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BRICS Summit में बड़ा कूटनीतिक कदम नई दिल्ली घोषणा पर सहमति

Ratna Netam
12 Sept 2026 5:21 PM IST
BRICS Summit में बड़ा कूटनीतिक कदम नई दिल्ली घोषणा पर सहमति
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नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन बड़ी कूटनीतिक कामयाबी सामने आई है। सदस्य देशों ने महत्वपूर्ण New Delhi Declaration 2026 को सर्वसम्मति से अपना लिया। दुनिया में जारी युद्ध, पश्चिम एशिया के तनाव और BRICS के भीतर कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख के बावजूद साझा घोषणा पत्र पर सहमति बनना भारत की अध्यक्षता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत BRICS देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने सम्मेलन को वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद अहम बना दिया।
New Delhi Declaration में बहुपक्षवाद, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, वैश्विक संस्थाओं में सुधार, शांतिपूर्ण तरीके से संघर्षों के समाधान, व्यापार, सतत विकास और डिजिटल इनोवेशन जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है।
पहले ही दिन बनी सर्वसम्मति
BRICS जैसे विस्तारित समूह में साझा घोषणा पत्र पर सहमति बनाना आसान नहीं माना जा रहा था। समूह में शामिल देशों के कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग हित हैं।
खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेदों के कारण घोषणा पत्र पर सहमति को लेकर संशय बना हुआ था। इसके बावजूद लंबी बातचीत के बाद सदस्य देश साझा भाषा पर सहमत हो गए।
यही कारण है कि सम्मेलन के पहले दिन New Delhi Declaration को अपनाए जाने को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
भारत की कोशिश थी कि BRICS के भीतर मतभेदों के बावजूद उन मुद्दों पर सहमति बनाई जाए जिनका संबंध ग्लोबल साउथ और बदलती विश्व व्यवस्था से है।
भारत के लिए क्यों बड़ी कामयाबी?
2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। भारत ने अपनी अध्यक्षता की थीम Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability रखी है।
इसका फोकस केवल राजनीतिक मुद्दों पर नहीं बल्कि विकास, तकनीक, व्यापार, वित्त, सतत विकास और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी है।
BRICS अब पहले के पांच देशों वाला संगठन नहीं रह गया है। इसका विस्तार होने के बाद इसमें अलग-अलग क्षेत्रों और राजनीतिक हितों वाले देश शामिल हो चुके हैं। ऐसे में सभी को एक साझा घोषणा पर सहमत करना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है।
भारत की अध्यक्षता में पहले दिन ही इस बाधा को पार कर लिया गया।
आतंकवाद पर कड़ा संदेश
नई दिल्ली घोषणा पत्र में आतंकवाद के मुद्दे को भी प्रमुखता मिली है। BRICS देशों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों के खिलाफ सहयोग मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक घोषणा में आतंकवाद से मुकाबले में दोहरे मानदंडों से बचने और इस चुनौती से सामूहिक रूप से निपटने की बात कही गई है।
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ एक समान वैश्विक नीति की मांग करता रहा है।
नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद को महत्वपूर्ण स्थान मिलना इसलिए भी भारत के लिए अहम माना जा रहा है।
युद्ध नहीं बातचीत से निकले समाधान
दुनिया इस समय कई बड़े संघर्षों से जूझ रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्गों को प्रभावित किया है।
BRICS घोषणा में संघर्षों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से हल करने पर जोर दिया गया है।
सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय व्यवस्था के महत्व को भी दोहराया।
यह संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया में बढ़ते संघर्षों के कारण तेल की कीमतें, सप्लाई चेन और वैश्विक व्यापार दबाव में हैं।
UNSC सुधार पर भारत की मजबूत आवाज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान वैश्विक संस्थाओं में सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि दशकों पुरानी वैश्विक व्यवस्था आज की आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती।
मोदी ने भी अपने संबोधन में वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की जरूरत पर जोर दिया।
UNSC के साथ विश्व बैंक, IMF और WTO जैसी संस्थाओं में सुधार BRICS के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
ग्लोबल साउथ पर भारत का जोर
भारत BRICS को पश्चिम के खिलाफ खड़े किसी सैन्य या राजनीतिक गठबंधन के बजाय ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में पेश करता रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में भी इसी सोच को आगे बढ़ाया।
उनका जोर विकासशील देशों की समस्याओं को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में लाने पर रहा। खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक, विकास वित्त और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे विकासशील देशों के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण हैं।
BRICS इन मुद्दों पर सामूहिक आवाज तैयार करने का बड़ा मंच बनता जा रहा है।
BRICS का बढ़ा वैश्विक प्रभाव
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के समूह के रूप में हुई थी। बाद में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ और हाल के वर्षों में संगठन का तेजी से विस्तार हुआ।
भारत सरकार के मुताबिक वर्तमान BRICS सदस्य सामूहिक रूप से दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक GDP के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इतने बड़े आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रभाव के कारण BRICS के फैसलों को अब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं गंभीरता से देखती हैं।
समूह के विस्तार के साथ उसकी ताकत बढ़ी है, लेकिन इसके साथ अलग-अलग देशों के हितों में संतुलन बनाने की चुनौती भी बढ़ी है।
ईरान-UAE मतभेद बड़ी चुनौती
नई दिल्ली घोषणा पर सहमति से पहले सबसे मुश्किल मुद्दों में ईरान और UAE के अलग-अलग रुख को संतुलित करना था।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण दोनों सदस्य देशों की प्राथमिकताएं अलग हैं। यही वजह थी कि सम्मेलन से पहले सवाल उठ रहे थे कि क्या सभी सदस्य एक संयुक्त घोषणा पर सहमत हो पाएंगे।
रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय वार्ताकारों ने मतभेदों को कम करने और सभी पक्षों को स्वीकार्य भाषा तैयार करने के लिए गहन बातचीत की।
आखिरकार सर्वसम्मति बन गई।
व्यापार और स्थानीय मुद्राओं पर भी फोकस
BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ाना भारत की अध्यक्षता के महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल है।
सम्मेलन से ठीक पहले भारत ने सदस्य देशों से ज्यादा संतुलित व्यापार, बाजार तक आसान पहुंच और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने की अपील की थी।
इसके अलावा सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों को जोड़ने और आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने की बात भी सामने आई।
इसका उद्देश्य व्यापारिक लेनदेन को आसान बनाना और वित्तीय सहयोग बढ़ाना है।
हालांकि BRICS की किसी साझा मुद्रा को लेकर अभी कई व्यावहारिक और राजनीतिक चुनौतियां मौजूद हैं।
शी जिनपिंग और पुतिन की मौजूदगी अहम
नई दिल्ली सम्मेलन की एक और खास बात दुनिया के कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनकी यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 के सीमा संघर्ष के बाद भारत और चीन के संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा था।
शी और मोदी के बीच द्विपक्षीय बातचीत पर भी दुनिया की नजर है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी भी सम्मेलन के रणनीतिक महत्व को बढ़ाती है।
भारत रूस के साथ पुराने संबंध बनाए रखने के साथ पश्चिमी देशों से भी मजबूत साझेदारी रखता है। ऐसे में नई दिल्ली अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन की नीति को आगे बढ़ाती दिखाई दे रही है।
BRICS किसी के खिलाफ नहीं
भारत लगातार यह संदेश देता रहा है कि BRICS को किसी देश या समूह के खिलाफ गठबंधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नई दिल्ली की कोशिश संगठन को सहयोग, विकास और वैश्विक संस्थागत सुधार के मंच के रूप में पेश करने की है।
यह रुख चीन और रूस की कुछ हद तक ज्यादा भू-राजनीतिक BRICS दृष्टि से अलग माना जाता है। भारत और ब्राजील जैसे देश आर्थिक और विकास सहयोग को ज्यादा प्राथमिकता देते रहे हैं।
इस अंतर के बावजूद साझा घोषणा पर सहमति संगठन के भीतर सहयोग की क्षमता दिखाती है।
डिजिटल इनोवेशन और सतत विकास
New Delhi Declaration केवल युद्ध और राजनीति तक सीमित नहीं है।
इसमें आर्थिक सहयोग, डिजिटल इनोवेशन, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने की बात शामिल है।
भारत अपनी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता को ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझा करने की वकालत करता रहा है।
AI और नई तकनीकों के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच विकासशील देशों की तकनीकी भागीदारी भी BRICS के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।
दुनिया को क्या संदेश?
New Delhi Declaration की सबसे बड़ी राजनीतिक अहमियत BRICS की एकजुटता से जुड़ी है।
11 देशों वाले विस्तारित समूह में अलग-अलग राजनीतिक व्यवस्थाएं, आर्थिक प्राथमिकताएं और रणनीतिक हित मौजूद हैं। इसके बावजूद साझा वैश्विक मुद्दों पर एक दस्तावेज स्वीकार करना यह संकेत देता है कि सदस्य देश मतभेदों के बीच भी सहयोग का रास्ता तलाशना चाहते हैं।
दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह संदेश महत्वपूर्ण है।
भारत की कूटनीति की परीक्षा
BRICS Summit 2026 भारत के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन नहीं बल्कि उसकी बहुपक्षीय कूटनीति की बड़ी परीक्षा भी है।
एक तरफ रूस, चीन और ईरान जैसे देश हैं तो दूसरी तरफ UAE और दूसरे सदस्य देशों के अपने रणनीतिक हित हैं। भारत खुद अमेरिका और यूरोप के साथ मजबूत संबंध रखते हुए रूस के साथ पुरानी साझेदारी बनाए हुए है।
ऐसे विविध समूह के भीतर सर्वसम्मति बनाना आसान नहीं था।
यही वजह है कि पहले दिन New Delhi Declaration को मंजूरी मिलना भारत की अध्यक्षता की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जा रहा है।
दूसरे दिन भी कई मुद्दों पर नजर
BRICS Summit 2026 का आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हो रहा है। पहले दिन संयुक्त घोषणा को मंजूरी मिलने के बाद अब दूसरे दिन सहयोग के दूसरे क्षेत्रों और द्विपक्षीय बैठकों पर नजर रहेगी।
व्यापार, निवेश, वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दे आगे भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
लेकिन पहले दिन की सबसे बड़ी खबर साफ है—वैश्विक तनाव और सदस्य देशों के मतभेदों के बावजूद BRICS ने New Delhi Declaration 2026 पर सर्वसम्मति बना ली है। भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक सफलता और ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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