दिल्ली-एनसीआर

NCERT का बड़ा फैसला: 9वीं से 12वीं तक के छात्र सीखेंगे AI

Saba Naaz
24 Oct 2026 7:33 AM IST
NCERT का बड़ा फैसला: 9वीं से 12वीं तक के छात्र सीखेंगे AI
x
खास लर्निंग मॉड्यूल
नई दिल्ली : देश की स्कूली शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने महत्वपूर्ण पहल की है। परिषद ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (Computational Thinking) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) पर एक नया प्रारंभिक शिक्षण मॉड्यूल तैयार किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विकसित इस मॉड्यूल का उद्देश्य विद्यार्थियों को एआई तकनीक की बुनियादी जानकारी देने के साथ उन्हें भविष्य की डिजिटल चुनौतियों के लिए तैयार करना है। इस मॉड्यूल की खास बात यह है कि इसे समझने के लिए विद्यार्थियों को पहले से कंप्यूटर प्रोग्रामिंग या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ज्ञान होना जरूरी नहीं है। इसमें सरल गतिविधियों, चर्चा, प्रयोग और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीक की जानकारी दी जाएगी। 23 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, इस मॉड्यूल में तार्किक सोच, रचनात्मकता, समस्या समाधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग को प्राथमिकता दी गई है।
कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार हुआ मॉड्यूल
एनसीईआरटी द्वारा विकसित यह मॉड्यूल माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को यह समझाना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार काम करती है और इसका उपयोग दैनिक जीवन में किन-किन क्षेत्रों में किया जा सकता है। विद्यार्थियों को केवल तकनीक के उपयोग तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसके पीछे काम करने वाली सोच और निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। मॉड्यूल के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीक की संभावनाओं के साथ उसकी सीमाओं को समझने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
क्या है कम्प्यूटेशनल थिंकिंग?
कम्प्यूटेशनल थिंकिंग यानी समस्याओं को व्यवस्थित तरीके से समझने और उनका समाधान निकालने की प्रक्रिया। इस पद्धति में किसी बड़ी समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उसका विश्लेषण किया जाता है। इसके बाद उपलब्ध जानकारी और तार्किक सोच के आधार पर समाधान खोजने का प्रयास किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी विद्यार्थी को अपने स्कूल की लाइब्रेरी में किताबों को व्यवस्थित करने का कार्य दिया जाए, तो वह किताबों को विषय, कक्षा या लेखक के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में रख सकता है। इस प्रकार की गतिविधियों से विद्यार्थियों में तार्किक सोच और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
बिना कंप्यूटर और मोबाइल के भी सीख सकेंगे AI की बुनियादी बातें
नए मॉड्यूल की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके अंतर्गत गतिविधियां डिजिटल उपकरणों के साथ और उनके बिना भी कराई जा सकती हैं। इससे ऐसे स्कूलों के विद्यार्थियों को भी सीखने का अवसर मिलेगा, जहां कंप्यूटर लैब, इंटरनेट या आधुनिक डिजिटल उपकरण सीमित संख्या में उपलब्ध हैं। शिक्षण के दौरान सामूहिक चर्चा, कागज-कलम आधारित अभ्यास, उदाहरणों और प्रयोगों का उपयोग किया जा सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य तकनीकी संसाधनों के अंतर को विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया में बाधा बनने से रोकना है।
बच्चों को सिखाया जाएगा AI कैसे काम करता है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, कृषि, परिवहन और डिजिटल सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में उपयोग की जा रही है। नए मॉड्यूल के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि एआई प्रणाली किस तरह डेटा के आधार पर पैटर्न पहचान सकती है और विभिन्न कार्यों में सहायता कर सकती है। छात्रों को एआई के वास्तविक जीवन से जुड़े उपयोगों को समझने और उसके परिणामों का मूल्यांकन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल एआई उपकरणों का उपयोगकर्ता बनाना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीक को समझने वाला जागरूक विद्यार्थी बनाना है।
गलत जानकारी और AI के खतरों से भी कराया जाएगा परिचित
एनसीईआरटी के नए मॉड्यूल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि एआई से तैयार सामग्री हमेशा पूरी तरह सही या विश्वसनीय नहीं होती। कई बार एआई प्रणालियां गलत तथ्य, भ्रामक जानकारी या पक्षपातपूर्ण परिणाम भी प्रस्तुत कर सकती हैं। इसलिए विद्यार्थियों को एआई द्वारा दिए गए उत्तरों की जांच करना, विश्वसनीय स्रोतों से तथ्यों का मिलान करना और बिना सत्यापन किसी जानकारी पर भरोसा नहीं करना सिखाया जाएगा।
डेटा प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ध्यान
मॉड्यूल में डेटा की गोपनीयता और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। विद्यार्थियों को समझाया जाएगा कि इंटरनेट और एआई उपकरणों का उपयोग करते समय व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी क्यों जरूरी है। इसके अलावा निष्पक्षता, भ्रामक सूचनाओं की पहचान और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों में तकनीक के प्रति जागरूकता विकसित करना है, ताकि वे डिजिटल संसाधनों का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकें।
रटने के बजाय गतिविधियों से सीखने पर जोर
नई शिक्षण पद्धति में विद्यार्थियों को केवल किताबों से पढ़ाने के बजाय व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से विषय समझाने पर जोर दिया गया है। इसमें चर्चा, प्रयोग, समूह गतिविधि और आत्मचिंतन जैसी प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है। इस तरह की गतिविधियों से विद्यार्थियों को अपनी समझ विकसित करने, नए सवाल पूछने और समस्याओं का समाधान खोजने का अवसर मिलेगा। मॉड्यूल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक आधारित पढ़ाई में मानवीय विवेक, रचनात्मकता और नैतिक जिम्मेदारी का महत्व बना रहे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप नई पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों के समग्र विकास, तकनीकी जागरूकता और भविष्य के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसी दिशा में शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को स्कूली शिक्षा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पहले कक्षा 3 से 8 तक के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और एआई का पाठ्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू किया गया है। वहीं कक्षा 9 से 12 तक के लिए पाठ्यक्रम और मॉड्यूल विकसित करने की दिशा में भी काम हुआ है।
भविष्य की पढ़ाई और करियर में मिल सकती है मदद
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में स्कूली स्तर से इसकी बुनियादी जानकारी प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकता है। तकनीक की समझ विकसित होने से विद्यार्थियों को आगे कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, रोबोटिक्स और अन्य तकनीकी विषयों को समझने में सहायता मिल सकती है। हालांकि इस प्रारंभिक मॉड्यूल का उद्देश्य विद्यार्थियों को सीधे एआई विशेषज्ञ बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें बुनियादी अवधारणाओं और जिम्मेदार उपयोग से परिचित कराना है।
डिजिटल शिक्षा को मिलेगी नई दिशा
एनसीईआरटी की यह पहल स्कूली विद्यार्थियों को नई तकनीकों के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेष रूप से ऐसे विद्यार्थियों के लिए यह उपयोगी हो सकती है, जिन्हें सीमित संसाधनों के कारण आधुनिक तकनीक सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। गतिविधि आधारित शिक्षण और नैतिक जिम्मेदारी पर जोर देकर यह मॉड्यूल विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया की संभावनाओं और चुनौतियों को समझने में मदद करेगा। एनसीईआरटी का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को तैयार करना है, जो एआई का इस्तेमाल करने के साथ उसकी सटीकता, विश्वसनीयता और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को भी समझ सकें।
Next Story