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पॉलीकैब को NCLAT से बड़ी जीत, दिवाला कार्यवाही रद्द करने का आदेश

Ratna Netam
30 Oct 2026 2:48 PM IST
पॉलीकैब को NCLAT से बड़ी जीत, दिवाला कार्यवाही रद्द करने का आदेश
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नई दिल्ली। देश की प्रमुख वायर और केबल निर्माता कंपनी पॉलीकैब इंडिया लिमिटेड (Polycab India Limited) को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) से बड़ी कानूनी राहत मिली है। ट्रिब्यूनल ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को कंपनी के खिलाफ शुरू की गई दिवाला कार्यवाही को रद्द कर दिया। इसके साथ ही कंपनी को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से मुक्त करते हुए अपने निदेशक मंडल के माध्यम से स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति दे दी गई है। यह फैसला कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उसके प्रबंधन और कारोबारी गतिविधियों पर दिवाला प्रक्रिया के कारण पैदा हुई कानूनी बाधाएं समाप्त हो गई हैं।
NCLAT की प्रधान पीठ ने पॉलीकैब इंडिया के निलंबित निदेशक भरत अजय जयसिंघानी की अपील को स्वीकार करते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की अहमदाबाद पीठ के 7 अक्टूबर 2026 के आदेश को निरस्त कर दिया। इसी आदेश के आधार पर कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू की गई थी। अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि दिवाला कार्यवाही शुरू करने वाला आदेश और उसके आधार पर जारी अन्य संबंधित आदेश भी रद्द किए जाते हैं।
इस मामले की सुनवाई कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति योगेश खन्ना तथा तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा और अजय दास मेहरोत्रा की पीठ ने की। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया की बाध्यताओं से मुक्त किया जाता है और अब वह अपने निदेशक मंडल के जरिए स्वतंत्र रूप से काम कर सकती है। फैसले के बाद कंपनी के प्रबंधन को सामान्य रूप से संचालन जारी रखने का रास्ता साफ हो गया है।
दरअसल, पूरा विवाद पॉलीकैब इंडिया और एसियर मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड (Asier Metals Private Limited) के बीच कारोबारी भुगतान से जुड़ा हुआ था। एसियर मेटल्स ने कंपनी के खिलाफ लगभग 2.78 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का दावा किया था। इसी आधार पर उसने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (IBC) की धारा 9 के तहत आवेदन दाखिल किया था। अहमदाबाद स्थित NCLT ने 7 अक्टूबर को इस आवेदन को स्वीकार कर कंपनी के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था।
जानकारी के अनुसार, एसियर मेटल्स और पॉलीकैब इंडिया के बीच वर्ष 2020 से कारोबारी संबंध थे। दोनों कंपनियों के बीच एल्युमीनियम इंगट की आपूर्ति को लेकर समझौता हुआ था। इसके तहत खरीद आदेशों के बदले अग्रिम भुगतान की व्यवस्था थी। एसियर मेटल्स का दावा था कि जून 2026 में जारी दो खरीद आदेशों के लिए निर्धारित अग्रिम भुगतान नहीं किया गया।
एसियर मेटल्स ने दावा किया कि उसने लगभग 34.16 करोड़ रुपये मूल्य के सामान की आपूर्ति की थी, जबकि पॉलीकैब की ओर से करीब 30.96 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। विभिन्न समायोजनों, क्रेडिट नोट और अन्य वित्तीय गणनाओं के बाद उसने लगभग 2.78 करोड़ रुपये की रकम बकाया बताई। भुगतान नहीं होने पर 6 अगस्त 2026 को मांग नोटिस जारी किया गया और इसके बाद 24 अगस्त को दिवाला याचिका दाखिल की गई।
दूसरी ओर, पॉलीकैब इंडिया ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच भुगतान और क्रेडिट नोट को लेकर पहले से विवाद मौजूद था। कंपनी का तर्क था कि बिलों का अंतिम मिलान नहीं हुआ था और कुछ वित्तीय समायोजन लंबित थे। उसके अनुसार, ऐसे विवाद की स्थिति में दिवाला प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं था।
कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि सामान की आपूर्ति और संबंधित बिलों को लेकर कई मुद्दों का समाधान होना बाकी था। इनमें लगभग 80 लाख रुपये की डिमरेज संबंधी कटौती का मुद्दा भी शामिल था। हालांकि, शुरुआती सुनवाई में NCLT ने कंपनी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और दिवाला आवेदन मंजूर कर लिया था। इसके बाद पॉलीकैब ने NCLAT का दरवाजा खटखटाया।
9 अक्टूबर 2026 को NCLAT ने अंतरिम राहत देते हुए NCLT के आदेश पर रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान पॉलीकैब की ओर से कहा गया कि कंपनी विवादित रकम जमा करने के लिए तैयार है, हालांकि इससे उसके कानूनी अधिकारों या दावों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। अपीलीय न्यायाधिकरण ने लगभग 2.78 करोड़ रुपये की दावा राशि अपने रजिस्ट्रार के नाम सावधि जमा में रखने का निर्देश दिया था।
इस कानूनी विवाद का प्रभाव कंपनी के शेयर बाजार से जुड़े मामलों पर भी पड़ने लगा था। दिवाला कार्यवाही शुरू होने के कारण शेयर बाजार में कंपनी की स्थिति और कुछ नियामकीय व्यवस्थाओं को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई थी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की ओर से कंपनी के इक्विटी डेरिवेटिव अनुबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का निर्णय भी सामने आया था।
इसके अतिरिक्त 27 अक्टूबर को NCLAT ने निर्देश दिया था कि अंतिम फैसला आने तक वैश्विक सूचकांक प्रदाता MSCI पॉलीकैब को अपने सूचकांकों से बाहर करने की कार्रवाई न करे। यह अंतरिम निर्देश कंपनी के शेयरों से संबंधित संभावित असर को देखते हुए दिया गया था।
शुक्रवार को अंतिम आदेश आने के बाद शेयर बाजार में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई दी। कारोबार के दौरान पॉलीकैब इंडिया के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। 30 अक्टूबर को सुबह करीब 10 बजकर 44 मिनट पर कंपनी का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में लगभग 2.42 प्रतिशत बढ़कर 7,932.50 रुपये तक पहुंचा था। हालांकि, बाद में शुरुआती बढ़त का कुछ हिस्सा कम हो गया।
पॉलीकैब इंडिया ने भी शेयर बाजारों को दी गई सूचना में पुष्टि की कि NCLAT ने उसकी अपील स्वीकार कर ली है और अहमदाबाद NCLT के 7 अक्टूबर के आदेश को रद्द कर दिया है। कंपनी ने इस संबंध में नियामकीय सूचना जारी कर फैसले की जानकारी दी।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पॉलीकैब देश की प्रमुख वायर और केबल निर्माता कंपनियों में शामिल है। कंपनी ने पूर्व में कहा था कि उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत है और नियमित कारोबारी गतिविधियां जारी हैं। कंपनी के अनुसार, 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लेखापरीक्षित आंकड़ों के आधार पर उसके पास 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध नकदी स्थिति थी।
हालांकि, NCLAT के फैसले को विवादित भुगतान दावे के अंतिम निपटारे के समान नहीं माना जाना चाहिए। यह आदेश कंपनी के खिलाफ शुरू की गई दिवाला प्रक्रिया को रद्द करने से संबंधित है। दोनों पक्षों के बीच बकाया राशि और अन्य वित्तीय दावों का समाधान लागू कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा सकता है।
फिलहाल NCLAT के इस फैसले से पॉलीकैब इंडिया को बड़ी कानूनी राहत मिली है। कंपनी अब अपने निदेशक मंडल के माध्यम से स्वतंत्र रूप से कारोबार संचालित कर सकेगी। न्यायाधिकरण का यह आदेश कॉरपोरेट दिवाला प्रक्रिया में पहले से मौजूद कारोबारी विवादों के महत्व को भी रेखांकित करता है।
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