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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सड़क हादसे में पीड़ितों और परिजनों का मुआवजा बढ़ाया

Kavita2
26 July 2026 5:54 PM IST
दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सड़क हादसे में पीड़ितों और परिजनों का मुआवजा बढ़ाया
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नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों और मृतकों के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुआवजे की राशि बढ़ाते हुए कहा कि फुटपाथ पर सोना किसी व्यक्ति की गलती नहीं मानी जा सकती और इसे वाहन चालक की लापरवाही में योगदान देने वाला कारण नहीं ठहराया जा सकता।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क किनारे या फुटपाथ पर रहने वाले लोग भी दुर्घटना में पीड़ित होते हैं और उन्हें कानून के तहत उचित मुआवजा पाने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति का फुटपाथ पर सोना उसे सड़क दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नहीं बनाता, खासकर तब जब हादसा वाहन चालक की लापरवाही के कारण हुआ हो।

मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) के फैसले में बदलाव किया और पीड़ित पक्ष को दी जाने वाली मुआवजे की रकम बढ़ा दी। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार वाहन चालक की लापरवाही को ध्यान में रखते हुए पीड़ित परिवार को न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए।

यह मामला एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें एक ट्रक की चपेट में आने से लोगों की मौत हुई थी। दुर्घटना के बाद मृतकों के परिजनों ने मुआवजे के लिए दावा किया था। सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया गया था कि पीड़ित सड़क किनारे फुटपाथ पर सो रहे थे, इसलिए उनकी भी कुछ जिम्मेदारी बनती है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि फुटपाथ पर सोना किसी व्यक्ति की मजबूरी या परिस्थितियों का परिणाम हो सकता है, लेकिन इसे वाहन चालक की लापरवाही को कम करने के आधार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि सड़क पर वाहन चलाने वाले चालकों की जिम्मेदारी होती है कि वे सावधानी बरतें और आसपास की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वाहन चलाएं। यदि चालक तेज गति, लापरवाही या नियमों की अनदेखी करता है और उससे दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में पीड़ितों के अधिकारों पर जोर देते हुए कहा कि मुआवजे का उद्देश्य दुर्घटना से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देना है। किसी दुर्घटना में परिवार के कमाने वाले सदस्य की मौत होने पर आश्रितों को गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में मुआवजे का निर्धारण करते समय पीड़ित की सामाजिक और आर्थिक स्थिति, आय, उम्र और परिवार की निर्भरता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इस फैसले को सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई कोर्ट के इस रुख से उन लोगों को राहत मिलेगी, जो सड़क किनारे रहने या सोने की मजबूरी के कारण हादसों का शिकार होते हैं।

सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में अक्सर वाहन चालक की लापरवाही, तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी प्रमुख कारणों के रूप में सामने आते हैं। अदालत ने अपने फैसले के जरिए यह संदेश दिया है कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की जवाबदेही तय करना जरूरी है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले का असर भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई पर पड़ सकता है, जहां पीड़ितों की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति की गरीबी या रहने की मजबूरी को उसकी गलती नहीं माना जा सकता।

दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले से सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों के परिवारों और घायल पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कानूनी आधार मिल सकता है। अदालत ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि पीड़ितों को उचित और निष्पक्ष राहत मिले।

फिलहाल हाई कोर्ट का यह फैसला सड़क सुरक्षा, वाहन चालकों की जिम्मेदारी और दुर्घटना पीड़ितों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।

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