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रेलवे यात्रियों के लिए बड़ी चेतावनी, ट्रेन में तेज आवाज में गाने या रील्स चलाने पर ₹1000 जुर्माना

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। अब ट्रेन के अंदर या रेलवे स्टेशन परिसर में मोबाइल फोन का स्पीकर चालू करके तेज आवाज में गाने सुनना, वीडियो देखना, रील्स चलाना या दूसरे यात्रियों को परेशान करने वाली आवाज में बातचीत करना महंगा पड़ सकता है। दक्षिण रेलवे ने इस संबंध में अपने सभी मंडलों को निर्देश जारी किए हैं। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे संगीत सुनने या वीडियो देखने के लिए इयरफोन का इस्तेमाल करें और फोन पर बातचीत करते समय आवाज धीमी रखें। नियमों का उल्लंघन करके दूसरे यात्रियों को परेशान करने वालों पर 1000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। चेतावनी के बावजूद लगातार परेशानी पैदा करने पर अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
ट्रेन में तेज आवाज में गाने सुनना पड़ेगा महंगा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में मोबाइल इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण ट्रेनों में तेज आवाज में वीडियो, फिल्में और रील्स देखने की प्रवृत्ति बढ़ी है। कई यात्री बिना इयरफोन लगाए मोबाइल फोन के स्पीकर पर मनोरंजन सामग्री चलाते हैं।
इससे आसपास बैठे यात्रियों को परेशानी होती है। विशेष रूप से लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा करने वाले बुजुर्गों, बच्चों और आराम करने वाले लोगों को तेज आवाज के कारण असुविधा का सामना करना पड़ता है।
इसी समस्या को देखते हुए दक्षिण रेलवे ने यात्रियों को जागरूक करने और आवश्यकतानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
1000 रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान
दक्षिण रेलवे के वाणिज्य विभाग ने 6 अक्टूबर 2026 को जारी परिपत्र में रेलवे अधिनियम की धारा 145 के प्रावधानों का उल्लेख किया है।
इसके अनुसार, ट्रेन या रेलवे परिसर में दूसरे यात्रियों को परेशान करने वाली गतिविधियों पर 1000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यदि कोई यात्री रेलवे कर्मचारी की वैध चेतावनी के बावजूद लगातार ऐसी गतिविधियां करता है, तो उसे छह महीने तक के साधारण कारावास या 5000 रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य यात्रियों को अनावश्यक शोर और असुविधा से बचाना है।
टिकट परीक्षकों को कार्रवाई का अधिकार
रेलवे ने टिकट परीक्षक या उससे वरिष्ठ पद के अधिकृत वाणिज्य कर्मचारियों को ऐसे मामलों में 1000 रुपये का जुर्माना लगाने का अधिकार दिया है।
यदि कोई यात्री बार-बार समझाने के बावजूद दूसरों को परेशान करता है, तो रेलवे अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा कानून में गंभीर परिस्थितियों में संबंधित यात्री को रेलवे से हटाने तथा टिकट या पास जब्त करने का भी प्रावधान है।
हालांकि, रेलवे की चेतावनी का मतलब यह नहीं है कि मोबाइल फोन पर सामान्य बातचीत करने या इयरफोन लगाकर गाने सुनने पर जुर्माना लगेगा। कार्रवाई का मुख्य आधार दूसरे यात्रियों के लिए परेशानी पैदा करने वाला व्यवहार है।
रेलवे स्टेशनों पर भी लागू होगी चेतावनी
यह निर्देश केवल ट्रेन के डिब्बों तक सीमित नहीं है। रेलवे स्टेशन परिसर में भी तेज आवाज में गाने बजाने, वीडियो देखने या अनावश्यक शोर करने से बचने को कहा गया है।
स्टेशनों पर हजारों यात्री ट्रेनों की प्रतीक्षा करते हैं। ऐसे में अत्यधिक शोर से यात्रियों को असुविधा हो सकती है।
रेलवे का प्रयास है कि स्टेशन परिसर और ट्रेनों में शांतिपूर्ण वातावरण बना रहे, जिससे यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल सके।
घोषणाओं और नोटिस से किया जाएगा जागरूक
दक्षिण रेलवे ने अपने मंडलों को निर्देश दिया है कि वे रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से यात्रियों को जागरूक करें।
इसके अलावा स्टेशन परिसरों में नोटिस और स्टिकर लगाकर भी यात्रियों को नियमों की जानकारी दी जाएगी।
घोषणाएं हिंदी, अंग्रेजी और संबंधित क्षेत्रीय भाषाओं में करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों तक संदेश पहुंच सके।
रेलवे ने मंडलों से जागरूकता अभियान के क्रियान्वयन की रिपोर्ट 20 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध कराने को भी कहा है।
एसी कोच में तेज आवाज से ज्यादा परेशानी
रेलवे ने अपने निर्देशों में विशेष रूप से वातानुकूलित डिब्बों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल से होने वाली परेशानी का भी उल्लेख किया है।
एसी कोच पूरी तरह बंद होते हैं, जिससे मोबाइल की तेज रिंगटोन, लंबे समय तक ऊंची आवाज में बातचीत और स्पीकर पर चलने वाले वीडियो की आवाज दूसरे यात्रियों के लिए अधिक असुविधाजनक हो सकती है।
रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2012 में भी मोबाइल फोन पर तेज आवाज में बातचीत और आपत्तिजनक रिंगटोन से होने वाली परेशानी के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे।
अब मोबाइल इंटरनेट और वीडियो स्ट्रीमिंग के बढ़ते चलन को देखते हुए इन्हीं व्यवस्थाओं पर नए सिरे से जोर दिया गया है।
मोबाइल पर वीडियो देखने के लिए इयरफोन इस्तेमाल करें
रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे यात्रा के दौरान कुछ सामान्य सावधानियां बरतें।
- मोबाइल पर गाने, वीडियो और रील्स देखने के लिए इयरफोन या हेडफोन लगाएं।
- फोन पर बातचीत करते समय आवाज धीमी रखें।
- रात में सो रहे यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखें।
- मोबाइल फोन की रिंगटोन और नोटिफिकेशन का वॉल्यूम कम रखें।
- दूसरे यात्रियों की आपत्ति के बाद तेज आवाज में ऑडियो चलाना बंद करें।
इन सावधानियों का पालन करके यात्रियों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता है।
यात्रियों की शिकायतों के बाद बढ़ाई सख्ती
दक्षिण रेलवे के निर्देशों के पीछे यात्रियों को होने वाली असुविधा एक प्रमुख कारण है।
कई बार ट्रेन में कुछ लोग बिना इयरफोन लगाए फिल्में और वीडियो देखते हैं। इससे आसपास बैठे लोगों को आराम करने, पढ़ने या बातचीत करने में परेशानी हो सकती है।
रेलवे के नए निर्देश का उद्देश्य यात्रा के दौरान सामूहिक अनुशासन को बढ़ावा देना और सभी यात्रियों को आरामदायक वातावरण उपलब्ध कराना है।
ट्रेन में मोबाइल इस्तेमाल पर रोक नहीं
रेलवे ने मोबाइल फोन के सामान्य इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। यात्री पहले की तरह फोन पर बातचीत कर सकते हैं, इंटरनेट चला सकते हैं और मनोरंजन सामग्री देख सकते हैं।
लेकिन उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि उनकी गतिविधियों से दूसरे यात्रियों को परेशानी न हो।
रेलवे की इस पहल से स्पष्ट है कि सार्वजनिक परिवहन में प्रत्येक यात्री की सुविधा और निजता का सम्मान करना जरूरी है।
अब दक्षिण रेलवे के मंडलों में इस संबंध में जागरूकता बढ़ाई जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों के खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।





