविधान के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही हटाया जा सकता है। इसके लिए संसद में विशेष बहुमत सहित संवैधानिक शर्तों को पूरा करना आवश्यक होता है। ऐसे में विपक्ष की ओर से आयोजित मॉक संसद में पारित प्रस्ताव का कोई प्रत्यक्ष कानूनी प्रभाव नहीं है। यह एक प्रतीकात्मक राजनीतिक विरोध कार्यक्रम था।राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से देखा जाए तो मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का अभियान और भाजपा की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है। एक ओर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनावी पारदर्शिता तथा मतदाता अधिकारों का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं भाजपा विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने का आरोप लगा रही है।इस पूरे विवाद ने एक बार फिर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और संसदीय जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य प्रस्तुत करता है और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार इस राजनीतिक चुनौती का किस तरह जवाब देते हैं।
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