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डिफेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव निजी कंपनियों को मिलेगा मिसाइल निर्माण का मौका
Ratna Netam
26 Aug 2026 4:57 PM IST

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दिल्ली : भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब देश में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाकर मिसाइल निर्माण को नई गति देने की तैयारी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के विकास में निजी क्षेत्र को शामिल किया जाए और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल तकनीक को विकसित किया जाए।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए भारत लगातार स्वदेशी हथियार प्रणालियों पर जोर दे रहा है। इसी कड़ी में निजी कंपनियों को मिसाइल निर्माण और रक्षा उपकरणों के विकास में बड़ी भूमिका देने की योजना बनाई जा रही है।
निजी कंपनियों को मिलेगा बड़ा मौका
अब तक भारत में मिसाइल निर्माण का प्रमुख जिम्मा सरकारी संस्थानों और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के पास रहा है। लेकिन बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल को देखते हुए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
निजी कंपनियों को अत्याधुनिक तकनीक, उत्पादन क्षमता और नई डिजाइन विकसित करने के अवसर दिए जा रहे हैं। इससे रक्षा उत्पादन में तेजी आने के साथ-साथ भारत की सैन्य जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और हथियारों के निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल तेजी से हो सकेगा।
1500 किलोमीटर स्ट्राइक रेंज का लक्ष्य
भारत लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। भविष्य में करीब 1500 किलोमीटर तक की स्ट्राइक रेंज वाली मिसाइल तकनीक विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
लंबी दूरी की मिसाइलें किसी भी देश की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करती हैं। इससे दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों तक पहुंच बनाने की क्षमता बढ़ती है और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलती है।
भारत पहले ही अग्नि सीरीज जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों के जरिए अपनी क्षमता दिखा चुका है। अब लक्ष्य नई पीढ़ी की मिसाइल प्रणालियों को और बेहतर बनाना है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अभियान चला रही है। इसका उद्देश्य हथियारों और सैन्य उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना है।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़ने से न केवल सेना को आधुनिक उपकरण मिलेंगे, बल्कि देश में रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों के आने से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नए अवसर मिल सकते हैं।
बदलती सुरक्षा जरूरतों के बीच बड़ा कदम
आज के समय में युद्ध की तकनीक तेजी से बदल रही है। ड्रोन, साइबर तकनीक, लंबी दूरी के हथियार और सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलें आधुनिक सैन्य क्षमता का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।
ऐसे में भारत भी अपनी सैन्य तैयारियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुसार मजबूत कर रहा है। लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता विकसित करना इसी रणनीति का हिस्सा है।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से मेक इन इंडिया अभियान को भी मजबूती मिलेगी। देश में बनने वाले हथियारों का इस्तेमाल भारतीय सेनाओं के साथ-साथ भविष्य में निर्यात के लिए भी किया जा सकता है।
भारत पहले ही कई देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। आने वाले समय में मिसाइल और अन्य अत्याधुनिक हथियारों के क्षेत्र में भी भारत अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
निजी क्षेत्र और DRDO के बीच सहयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों और सरकारी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। DRDO के पास वर्षों का अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता है, जबकि निजी कंपनियां उत्पादन क्षमता और नई सोच ला सकती हैं।
दोनों के सहयोग से कम समय में बेहतर रक्षा प्रणालियां तैयार की जा सकती हैं।
भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ाने की तैयारी
लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता किसी भी देश की सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत का यह कदम आने वाले वर्षों में उसकी रणनीतिक ताकत को और मजबूत कर सकता है।
निजी कंपनियों की भागीदारी, स्वदेशी तकनीक और आधुनिक हथियार प्रणालियों पर जोर के साथ भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
आने वाले समय में 1500 किलोमीटर स्ट्राइक रेंज जैसी क्षमताओं वाली मिसाइल प्रणालियां भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
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