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पेपर लीक माफिया पर बड़ी चोट! कानून में 7 अहम संशोधन, ₹50 लाख जुर्माना और 10 साल जेल

nidhi
26 July 2026 6:37 AM IST
पेपर लीक माफिया पर बड़ी चोट! कानून में 7 अहम संशोधन, ₹50 लाख जुर्माना और 10 साल जेल
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नए संशोधनों में 10 साल कैद और ₹50 लाख जुर्माने का प्रस्ताव

New Delhi : देश में लगातार सामने आ रहे परीक्षा पेपर लीक मामलों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार कानून को और अधिक सख्त बनाने की तैयारी में है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, प्रश्नपत्र चोरी, उत्तर बेचने, तकनीकी छेड़छाड़ और संगठित परीक्षा माफिया के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। नए प्रस्ताव में दोषियों को अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद और ₹50 लाख तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान शामिल है।

सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून के बावजूद परीक्षा माफिया नई तकनीकों और संगठित नेटवर्क के जरिए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे में कानून को और प्रभावी बनाकर दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की जरूरत है।
क्यों जरूरी पड़े बदलाव?
हाल के वर्षों में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित किया है। कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जिससे छात्रों का समय, मेहनत और आर्थिक संसाधन प्रभावित हुए। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए सरकार ने कानून में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है।
प्रस्तावित 7 बड़े बदलाव
1. सजा की अवधि बढ़ेगी
पेपर लीक या परीक्षा से जुड़े संगठित अपराध में शामिल लोगों को अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। गंभीर मामलों में न्यूनतम सजा भी पहले से अधिक कड़ी हो सकती है।
2. ₹50 लाख तक जुर्माना
दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों, एजेंसियों या संगठनों पर ₹50 लाख तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। बड़े संगठित गिरोहों पर इससे भी कड़ी वित्तीय कार्रवाई की जा सकती है।
3. परीक्षा माफिया पर विशेष कार्रवाई
पेपर लीक कराने वाले गिरोह, बिचौलिए, सॉल्वर गैंग और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क को संगठित अपराध की श्रेणी में लाकर कठोर कार्रवाई का प्रस्ताव है।
4. डिजिटल अपराध भी दायरे में
यदि प्रश्नपत्र मोबाइल, सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप, ईमेल या अन्य डिजिटल माध्यमों से लीक किया जाता है, तो उसे भी समान रूप से गंभीर अपराध माना जाएगा।
5. संपत्ति जब्त करने का प्रावधान
पेपर लीक से अर्जित अवैध संपत्ति और आर्थिक लाभ को जब्त करने का अधिकार जांच एजेंसियों को दिए जाने का प्रस्ताव है।
6. संस्थानों की जवाबदेही तय होगी
यदि किसी परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था, एजेंसी या उसके कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
7. तेज जांच और त्वरित सुनवाई
पेपर लीक जैसे मामलों की समयबद्ध जांच और विशेष अदालतों में शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए भी कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रस्ताव रखा गया है।
छात्रों का भरोसा लौटाने की कोशिश
सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाना भी है। सख्त कानून से परीक्षा माफिया पर अंकुश लगेगा और मेहनत करने वाले छात्रों का विश्वास मजबूत होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कड़े कानून पर्याप्त नहीं होंगे। सुरक्षित डिजिटल परीक्षा प्रणाली, प्रश्नपत्रों की निगरानी, एन्क्रिप्टेड ट्रांसमिशन, मजबूत साइबर सुरक्षा और परीक्षा केंद्रों की बेहतर निगरानी जैसे कदम भी समान रूप से आवश्यक हैं।
यदि प्रस्तावित संशोधन लागू होते हैं, तो यह देश में सार्वजनिक परीक्षाओं की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
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