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SC-ST छात्रों की स्कॉलरशिप में हो सकता है बड़ा बदलाव, बढ़ सकती है अभिभावकों की आय सीमा

नई दिल्ली। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के विद्यार्थियों के लिए केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही मैट्रिक के बाद की छात्रवृत्ति योजना की पात्रता से जुड़े नियमों में बदलाव हो सकता है। लंबे समय से छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा में संशोधन नहीं होने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने इस सीमा को बढ़ाने के संकेत दिए हैं। अगर आय सीमा में बढ़ोतरी होती है तो मौजूदा पात्रता के दायरे से बाहर रहने वाले कई विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति हासिल करने का रास्ता खुल सकता है।
मैट्रिक के बाद उच्च शिक्षा हासिल करने वाले SC और ST वर्ग के विद्यार्थियों की आर्थिक सहायता के लिए यह छात्रवृत्ति योजना चलाई जाती है। योजना का उद्देश्य आर्थिक कारणों से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न होने देना है। इसके तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
इस छात्रवृत्ति को हासिल करने के लिए विद्यार्थियों के परिवार की वार्षिक आय एक महत्वपूर्ण पात्रता शर्त होती है। लंबे समय से निर्धारित आय सीमा में कोई बदलाव नहीं होने के कारण इसे लेकर सामाजिक संगठनों और संबंधित वर्गों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले एक दशक से अधिक समय में महंगाई, परिवारों की आमदनी और शिक्षा पर होने वाले खर्च में काफी बदलाव आया है, लेकिन छात्रवृत्ति के लिए तय आय सीमा उसी अनुपात में नहीं बदली।
सामाजिक संगठनों का तर्क है कि लंबे समय तक आय सीमा में संशोधन नहीं किए जाने से कई ऐसे विद्यार्थी भी योजना के दायरे से बाहर हो जाते हैं, जिनके परिवार की आय निर्धारित सीमा से थोड़ी अधिक है, लेकिन उच्च शिक्षा का खर्च उठाना उनके लिए आसान नहीं है। इसी वजह से आय सीमा को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बढ़ाने की मांग की जा रही है।
कुछ सामाजिक संगठनों ने इस नीति को पक्षपातपूर्ण बताते हुए सरकार से इसमें बदलाव करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि छात्रवृत्ति का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ना है। ऐसे में पात्रता की आय सीमा भी समय-समय पर महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संशोधित की जानी चाहिए।
अब सरकार की तरफ से आय सीमा बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद SC-ST वर्ग के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के बीच उम्मीद बढ़ी है। हालांकि अभी आय सीमा में कितनी बढ़ोतरी होगी और संशोधित नियम कब से लागू किए जाएंगे, इसे लेकर अंतिम फैसला सामने आना बाकी है।
यदि आय सीमा बढ़ाई जाती है तो इसका सीधा असर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों की संख्या पर पड़ सकता है। वर्तमान आय सीमा के कारण पात्रता से बाहर रहने वाले परिवारों के बच्चे भी नई सीमा लागू होने के बाद योजना में शामिल हो सकते हैं। इससे उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का दायरा बढ़ने की संभावना है।
मैट्रिक के बाद विद्यार्थियों के सामने कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के दौरान कई तरह के खर्च आते हैं। इनमें फीस के साथ पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यकताएं भी शामिल होती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इन खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी कारण पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
आय सीमा में बदलाव की मांग करने वाले संगठनों का कहना है कि केवल परिवार की आय में मामूली बढ़ोतरी को आर्थिक स्थिति में बड़े सुधार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। महंगाई बढ़ने के साथ परिवारों के रोजमर्रा के खर्च भी बढ़े हैं। शिक्षा पर होने वाला खर्च भी पहले की तुलना में अधिक हुआ है। ऐसे में एक दशक से अधिक पुरानी आय सीमा के आधार पर वर्तमान समय में पात्रता तय करना कई विद्यार्थियों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
सरकार की ओर से आय सीमा बढ़ाने के संकेत ऐसे समय में आए हैं जब छात्रवृत्ति योजनाओं की पात्रता और उनके लाभार्थियों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो संबंधित नियमों में संशोधन करना होगा। इसके बाद नई आय सीमा के आधार पर विद्यार्थियों की पात्रता तय की जा सकेगी।
हालांकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को अभी सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार करना होगा। केवल संकेत मिलने से पात्रता की मौजूदा शर्तों में तत्काल बदलाव नहीं माना जा सकता। संशोधित सीमा की आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन परिवारों के विद्यार्थियों को इसका अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
आय सीमा में संभावित बढ़ोतरी का असर देशभर में इस योजना के तहत आवेदन करने वाले SC और ST विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। इससे उन परिवारों को विशेष राहत मिल सकती है जिनकी सालाना आय मौजूदा सीमा से थोड़ी अधिक होने के कारण उनके बच्चे छात्रवृत्ति के लिए पात्र नहीं हो पाते हैं।
सामाजिक संगठनों की मांग है कि छात्रवृत्ति योजनाओं के आर्थिक मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि ऐसा करने से पात्रता के नियम मौजूदा सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बने रहेंगे। इसके साथ ही जरूरतमंद विद्यार्थियों को केवल पुरानी आय सीमा के कारण योजना के लाभ से वंचित नहीं होना पड़ेगा।
SC-ST विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक के बाद की छात्रवृत्ति उच्च शिक्षा जारी रखने में आर्थिक सहयोग देने वाली महत्वपूर्ण योजना है। खासकर ऐसे परिवारों के विद्यार्थियों के लिए इसकी अहमियत अधिक है जिनके लिए कॉलेज और उच्च शिक्षा से जुड़े खर्च उठाना मुश्किल होता है।
अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है। आय सीमा बढ़ाने को लेकर संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन नई सीमा कितनी होगी, इसका लाभ कितने अतिरिक्त विद्यार्थियों को मिलेगा और संशोधित व्यवस्था कब से लागू होगी, यह आधिकारिक निर्णय के बाद ही साफ हो पाएगा।
फिलहाल संभावित बदलाव ने SC-ST विद्यार्थियों के बीच नई उम्मीद पैदा की है। अगर सरकार अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा बढ़ाती है तो छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ सकता है और अधिक विद्यार्थियों को मैट्रिक के बाद अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता मिल सकेगी।





