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दिल्ली बस गैंगरेप मामले में बड़ा अपडेट, आरोपियों पर कसा शिकंजा
nidhi
30 Sept 2026 10:48 AM IST

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फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर चार्जशीट
नई दिल्ली: दिल्ली में चलती स्लीपर बस में नाबालिग लड़की से कथित गैंगरेप के मामले में पुलिस ने ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में सामने आई DNA रिपोर्ट और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों को पुलिस ने मामले का सबसे मजबूत आधार बनाया है। पुलिस के अनुसार पीड़िता के कपड़ों और बस से मिले जैविक नमूनों का मिलान आरोपियों के DNA से हुआ है।
मामला 4 अगस्त 2026 का है। आरोप है कि ग्रेटर नोएडा से दिल्ली की ओर जा रही एक निजी स्लीपर बस में नाबालिग लड़की के साथ ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया। बस दिल्ली के कश्मीरी गेट की ओर जा रही थी। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
दिल्ली पुलिस ने 18 सितंबर को मामले में करीब 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने 24 सितंबर को इसका संज्ञान लिया। चार्जशीट में फॉरेंसिक रिपोर्ट, CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजों को शामिल किया गया है। पुलिस ने दर्जनों गवाहों के बयान भी चार्जशीट में जोड़े हैं।
जांच के दौरान पीड़िता के कपड़ों और बस के अंदर से सीमेन, बाल और अन्य जैविक नमूने एकत्र किए गए थे। इन नमूनों को फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया। रिपोर्ट में आरोपियों के DNA से मिलान होने की बात सामने आई, जिसे पुलिस ने आरोपों को साबित करने वाला महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य माना है।
पुलिस ने बस के अंदर से फिंगरप्रिंट और दूसरे फॉरेंसिक सबूत भी जुटाए थे। इसके अलावा घटनाक्रम को जोड़ने के लिए रास्ते में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इन्हीं फुटेज की मदद से पुलिस ने संदिग्ध बस की पहचान की और बाद में उसे तिमारपुर क्षेत्र से बरामद किया था। जांच में बस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल सामने आए। रिपोर्टों के मुताबिक बस में लगे कुछ सुरक्षा उपकरण प्रभावी स्थिति में नहीं थे। पुलिस ने बस संचालन से जुड़े रिकॉर्ड, कर्मचारियों की नियुक्ति और वाहन के दस्तावेजों की भी जांच की।
पुलिस ने पीड़िता के बयान को भी चार्जशीट का अहम हिस्सा बनाया है। जांच अधिकारियों के अनुसार पीड़िता ने घटना को लेकर अपने बयानों में लगातार एक समान जानकारी दी। उसके परिवार और यात्रा के दौरान संपर्क में आए अन्य लोगों के बयान भी जांच में शामिल किए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फॉरेंसिक रिपोर्ट जल्द तैयार कराने के लिए FSL से विशेष अनुरोध किया था। जांच अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक सबूत, गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्य मिलकर अभियोजन के मामले को मजबूत करते हैं। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। दोनों आरोपियों पर लगे आरोप अदालत में साबित किए जाने बाकी हैं। कानून के तहत अंतिम निर्णय अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर करेगी।
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