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दिल्ली में ड्रग्स तस्करों पर पुलिस का बड़ा एक्शन, 3.72 करोड़ की अवैध कमाई फ्रीज, 8 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस ने एक संगठित ड्रग्स तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और निशानदेही पर कुल 1.383 किलोग्राम स्मैक बरामद की है। इसके अलावा तस्करी से अर्जित होने के संदेह में 3 करोड़ 71 लाख 98 हजार 560 रुपये की रकम फ्रीज कराने के आदेश भी हासिल किए हैं। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि वर्ष 1976 में उत्तर भारत के लिए सक्षम प्राधिकरण की स्थापना के बाद मादक पदार्थों की अवैध कमाई के खिलाफ फ्रीजिंग आदेश की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है।
इस कार्रवाई को राजधानी में संगठित नशा तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के वित्तीय लेनदेन, आपूर्ति नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
ओखला औद्योगिक क्षेत्र थाने में दर्ज था मामला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई ओखला औद्योगिक क्षेत्र पुलिस थाने में एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर संख्या 225/2026 की जांच के दौरान की गई।
शुरुआत में पुलिस स्थानीय स्तर पर नशीले पदार्थ बेचने वाले संदिग्धों की गतिविधियों की जांच कर रही थी। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को एक बड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली।
इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग स्तर पर सक्रिय कथित तस्करों, आपूर्तिकर्ताओं और अन्य संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल शुरू की।
पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
आठ आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान किरण उर्फ राम प्रसाद, नीरज उर्फ थापा, अशोक उर्फ रामू, मनिया उर्फ सुमन पाठक, विक्की, गुड्डू, सुनीत उर्फ नन्हे और गोपी सिंह के रूप में की है।
पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों की कथित भूमिका मादक पदार्थों की आपूर्ति और अवैध कारोबार से जुड़ी हुई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नेटवर्क में किस आरोपी की क्या भूमिका थी और नशीले पदार्थों की आपूर्ति किन-किन इलाकों में की जाती थी।
आरोपियों से पूछताछ और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस पूरे नेटवर्क की गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।
1.383 किलोग्राम स्मैक बरामद
पुलिस ने इस मामले में कुल 1.383 किलोग्राम स्मैक बरामद करने की जानकारी दी है।
स्मैक हेरोइन से संबंधित एक अवैध मादक पदार्थ है, जिसकी तस्करी और गैरकानूनी बिक्री एनडीपीएस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है।
पुलिस अब बरामद मादक पदार्थों की आपूर्ति के स्रोत और वितरण व्यवस्था की जांच कर रही है।
इस संबंध में यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि आरोपियों को नशीले पदार्थ कहां से मिलते थे और इन्हें किन लोगों तक पहुंचाया जाता था।
हरियाणा के फरीदाबाद तक पहुंचे नेटवर्क के तार
जांच के दौरान पुलिस को कथित ड्रग्स नेटवर्क के हरियाणा के फरीदाबाद से जुड़े होने की जानकारी मिली है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच स्थानीय स्तर पर मादक पदार्थ बेचने वालों तक सीमित थी। लेकिन पूछताछ में बिचौलियों, आपूर्तिकर्ताओं और बड़े स्तर पर नशीले पदार्थ जमा करने वाले संदिग्धों के बारे में सुराग मिले।
पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क के कुछ कथित प्रमुख आपूर्तिकर्ता फरीदाबाद से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे थे।
अब पुलिस दिल्ली और हरियाणा के बीच कथित ड्रग्स आपूर्ति नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही है।
3.72 करोड़ रुपये की रकम फ्रीज
इस कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नशीले पदार्थों के कथित अवैध कारोबार से जुड़ी रकम को फ्रीज कराने का आदेश है।
पुलिस ने वित्तीय जांच के आधार पर 3 करोड़ 71 लाख 98 हजार 560 रुपये की रकम के संबंध में फ्रीजिंग आदेश हासिल किया है।
अधिकारियों को संदेह है कि यह रकम नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से अर्जित की गई थी।
हालांकि, रकम के वास्तविक स्रोत और प्रत्येक आरोपी से उसके संबंध की जांच अभी जारी है।
फ्रीजिंग आदेश का उद्देश्य जांच के दौरान संदिग्ध संपत्ति या रकम को स्थानांतरित होने से रोकना है।
1976 के बाद सबसे बड़ी कार्रवाई का दावा
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण दावा किया है।
अधिकारियों के अनुसार, उत्तर भारत के लिए सक्षम प्राधिकरण की स्थापना वर्ष 1976 में हुई थी। इसके बाद से संदिग्ध मादक पदार्थ कारोबार की कमाई के संबंध में 3.72 करोड़ रुपये का यह सबसे बड़ा फ्रीजिंग आदेश है।
पुलिस का कहना है कि इतनी बड़ी रकम पर कार्रवाई करना संगठित ड्रग्स नेटवर्क के आर्थिक ढांचे को प्रभावित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, इसे पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड आधारित दावा माना जाना चाहिए। रकम के अंतिम कानूनी निस्तारण का निर्णय संबंधित प्राधिकरण और निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
दो आरोपियों को आदेश की जानकारी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी सुनीत उर्फ नन्हे को फ्रीजिंग आदेश की प्रति उपलब्ध करा दी गई है।
वहीं, दूसरा आरोपी गोपी सिंह फरीदाबाद में दर्ज एक अलग मामले के संबंध में वहां की जेल में बंद है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गोपी सिंह को भी संबंधित जेल प्रशासन के माध्यम से आदेश की औपचारिक प्रति उपलब्ध कराई जाएगी।
इस प्रक्रिया के जरिए दोनों आरोपियों को उनके खिलाफ की गई वित्तीय कार्रवाई की जानकारी दी जाएगी।
ड्रग्स नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की जांच
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित नशा तस्करी नेटवर्क ने इतनी बड़ी रकम किस प्रकार अर्जित की।
इसके लिए आरोपियों के वित्तीय लेनदेन और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि रकम किन स्रोतों से प्राप्त हुई और उसका इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए किया जाना था।
आर्थिक जांच के माध्यम से कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित सहयोगियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
नशा तस्करी के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई महत्वपूर्ण
संगठित मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में केवल नशीले पदार्थ बरामद करना और आरोपियों को गिरफ्तार करना ही पर्याप्त नहीं होता।
ऐसे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों का पता लगाना भी आवश्यक होता है, क्योंकि अवैध कारोबार से अर्जित धन का इस्तेमाल आगे तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
इसी कारण जांच एजेंसियां मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में संदिग्ध संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल करती हैं।
यदि जांच में किसी रकम का अवैध मादक पदार्थ कारोबार से संबंध स्थापित होता है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई के बाद कथित तस्करी नेटवर्क की अन्य कड़ियों की जांच जारी है।
पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों के अतिरिक्त और कौन लोग मादक पदार्थों की आपूर्ति, वितरण या वित्तीय गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।
फिलहाल आठ आरोपियों की गिरफ्तारी, 1.383 किलोग्राम स्मैक की बरामदगी और लगभग 3.72 करोड़ रुपये की रकम फ्रीज कराने का आदेश इस मामले की प्रमुख कार्रवाई है।
जांच पूरी होने के बाद ही आरोपियों की वास्तविक भूमिका, कथित अवैध कमाई के स्रोत और नेटवर्क के विस्तार की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।





