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NSEL केस में बड़ा फैसला ₹3464 करोड़ की संपत्तियां बेचने की मंजूरी

Ratna Netam
12 Oct 2026 9:10 PM IST
NSEL केस में बड़ा फैसला ₹3464 करोड़ की संपत्तियां बेचने की मंजूरी
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मुंबई। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी कानूनी सफलता मिली है। मुंबई की विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) अदालत ने 3,464 करोड़ रुपये की जब्त संपत्तियों के मुद्रीकरण यानी उन्हें बेचकर धन जुटाने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से उन हजारों निवेशकों को राहत मिलने का रास्ता खुल सकता है, जो वर्ष 2013 में भुगतान में चूक के बाद से अपनी रकम वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं। अदालत का यह आदेश 8 अक्टूबर को जारी किया गया था।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, अदालत की अनुमति से नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा मंजूर वन-टाइम सेटलमेंट योजना के तहत निवेशकों को 1,950 करोड़ रुपये लौटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। इस योजना में कुल 5,682 निर्धारित लेनदारों को भुगतान किया जाना है। हालांकि, अदालत की मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सभी निवेशकों को रकम का भुगतान हो चुका है। भुगतान संबंधित संपत्तियों के मुद्रीकरण और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने पर निर्भर करेगा।
3,464 करोड़ रुपये की संपत्तियों को बेचने की अनुमति
मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत ने एनएसईएल मामले में जब्त की गई 3,464 करोड़ रुपये की संपत्तियों के मुद्रीकरण को मंजूरी दी है।इस आदेश का मुख्य उद्देश्य संपत्तियों से धन जुटाकर निर्धारित सेटलमेंट योजना के अनुसार निवेशकों को भुगतान करने का रास्ता तैयार करना है।प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत के आदेश को निवेशकों की रकम वापस दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।अदालत ने यह आदेश 8 अक्टूबर को पारित किया था।अब जब्त संपत्तियों के मुद्रीकरण से प्राप्त धन का उपयोग निर्धारित शर्तों के अनुसार किया जा सकेगा।हालांकि, संपत्तियों की कुल घोषित कीमत और उनकी बिक्री से वास्तव में प्राप्त होने वाली राशि अलग-अलग हो सकती है।
5,682 निवेशकों को मिलेंगे 1,950 करोड़ रुपये
एनसीएलटी द्वारा मंजूर वन-टाइम सेटलमेंट योजना के तहत कुल 5,682 निर्धारित लेनदारों को 1,950 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है।इस योजना का उद्देश्य लंबे समय से लंबित भुगतान के मामलों का समाधान करना है।प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, अदालत ने जब्त संपत्तियों के मुद्रीकरण से प्राप्त अधिकतम 1,950 करोड़ रुपये की राशि को निर्धारित व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराने की अनुमति दी है।इससे संबंधित निवेशकों को उनकी रकम लौटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।हालांकि, प्रत्येक निवेशक को कितनी राशि मिलेगी और भुगतान किस क्रम में होगा, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।भुगतान की प्रक्रिया एनसीएलटी द्वारा मंजूर योजना की शर्तों के अनुसार पूरी की जाएगी।
63 मून्स टेक्नोलॉजीज को सौंपी जाएगी रकम
विशेष अदालत के आदेश के अनुसार, जब्त संपत्तियों के मुद्रीकरण से प्राप्त होने वाली 1,950 करोड़ रुपये तक की राशि 63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को दी जाएगी।कंपनी यह रकम निर्धारित लेनदारों के अधिकार-प्राप्त प्रतिनिधि यानी असाइनी के रूप में प्राप्त करेगी।इसका अर्थ है कि कंपनी को यह राशि अपने स्वतंत्र व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं, बल्कि स्वीकृत सेटलमेंट व्यवस्था में निर्धारित भूमिका के तहत मिलेगी।प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि भुगतान एनसीएलटी द्वारा मंजूर योजना के अनुसार किया जाएगा।इस व्यवस्था में कंपनी की भूमिका निवेशकों से संबंधित स्वीकृत अधिकारों और सेटलमेंट प्रक्रिया से जुड़ी है।
क्या है वन-टाइम सेटलमेंट योजना?
वन-टाइम सेटलमेंट ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत लंबित वित्तीय दावों का समाधान निर्धारित शर्तों पर करने का प्रयास किया जाता है।एनएसईएल मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने ऐसी योजना को मंजूरी दी है।इस योजना के अंतर्गत 5,682 निर्धारित लेनदारों के लिए कुल 1,950 करोड़ रुपये का भुगतान प्रस्तावित है।विशेष पीएमएलए अदालत का नया आदेश इसी योजना को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हालांकि, योजना के तहत भुगतान शुरू होने से पहले निर्धारित शर्तों का पूरा होना आवश्यक है।इसलिए अदालत की अनुमति के बावजूद धन वितरण की प्रक्रिया तत्काल पूरी होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
सेटलमेंट ट्रिगर इवेंट के बाद होगा भुगतान
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, 63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को राशि उपलब्ध कराने से पहले एनसीएलटी द्वारा मंजूर योजना में निर्धारित 'सेटलमेंट ट्रिगर इवेंट' की प्रक्रिया पूरी होनी आवश्यक है।यह योजना के तहत भुगतान को सक्रिय करने वाली निर्धारित शर्तों से जुड़ा चरण है।अदालत के आदेश में इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद राशि हस्तांतरित करने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।इसका मतलब है कि संपत्तियों के मुद्रीकरण और भुगतान के बीच कुछ आवश्यक प्रक्रियात्मक चरण पूरे किए जाएंगे।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सेटलमेंट ट्रिगर इवेंट की सभी शर्तों का विस्तृत विवरण शामिल नहीं है।इसलिए भुगतान शुरू होने की निश्चित तारीख बताना फिलहाल संभव नहीं है।
2013 से रकम वापसी का इंतजार
एनएसईएल मामला वर्ष 2013 में भुगतान में हुई चूक के बाद सामने आया था।इस घटनाक्रम से जुड़े निवेशक लंबे समय से अपनी रकम वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं।भुगतान में चूक के बाद मामले से संबंधित वित्तीय दावों और कानूनी कार्यवाही का सिलसिला जारी रहा।अब विशेष पीएमएलए अदालत की ओर से जब्त संपत्तियों के मुद्रीकरण को मंजूरी दिए जाने से रकम वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता मिला है।निवेशकों के लिए यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें निर्धारित सेटलमेंट राशि उपलब्ध कराने की कानूनी व्यवस्था स्पष्ट की गई है।हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि संपत्तियों से कितनी राशि प्राप्त होती है और भुगतान की प्रक्रिया कब पूरी होती है।
ED की कार्रवाई में महत्वपूर्ण प्रगति
प्रवर्तन निदेशालय धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत इस मामले से संबंधित कार्यवाही कर रहा है।पीएमएलए के अंतर्गत जब्त संपत्तियों के संबंध में न्यायिक आदेश महत्वपूर्ण होते हैं।इस मामले में विशेष अदालत ने संपत्तियों के मुद्रीकरण की अनुमति देकर निर्धारित लेनदारों को भुगतान करने की प्रक्रिया का रास्ता खोला है।प्रवर्तन निदेशालय ने इस फैसले को निवेशकों के हित में महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में प्रस्तुत किया है।हालांकि, संपत्तियों को बेचने की अनुमति और मामले में आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अलग-अलग कानूनी विषय हैं।अदालत के इस आदेश से संबंधित संपत्तियों के उपयोग और सेटलमेंट प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट हुई है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है फैसला?
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लंबे समय से लंबित वित्तीय दावों के निपटारे के लिए जब्त संपत्तियों से धन जुटाने की अनुमति मिल गई है।एनसीएलटी द्वारा स्वीकृत योजना के तहत 5,682 लेनदारों को कुल 1,950 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है।यदि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक राशि उपलब्ध होती है, तो संबंधित निवेशकों को सेटलमेंट का लाभ मिल सकेगा।हालांकि, 3,464 करोड़ रुपये की संपत्तियों के मुद्रीकरण को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि पूरी राशि निवेशकों में वितरित की जाएगी।मौजूदा आदेश में 1,950 करोड़ रुपये तक की रकम निर्धारित व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है।
अब आगे क्या होगा?
मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत के 8 अक्टूबर के आदेश के बाद अब ध्यान जब्त संपत्तियों के मुद्रीकरण और एनसीएलटी द्वारा मंजूर योजना की शर्तों को पूरा करने पर रहेगा।संपत्तियों से प्राप्त राशि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को दी जाएगी।कंपनी इस रकम को निर्धारित लेनदारों के असाइनी के रूप में प्राप्त करेगी।इसके बाद स्वीकृत सेटलमेंट योजना के अनुसार भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।फिलहाल निवेशकों को राशि मिलने की निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।एनएसईएल मामले में यह आदेश वर्ष 2013 से भुगतान का इंतजार कर रहे हजारों निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति है। अब उनकी नजर संपत्तियों के मुद्रीकरण और 1,950 करोड़ रुपये की सेटलमेंट राशि के वास्तविक वितरण पर रहेगी।
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