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दिल्ली-एनसीआर
NGT का बड़ा आदेश याचिकाकर्ता और परिवार को मिलेगी पुलिस सुरक्षा
Ratna Netam
19 Oct 2026 5:44 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने उत्तर प्रदेश के आगरा में खारी नदी के बाढ़ क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने आगरा के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता देवाशीष भट्टाचार्य और उनके परिवार के दो सदस्यों को आवश्यक पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि नदी के फ्लडप्लेन पर निर्माण कार्य से जुड़े कुछ लोगों ने उन्हें कानूनी कार्रवाई बंद करने के लिए धमकाया और याचिका वापस लेने के बदले पैसे देने की पेशकश की।16 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए एनजीटी ने याचिकाकर्ता की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि पुलिस सुरक्षा के लिए उचित आवेदन मिलने पर याचिकाकर्ता और उनके परिवार के दो सदस्यों को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाए।यह आदेश एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने दिया।
याचिका वापस लेने के लिए धमकाने का आरोप
याचिकाकर्ता देवाशीष भट्टाचार्य ने ट्रिब्यूनल के समक्ष बताया कि खारी नदी के बाढ़ क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण का मामला उठाने के बाद उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ा।उनका आरोप है कि कुछ लोग स्वयं को ठेकेदार और बिल्डर बताते हुए उनके संपर्क में आए। इन लोगों ने उन पर एनजीटी में दायर याचिका वापस लेने का दबाव बनाया।भट्टाचार्य के अनुसार, संबंधित लोगों ने मामला वापस लेने के बदले आर्थिक लाभ देने की पेशकश भी की। उन्होंने आशंका जताई कि कानूनी कार्रवाई जारी रखने के कारण उनकी और परिवार के सदस्यों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।हालांकि, धमकी और पैसे देने की पेशकश से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आगरा पुलिस कमिश्नर को सुरक्षा देने का निर्देश
याचिकाकर्ता की ओर से उठाई गई सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए एनजीटी ने आगरा पुलिस कमिश्नर को आवश्यक निर्देश जारी किए।ट्रिब्यूनल ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा पुलिस सुरक्षा के लिए उचित आवेदन प्रस्तुत किए जाने पर उन्हें और परिवार के दो सदस्यों को अंतरिम सुरक्षा दी जाए।इस आदेश का उद्देश्य मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि वह बिना किसी भय या दबाव के कानूनी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकें।
खारी नदी के किनारे निर्माण पर उठाए सवाल
मामले की शुरुआत खारी नदी के बाढ़ क्षेत्र में कथित स्थायी निर्माण को लेकर दायर याचिका से हुई थी।देवाशीष भट्टाचार्य ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में नदी के फ्लडप्लेन पर निर्माण गतिविधियां की जा रही हैं। उन्होंने इस संबंध में पर्यावरणीय नियमों के संभावित उल्लंघन का मुद्दा उठाया।याचिकाकर्ता की चिंता है कि नदी के प्राकृतिक बहाव वाले क्षेत्र में स्थायी निर्माण होने से पर्यावरण और आसपास के इलाकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
21 अगस्त को भी NGT ने जारी किया था आदेश
इस मामले में एनजीटी ने इससे पहले 21 अगस्त को संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया था।ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि खारी नदी के किनारे किसी प्रकार का अवैध निर्माण नहीं हो।इसके बावजूद याचिकाकर्ता की ओर से निर्माण गतिविधियों और कथित दबाव का मुद्दा उठाए जाने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आया है।
नदी के फ्लडप्लेन पर निर्माण क्यों है चिंता का विषय?
नदी का फ्लडप्लेन वह क्षेत्र होता है, जहां बारिश या बाढ़ के दौरान नदी का पानी फैल सकता है।ऐसे क्षेत्रों में अनियोजित या नियमों के विरुद्ध स्थायी निर्माण होने से पानी के प्राकृतिक बहाव में बाधा उत्पन्न हो सकती हैइससे बाढ़ के दौरान आसपास की बस्तियों में जलभराव और नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र और भूजल पुनर्भरण पर भी असर पड़ सकता है।इसी कारण नदी किनारे निर्माण से जुड़े मामलों में पर्यावरणीय नियमों का पालन और संबंधित अधिकारियों की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पर्यावरण संरक्षण और याचिकाकर्ता की सुरक्षा का मामला
एनजीटी के सामने यह मामला अब दो महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ गया है। पहला, खारी नदी के बाढ़ क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण की जांच और दूसरा, पर्यावरण संबंधी शिकायत उठाने वाले याचिकाकर्ता तथा उनके परिवार की सुरक्षा।ट्रिब्यूनल के निर्देश के बाद अब आगरा पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उचित आवेदन प्राप्त होने पर पुलिस को अंतरिम सुरक्षा संबंधी निर्देश का पालन करना होगा।हालांकि, कथित अवैध निर्माण, धमकी और पैसे की पेशकश से जुड़े आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।इस मामले के 16 अक्टूबर के आदेश की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक प्रति नहीं मिल सकी है। खबर में आदेश संबंधी विवरण उपलब्ध सूचना पर आधारित हैं।
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