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मेकेदातु परियोजना को लेकर केंद्र से बड़ी बातचीत

Ratna Netam
22 Oct 2026 8:44 PM IST
मेकेदातु परियोजना को लेकर केंद्र से बड़ी बातचीत
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नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान राज्य की कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इनमें मेकेदातु पेयजल परियोजना, शरावती पंप स्टोरेज परियोजना, वन एवं वन्यजीव संबंधी मंजूरियां और पश्चिमी घाट से जुड़ी कस्तूरीरंगन रिपोर्ट प्रमुख रूप से शामिल रहीं। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से लंबित प्रस्तावों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की।बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में शिवकुमार ने चर्चा को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने संबंधित मंत्रालयों के बीच समन्वय बढ़ाने और लंबित मामलों पर औपचारिक बातचीत आगे बढ़ाने के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, इस बैठक में किसी परियोजना को अंतिम पर्यावरणीय या वन्यजीव मंजूरी मिलने की घोषणा नहीं हुई है।
मेकेदातु परियोजना पर जल्द मंजूरी की मांग
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक सरकार मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक मंजूरियों का इंतजार कर रही है। यह परियोजना कावेरी नदी पर प्रस्तावित है और इसका उद्देश्य बेंगलुरु सहित आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करना है।उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने परियोजना से जुड़े तकनीकी परीक्षण और सर्वेक्षण के लिए केंद्र के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।कर्नाटक सरकार की योजना कावेरी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में भू-तकनीकी जांच के लिए 20 बोरहोल तैयार करने की है। इसके लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति से अनुमति मांगी गई है।राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा प्रस्ताव केवल सर्वेक्षण और जांच से संबंधित है। इसमें अभी संरक्षित वन भूमि को परियोजना के लिए हस्तांतरित करने की अनुमति नहीं मांगी गई है।
केंद्रीय मंत्री से हुई सकारात्मक बातचीत
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पत्रकारों से कहा कि दिल्ली यात्रा के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की और राज्य की विभिन्न परियोजनाओं से संबंधित लंबित मुद्दों पर चर्चा की।उन्होंने कहा, "मैं दिल्ली आया था और अभी भूपेंद्र यादव से मिला हूं। मैंने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, मेकेदातु परियोजना, वन और वन्यजीव मंजूरियों तथा तटीय क्षेत्रों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय प्रभावों के मुद्दों पर चर्चा की है। हम एक नई नीति लाना चाहते हैं।"शिवकुमार ने बताया कि कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग विभागों और मंत्रालयों की मंजूरी आवश्यक है।उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने वन एवं जल संसाधन विभागों के बीच संयुक्त बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई है।
शरावती परियोजना को लेकर भी चर्चा
बैठक में कर्नाटक की 2,000 मेगावाट क्षमता वाली शरावती पंप स्टोरेज परियोजना पर भी चर्चा हुईयह परियोजना राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित हैमुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना से संबंधित आवश्यक तकनीकी दस्तावेज और स्पष्टीकरण केंद्र सरकार को उपलब्ध कराए गए हैं।इनमें बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज की तकनीकी रिपोर्ट भी शामिल है।शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति इन प्रस्तावों पर जल्द विचार करे।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर कर्नाटक की आपत्ति
मुख्यमंत्री ने पश्चिमी घाट को पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने से जुड़ी कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की सिफारिशों पर भी चर्चा की।कर्नाटक सरकार का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तावित प्रतिबंधों को लागू करने से पहले प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत भौतिक सर्वेक्षण किया जाना चाहिए।राज्य सरकार ने केंद्र से 27 जुलाई 2026 को जारी सातवीं मसौदा अधिसूचना को फिलहाल अंतिम रूप नहीं देने का आग्रह किया है।शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक सरकार की उच्चस्तरीय समिति पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके बाद लगभग एक वर्ष के भीतर प्रभावित क्षेत्रों का भौतिक सर्वेक्षण पूरा करने की योजना है।उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि सर्वेक्षण के निष्कर्षों और राज्य सरकार के सुझावों पर विचार करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाए।
पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों पर जोर
कर्नाटक सरकार का कहना है कि वह पश्चिमी घाट के पर्यावरण संरक्षण के खिलाफ नहीं है। हालांकि, राज्य चाहता है कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान वैज्ञानिक आंकड़ों और वास्तविक जमीनी परिस्थितियों के आधार पर की जाए।सरकार ने कृषि भूमि, आवासीय क्षेत्रों, पारंपरिक आजीविका और स्थानीय समुदायों के हितों पर भी विचार करने की मांग की है।सितंबर में कर्नाटक विधानसभा ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की समीक्षा और आवश्यक संशोधन की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था।
तटीय क्षेत्रों से जुड़े नियमों पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में पर्यावरणीय नियमों और विकास गतिविधियों से जुड़े मुद्दे भी उठाए।उन्होंने कहा कि तटीय क्षेत्रों के मानचित्रों और पर्यावरणीय वर्गीकरण की समीक्षा करते समय वास्तविक राजस्व अभिलेखों तथा भौतिक सर्वेक्षण का उपयोग किया जाना चाहिए।राज्य सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय मछुआरों, किसानों और अन्य समुदायों की आजीविका को सुरक्षित रखना है।शिवकुमार ने संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
संयुक्त बैठक से समाधान की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरियों की प्रतीक्षा में हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार के बीच नियमित संवाद जरूरी है।उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और जल संसाधन मंत्रालय के बीच प्रस्तावित संयुक्त बैठक से लंबित मामलों में आगे की प्रक्रिया तेज हो सकेगी।फिलहाल मेकेदातु और शरावती परियोजनाओं सहित अन्य प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय संबंधित वैधानिक प्रक्रियाओं और आवश्यक मंजूरियों के बाद ही लिया जाएगा।
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