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दक्षिण से पूर्व तक बड़ा राजनीतिक बदलाव, तीन राज्यों में सत्ता समीकरण बदल

Delhi दिल्ली: देश की राजनीति में सोमवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब केप कोमोरिन से लेकर कोलकाता तक राजनीतिक हवा बदलती नजर आई। इस बदलाव के चलते विपक्ष के तीन बड़े क्षेत्रीय नेताओं—केरल के पिनाराई विजयन, तमिलनाडु के एम.के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी—को अपने-अपने राजनीतिक गढ़ों में चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा।
तमिलनाडु की राजनीति में इस बार सबसे बड़ा बदलाव एक्टर से नेता बने विजय के रूप में देखा गया। अपने पहले ही चुनावी प्रदर्शन में उन्होंने राज्य की लंबे समय से चल रही द्रविड़ राजनीति को नया मोड़ दे दिया। विजय की एंट्री ने DMK और AIADMK की पारंपरिक राजनीतिक पकड़ को कमजोर करते हुए तमिलनाडु के राजनीतिक नक्शे को नया आकार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके प्रदर्शन ने राज्य में नई राजनीतिक ताकत की नींव रख दी है।
वहीं पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। वर्ष 2011 तक 33 वर्षों तक लेफ्ट फ्रंट का गढ़ रहे इस राज्य में अब राजनीतिक संतुलन तेजी से बदलता दिख रहा है। राज्य की लगभग 27 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी के बीच चुनावी समीकरणों को साधते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है। 2016 में जहां पार्टी का प्रदर्शन सीमित था, वहीं अब उसने अपने वोट शेयर और सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करते हुए दो-तिहाई बहुमत के स्तर तक पहुंचने का दावा किया है और 200 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है।
इस बदलाव को भारतीय राजनीति में एक बड़े पुनर्गठन के रूप में देखा जा रहा है, जहां क्षेत्रीय दलों की पारंपरिक पकड़ को राष्ट्रीय स्तर की पार्टियां चुनौती देती नजर आ रही हैं। पश्चिम बंगाल में इस बदलाव ने दशकों पुराने राजनीतिक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
केरल में भी पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार को बदलते राजनीतिक माहौल में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य में विपक्षी दल अपनी रणनीति को फिर से मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं।
इन सभी घटनाक्रमों के बीच राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि भारतीय राजनीति में नए नेतृत्व और नई राजनीतिक सोच के उदय का संकेत है। क्षेत्रीय राजनीति में लंबे समय से स्थापित दिग्गज नेताओं को अब नई पीढ़ी और नए राजनीतिक चेहरे कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
तमिलनाडु में विजय की सफलता को इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है, जिसने यह दिखाया है कि लोकप्रियता और नई राजनीतिक रणनीति से पारंपरिक राजनीति के समीकरण बदले जा सकते हैं।
फिलहाल देश की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है, जहां पुराने गढ़ कमजोर हो रहे हैं और नए राजनीतिक समीकरण तेजी से आकार ले रहे हैं।





