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भारत की बड़ी कामयाबी, तुर्की से ड्रग तस्करी के आरोपी नवप्रीत सिंह की वापसी
Kavita2
3 Oct 2026 11:20 AM IST

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ भारतीय एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। वांछित नारको-तस्करी आरोपी नवप्रीत सिंह को तुर्की से भारत वापस लाया गया है। भारत पहुंचने के बाद उसे हिरासत में लिया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए इसे विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों के खिलाफ चल रही कार्रवाई में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। नवप्रीत सिंह की तुर्की से वापसी की पुष्टि ताजा रिपोर्टों में भी हुई है।
गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक नवप्रीत सिंह कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय ड्रग नेटवर्क से जुड़ा प्रमुख आरोपी है। भारतीय एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं। उसके तुर्की में मौजूद होने की जानकारी सामने आने के बाद उसे भारत वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय किया गया।
बताया गया है कि नवप्रीत सिंह तुर्की में कथित तौर पर ‘नवाब विर्क’ की पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। गृह मंत्री के मुताबिक उसने वहां की नागरिकता भी हासिल कर ली थी। अब उसे भारत लाए जाने के बाद उससे जुड़े मामलों की जांच आगे बढ़ाई जाएगी और उसके कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है।
इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क के खिलाफ भारत की मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से विदेशों में मौजूद वांछित आरोपियों को भारत वापस लाने के लिए संबंधित देशों की एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ा रही है।
भारत और तुर्की के बीच प्रत्यर्पण समझौता भी मौजूद है। इसके अलावा गृह मंत्रालय के मुताबिक भारत ने तुर्की समेत कई देशों के साथ सुरक्षा सहयोग तथा मादक पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थों की अवैध तस्करी रोकने से जुड़े द्विपक्षीय समझौते किए हैं। ऐसे तंत्र अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और सीमा पार ड्रग तस्करी के मामलों में एजेंसियों के बीच सहयोग का आधार बनते हैं।
नवप्रीत सिंह की वापसी के बाद भारतीय एजेंसियों के लिए अब उसके कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचना महत्वपूर्ण होगा। अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के मामलों में केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी तक जांच सीमित नहीं रहती। आम तौर पर एजेंसियां नशीले पदार्थों की खरीद, सप्लाई, वित्तीय लेनदेन, स्थानीय संपर्क और विदेशों में मौजूद सहयोगियों से जुड़ी कड़ियों की भी जांच करती हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई को केंद्र सरकार की नशीले पदार्थों के खिलाफ नीति से जोड़ा है। सरकार का कहना है कि विदेशों में छिपे वांछित ड्रग तस्करों को खोजकर भारत वापस लाने और उनके नेटवर्क को तोड़ने के लिए विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय सहयोग का इस्तेमाल कर रही हैं।
हाल के महीनों में भी विदेशों में मौजूद कई कथित ड्रग नेटवर्क संचालकों को भारत वापस लाने की कार्रवाई हुई है। अगस्त 2026 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने वांछित ड्रग तस्करी आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया को संयुक्त अरब अमीरात से भारत वापस लाया था। उस मामले में गृह मंत्रालय ने बताया था कि इंटरपोल और विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय के जरिए कार्रवाई की गई।
इससे पहले अप्रैल 2026 में NCB ने तुर्की से ही कुख्यात ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को भारत वापस लाने की जानकारी दी थी। इससे स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार नशीले पदार्थों के मामलों के आरोपियों को वापस लाने के लिए एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
नवप्रीत सिंह के मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसकी कथित बदली हुई पहचान है। अगर जांच में यह स्थापित होता है कि उसने विदेश में पहचान बदलकर अपना नेटवर्क संचालित किया, तो एजेंसियों के लिए उसके दस्तावेजों, संपर्कों और वित्तीय गतिविधियों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
किसी अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के संचालन में कई स्तर पर लोगों की भूमिका हो सकती है। इसमें नशीले पदार्थों की व्यवस्था करने वालों से लेकर परिवहन, वितरण और वित्तीय लेनदेन संभालने वाले लोग शामिल हो सकते हैं। ऐसे में नवप्रीत सिंह से पूछताछ के जरिए भारतीय एजेंसियां उसके कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर सकती हैं।
केंद्र सरकार विदेशों में फरार आरोपियों की वापसी को लेकर व्यापक अभियान चला रही है। गृह मंत्रालय ने अगस्त 2026 में बताया था कि 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़े आरोपियों को भारत वापस लाया गया था। इनमें आतंकवाद, गैंगस्टर नेटवर्क, आर्थिक अपराध और नारकोटिक्स जैसे मामलों में वांछित लोग शामिल रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई इसलिए भी चुनौतीपूर्ण होती है क्योंकि आरोपी एक देश में रहकर दूसरे देशों में अपना नेटवर्क संचालित कर सकते हैं। कई मामलों में फर्जी या बदली हुई पहचान, अलग-अलग देशों में संपर्क और जटिल वित्तीय लेनदेन जांच को कठिन बना देते हैं।
इसी कारण भारतीय एजेंसियां इंटरपोल और संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती हैं। भारत और तुर्की के बीच मौजूद प्रत्यर्पण समझौते में भी वांछित व्यक्ति की पहचान, गिरफ्तारी वारंट और अपराध से संबंधित कानूनी दस्तावेजों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया निर्धारित है।
नवप्रीत सिंह की भारत वापसी के बाद अब उसके खिलाफ लंबित मामलों में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उस पर लगे आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होगा। जांच एजेंसियों के सामने उसके कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, भारत में मौजूद संपर्कों और विदेशों में सक्रिय सहयोगियों से जुड़ी कड़ियों को सामने लाने की चुनौती रहेगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई को सरकार की ड्रग तस्करी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताया है। केंद्र सरकार का कहना है कि विदेश भागने या पहचान बदलने के बावजूद वांछित आरोपियों को वापस लाने के प्रयास जारी रहेंगे।
नवप्रीत सिंह की वापसी को इसी अभियान की नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। तुर्की में कथित तौर पर दूसरी पहचान के साथ रह रहे आरोपी को भारत वापस लाए जाने के बाद अब जांच का फोकस उसके पूरे नेटवर्क पर रहेगा। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का संचालन किस तरह किया जा रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।
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