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आस्था कुंज पार्क गैंगरेप केस में तीनों आरोपियों को बड़ा झटका

Ratna Netam
8 Oct 2026 5:35 PM IST
आस्था कुंज पार्क गैंगरेप केस में तीनों आरोपियों को बड़ा झटका
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के चर्चित आस्था कुंज पार्क सामूहिक दुष्कर्म मामले में साकेत कोर्ट ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण आदेश सुनाया। अदालत ने नाबालिग लड़की से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों हेमंत, मुकेश और आसिफ की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी है। विशेष पॉक्सो अदालत की न्यायाधीश स्वाति शर्मा ने तीनों आरोपियों की पिछली न्यायिक हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद यह आदेश दिया। आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश किया गया था। दिल्ली पुलिस ने तीनों आरोपियों को सितंबर में कालकाजी इलाके के आस्था कुंज पार्क में एक किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया था। मामले में पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है।
यह मामला दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास स्थित आस्था कुंज पार्क से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 21 सितंबर को 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई थी। शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और तीन संदिग्धों की पहचान की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया था।पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हेमंत, मुकेश और आसिफ के रूप में हुई है। तीनों को घटना के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और पुलिस की ओर से मामले से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई आरोपियों की पेशी
गुरुवार को तीनों आरोपियों की पिछली न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए साकेत कोर्ट में पेश किया गया। विशेष पॉक्सो न्यायाधीश स्वाति शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपियों की न्यायिक हिरासत अगले 14 दिनों के लिए बढ़ाने का आदेश दिया।इस आदेश के बाद तीनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में रहेंगे। न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने का अर्थ यह है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी रहने के दौरान आरोपियों को अदालत के आदेश के अनुसार हिरासत में रखा जाएगा। हालांकि, हिरासत बढ़ाने का आदेश आरोपियों के दोषी होने का अंतिम निर्णय नहीं है।इससे पहले 24 सितंबर को भी अदालत ने तीनों आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। उस समय अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने जांच से संबंधित जानकारी रखी थी। अदालत ने आरोपियों की हिरासत और मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए न्यायिक हिरासत का आदेश दिया था।
पुलिस टीम पर हमले के आरोप में आसिफ के खिलाफ अलग मामला
आस्था कुंज पार्क मामले में गिरफ्तार आरोपी आसिफ के खिलाफ पुलिस टीम की हत्या की कोशिश के आरोप में एक अलग मामला भी दर्ज किया गया है।पुलिस के मुताबिक, घटना की जांच के दौरान आसिफ को पकड़ने के लिए पुलिस टीम पहुंची थी। इस दौरान कथित मुठभेड़ की घटना सामने आई। पुलिस का आरोप है कि आसिफ ने पुलिसकर्मियों पर गोली चलाई थी।पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आसिफ के पैर में गोली लगी थी। इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। इस घटना के संबंध में पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने के आरोप में अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है।इस मामले की कानूनी प्रक्रिया सामूहिक दुष्कर्म के मामले से अलग चल रही है। आसिफ पर लगाए गए इन आरोपों की भी न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से जांच और सुनवाई की जाएगी।
जांच में सबूत मिटाने की कोशिश का भी आरोप
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि घटना के बाद कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर सबूत मिटाने का प्रयास किया।अभियोजन के अनुसार, आरोपियों ने घटना के बाद अपने कपड़े धो दिए थे। इसके अतिरिक्त मोबाइल फोन में मौजूद कुछ चैट भी हटाए जाने की बात कही गई थी।पुलिस ने इन आरोपों की जांच के लिए संबंधित कपड़ों और मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा था। फोरेंसिक परीक्षण के माध्यम से घटना से जुड़े संभावित तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।हालांकि, सबूत मिटाने से संबंधित आरोप भी अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। अदालत में साक्ष्यों और संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर ही इनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
पहले की सुनवाई में बचाव पक्ष ने उठाए थे सवाल
पिछली सुनवाई के दौरान आरोपियों के बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित कुछ आपत्तियां भी अदालत के सामने रखी थीं।बचाव पक्ष ने आरोप लगाया था कि हेमंत और मुकेश को गिरफ्तारी के पर्याप्त कारण नहीं बताए गए और परिवार के सदस्यों से मिलने में भी परेशानी हुई। इसके अलावा जेल में भोजन संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर भी शिकायत की गई थी।अदालत ने इन अर्जियों पर सुनवाई के बाद उन्हें खारिज कर दिया था। न्यायालय ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक हिरासत का आदेश दिया था।उस सुनवाई के दौरान अदालत ने घटना के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस की त्वरित कार्रवाई का भी उल्लेख किया था।
नाबालिग पीड़िता होने के कारण पॉक्सो कानून के तहत मामला
इस मामले में पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम होने के कारण पॉक्सो अधिनियम के प्रावधान लागू किए गए हैं। पॉक्सो कानून बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है।इस कानून के तहत नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था है। ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान गोपनीय रखना और उसके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।आस्था कुंज पार्क मामले की सुनवाई भी विशेष पॉक्सो अदालत में की जा रही है। अदालत के समक्ष अभियोजन और बचाव पक्ष को अपनी दलीलें तथा साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल
आस्था कुंज पार्क में हुई इस कथित घटना के बाद दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है।दिल्ली महिला आयोग ने भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस से घटना और अब तक की कार्रवाई के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।इसके अतिरिक्त राजधानी के पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों और निगरानी व्यवस्था से संबंधित मुद्दे भी चर्चा में आए हैं।
तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में, जांच जारी
साकेत कोर्ट के ताजा आदेश के बाद हेमंत, मुकेश और आसिफ की न्यायिक हिरासत अगले 14 दिनों के लिए बढ़ गई है। मामले में पुलिस की जांच और अदालत की कानूनी प्रक्रिया जारी है।इसके साथ ही आसिफ के खिलाफ पुलिस टीम पर कथित जानलेवा हमले का अलग मामला भी दर्ज है। दोनों मामलों में आरोपों की पुष्टि संबंधित साक्ष्यों और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर होगी।फिलहाल अदालत ने तीनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया है। मामले में अंतिम निर्णय आना बाकी है। आगे की सुनवाई में जांच से जुड़े तथ्यों और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर अदालत विचार करेगी।
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