दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली में INDIA गठबंधन का बड़ा प्रदर्शन

Ratna Netam
12 Oct 2026 4:33 PM IST
दिल्ली में INDIA गठबंधन का बड़ा प्रदर्शन
x
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को विपक्षी दलों के इंडिया (INDIA) गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। 'लोकतंत्र के लिए मार्च' के नाम से आयोजित इस प्रदर्शन में हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इस दौरान दिल्ली के कई महत्वपूर्ण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेड्स लगाए और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया।प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवाल थे। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज लहराए, हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
दिल्ली की सड़कों पर उतरे विपक्षी दलों के नेता
इंडिया गठबंधन के बैनर तले आयोजित इस मार्च में विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों को उठाना और चुनाव आयोग की जवाबदेही की मांग करना था।राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के कारण प्रदर्शन को व्यापक राजनीतिक महत्व मिला।मार्च में शामिल कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े नारे लगाए।प्रदर्शनकारियों के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज और अलग-अलग संदेश लिखी तख्तियां दिखाई दीं।विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत जानकारी में नहीं की गई है।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने निकले प्रदर्शनकारी
इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया।मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए।सड़कों पर बैरिकेड्स लगाए गए और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।प्रदर्शनकारियों की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के कारण राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ।विशेष रूप से बाराखंबा रोड और मंडी हाउस जैसे इलाकों में आवाजाही बाधित होने की जानकारी सामने आई।हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदर्शनकारी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच पाए या उन्हें किस स्थान पर रोका गया।
बाराखंबा रोड और मंडी हाउस में यातायात प्रभावित
विपक्ष के विरोध प्रदर्शन का असर मध्य दिल्ली की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा।बाराखंबा रोड और मंडी हाउस जैसे व्यस्त इलाकों में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी और पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।इन इलाकों में सरकारी कार्यालय, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। ऐसे में यातायात बाधित होने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि, यातायात कितनी देर तक प्रभावित रहा और किन मार्गों पर आधिकारिक डायवर्जन लागू किया गया, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
विरोध प्रदर्शन के दौरान इंडिया गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं।प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक चुनावों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।हालांकि, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगाए गए आरोपों को जांच या किसी सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
SIR को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR मतदाता सूची की समीक्षा और अद्यतन करने की प्रक्रिया है।इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं का नाम सूची में सुनिश्चित करना और नियमों के अनुसार आवश्यक सुधार करना होता है।इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की पात्रता, विवरण और सूची में दर्ज नामों से संबंधित विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जाती है।
इंडिया गठबंधन ने इसी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।वहीं, मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक माना जाता है।ऐसे में इस प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं।
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने उठाए सवाल
मार्च के दौरान कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए।उन्होंने विपक्ष की ओर से उठाई जा रही चिंताओं के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रियांक खड़गे के बयान के सटीक शब्द या उनके द्वारा लगाए गए विशिष्ट आरोपों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।इसलिए उनके नाम से किसी अतिरिक्त आरोप या टिप्पणी को जोड़ना उचित नहीं होगा।
राष्ट्रीय ध्वज और तख्तियां लेकर किया प्रदर्शन
दिल्ली में आयोजित मार्च के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता राष्ट्रीय ध्वज लेकर सड़कों पर उतरे।प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित नारे लगाए।इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठाई गई।विभिन्न विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने प्रदर्शन को संयुक्त राजनीतिक अभियान का स्वरूप दिया।नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी इस मार्च की एक महत्वपूर्ण विशेषता रही।प्रदर्शन का केंद्र चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी चिंताएं थीं।
चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज
इंडिया गठबंधन के इस विरोध प्रदर्शन ने मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस को फिर प्रमुखता दी है।विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए अपने आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाया है।हालांकि, इस प्रदर्शन के संबंध में चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।चुनाव आयोग का पक्ष और संबंधित दस्तावेज सामने आने पर आरोपों की स्थिति को अधिक स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।फिलहाल दिल्ली में आयोजित इस मार्च ने विपक्षी दलों की एकजुटता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उनकी आपत्तियों को सामने रखा है।
Next Story