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Modi सरकार का बड़ा कदम, वंदे मातरम अपमान पर बनेगा कानून

New Delhi नई दिल्ली : राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सम्मान और सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। जानकारी के अनुसार नरेंद्र मोदी सरकार 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के आगामी सत्र में लोकसभा में एक संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। इस बिल में वंदे मातरम के अपमान या इसके गायन के दौरान किसी भी तरह की बाधा डालने पर दंड का प्रावधान शामिल किया जा सकता है।
प्रस्तावित विधेयक का नाम ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल’ बताया जा रहा है। इस बिल को केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही मंजूरी दे चुका है। अब इसे संसद की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को देश के प्रमुख राष्ट्रीय प्रतीकों के समान सम्मान और कानूनी संरक्षण देना बताया जा रहा है।
यह बिल गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के बाद लाया जा रहा है। इन दिशा-निर्देशों के तहत उन सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का गायन या वादन अनिवार्य किया गया है, जहां राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ बजाया जाता है। सरकार का मानना है कि वंदे मातरम स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में देशभक्ति की भावना जगाने वाला महत्वपूर्ण गीत रहा है, इसलिए इसे विशेष सम्मान मिलना चाहिए।
अगर यह विधेयक संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो जाता है, तो वंदे मातरम का अपमान एक दंडनीय अपराध बन सकता है। इसके बाद राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीकों की श्रेणी में कानूनी संरक्षण मिल सकता है।
हालांकि प्रस्तावित कानून में ‘अपमान’ की परिभाषा किस तरह तय की जाएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसी मुद्दे पर आने वाले समय में चर्चा होने की संभावना है, क्योंकि वंदे मातरम को लेकर पहले भी कई मामले अदालतों तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में कानून में अपमान की सीमा और अपराध की प्रकृति को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा।
वर्तमान में भारत में राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान पर ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। यह कानून देश के प्रमुख राष्ट्रीय प्रतीकों के जानबूझकर किए गए अपमान को अपराध मानता है। हालांकि वंदे मातरम के लिए अभी ऐसा कोई स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान मौजूद नहीं है।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस विधेयक को लेकर कहा गया है कि पिछली सरकारों ने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े वंदे मातरम को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका यह हकदार था। पार्टी का तर्क है कि कुछ आपत्तियों के कारण वंदे मातरम को लेकर पहले पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
गौरतलब है कि देश इस समय वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार और विभिन्न संगठनों की ओर से वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका को याद किया जा रहा है।
संसद के आगामी सत्र में इस विधेयक के अलावा जन्म और मृत्यु के देर से पंजीकरण की प्रक्रिया को सख्त बनाने से जुड़ा बिल भी पेश किए जाने की संभावना है। संसद में इन विधेयकों पर चर्चा के दौरान राजनीतिक बहस भी देखने को मिल सकती है।
कुल मिलाकर वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण देने वाला प्रस्तावित बिल राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़ा बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर संसद में होने वाली चर्चा और विधेयक के अंतिम स्वरूप पर टिकी हुई है।





