दिल्ली-एनसीआर

करोड़ों की ठगी का बड़ा खुलासा, एक ही परिवार के 3 आरोपी गिरफ्तार

nidhi
5 Nov 2026 7:41 AM IST
करोड़ों की ठगी का बड़ा खुलासा, एक ही परिवार के 3 आरोपी गिरफ्तार
x
60% ब्याज का लालच देकर करोड़ों की ठगी
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लोगों को महज 20 महीने में उनकी निवेश की गई रकम दोगुनी करने और सालाना 60 प्रतिशत तक ब्याज देने का लालच देकर करीब तीन करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोप में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस मामले में एक ही परिवार के तीन सदस्यों को बिहार की राजधानी पटना से गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर आकर्षक निवेश योजनाओं के जरिए लोगों की मेहनत की कमाई हड़पने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सत्यानंद यादव (51), विकास यादव (28) और एक 46 वर्षीय महिला के रूप में हुई है। तीनों एक ही परिवार से संबंधित हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी लंबे समय से गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने ठिकाने बदल रहे थे। आखिरकार तकनीकी निगरानी और जांच के आधार पर पुलिस ने उनकी लोकेशन का पता लगाकर पटना के दीघा इलाके से उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अब तक 27 लोगों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
20 महीने में रकम दोगुनी करने का दिया था लालच
पुलिस के अनुसार, आरोपी सत्यानंद यादव 'सत्या फाइनेंशियल कंसल्टेंसी सर्विसेज' नाम से एक फर्म संचालित करता था। इसी फर्म के माध्यम से लोगों को निवेश करने के लिए आकर्षित किया जाता था। निवेशकों को भरोसा दिलाया जाता था कि यदि वे कंपनी की योजनाओं में अपनी रकम लगाएंगे तो महज 20 महीने के भीतर उनकी रकम दोगुनी हो जाएगी। निवेशकों को सालाना 60 प्रतिशत तक ब्याज देने का दावा भी किया गया था। इस तरह के असाधारण मुनाफे के वादों ने कई लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया। अधिक कमाई की उम्मीद में लोगों ने अपनी जमा पूंजी फर्म में लगानी शुरू कर दी। शुरुआत में कुछ निवेशकों को रकम वापस भी दी गई थी। इससे अन्य लोगों का भरोसा बढ़ा। हालांकि बाद में कई निवेशकों को न तो वादा किया गया मुनाफा मिला और न ही उनकी मूल रकम वापस की गई।
27 निवेशकों ने दर्ज कराई शिकायत
आर्थिक अपराध शाखा के उपायुक्त इरशाद हैदर के मुताबिक, सुशील कुमार शर्मा सहित कई निवेशकों की शिकायत के आधार पर मामले में कार्रवाई शुरू की गई। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फर्म संचालकों ने उन्हें निवेश पर मोटा मुनाफा देने का भरोसा दिलाया था। इसी विश्वास के आधार पर उन्होंने बड़ी रकम जमा कराई, लेकिन निर्धारित समय पूरा होने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। जब निवेशकों ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। अब तक कुल 27 लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है। शुरुआती जांच में धोखाधड़ी की रकम करीब तीन करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इनके अलावा अन्य लोग भी इस कथित धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं।
निजी बैंक खातों में भी जमा कराई गई रकम
जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। बताया गया कि निवेशकों से जुटाई गई रकम केवल फर्म के खातों में ही नहीं, बल्कि आरोपियों के निजी बैंक खातों में भी जमा कराई गई थी। इस खुलासे के बाद पुलिस वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि निवेशकों से प्राप्त करोड़ों रुपये आखिर कहां खर्च किए गए और क्या इस रकम से कोई संपत्ति खरीदी गई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने रकम अपने पास रखी या उसे अन्य खातों में स्थानांतरित किया। बैंक खातों और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की जांच से कथित धोखाधड़ी की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
गिरफ्तारी से बचने के लिए बदलते रहे ठिकाने
पुलिस के मुताबिक, निवेशकों से बड़ी रकम जुटाने के बाद आरोपी गायब हो गए थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे लगातार अपना ठिकाना बदल रहे थे। आर्थिक अपराध शाखा ने आरोपियों की तलाश में विभिन्न स्तरों पर जांच की। उनके खिलाफ अदालत से गैर-जमानती वारंट हासिल किए गए। इसके अलावा पुराने ठिकानों पर नोटिस भी चस्पा किए गए। लगातार प्रयासों और तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस को आरोपियों के पटना में छिपे होने की जानकारी मिली। इसके बाद एक टीम ने बिहार पहुंचकर कार्रवाई की और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
एक ही परिवार के तीन सदस्यों की भूमिका की जांच
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी एक ही परिवार के सदस्य हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले निजी कारोबार से जुड़े हुए थे। बाद में उन्होंने निवेश के नाम पर अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों से रकम जुटानी शुरू की। जांच एजेंसियां अब तीनों की अलग-अलग भूमिकाओं का पता लगा रही हैं। साथ ही यह जांच भी की जा रही है कि कथित निवेश योजनाओं को संचालित करने में और कौन-कौन शामिल था। पुलिस के सामने एक बड़ा सवाल यह भी है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम की कितनी राशि बरामद की जा सकती है। फिलहाल इस संबंध में किसी निश्चित बरामदगी की जानकारी सामने नहीं आई है।
निवेश के नाम पर ठगी से सावधान रहने की जरूरत
यह मामला उन लोगों के लिए भी चेतावनी है, जो कम समय में अपनी रकम दोगुनी करने के वादों पर भरोसा करके निवेश कर देते हैं। वित्तीय विशेषज्ञ आमतौर पर सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, पंजीकरण और जोखिम की जानकारी जरूर हासिल करनी चाहिए।
Next Story