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जनगणना 2027 में बड़ा बदलाव, अब पूछे जाएंगे 40 सवाल

Kavita2
31 Oct 2026 9:47 AM IST
जनगणना 2027 में बड़ा बदलाव, अब पूछे जाएंगे 40 सवाल
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नई दिल्ली। देश में होने वाली जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार जनगणना के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक लंबी और विस्तृत होगी। सामान्य कार्यक्रम के तहत यह प्रक्रिया 10 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगी। इसमें 15 दिनों की स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) की सुविधा भी शामिल है। इस बार लोगों से जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और अन्य सामाजिक-आर्थिक जानकारियों से संबंधित कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। वर्ष 2011 की जनगणना में 29 सवाल शामिल थे। इस प्रकार नई जनगणना में सवालों की कुल संख्या 11 बढ़ गई है। सरकार का उद्देश्य देश की जनसंख्या के साथ बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का विस्तृत आंकड़ा जुटाना है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इसके बाद 25 जनवरी से 28 फरवरी तक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना की जाएगी। इसके अतिरिक्त 1 मार्च से 5 मार्च तक संशोधन और पुनरीक्षण का दौर चलेगा।

हालांकि, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के गैर-बर्फीले क्षेत्रों में जनसंख्या गणना का कार्यक्रम अलग निर्धारित किया गया है। इन राज्यों में स्व-गणना 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक और घर-घर जनसंख्या गणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक होगी। कुछ हिमालयी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए भी अलग कार्यक्रम निर्धारित है।

पहले 29 सवाल, अब 40 सवालों के जवाब देने होंगे

जनगणना 2027 के दूसरे चरण में लोगों से कुल 40 प्रश्न पूछे जाएंगे। इन सवालों के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत, सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी।

प्रश्नावली में व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि, उम्र और वैवाहिक स्थिति जैसी सामान्य जानकारियां शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त धर्म, जाति, मातृभाषा, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और अन्य विवरणों से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।

वर्ष 2011 में जनसंख्या गणना के दौरान कुल 29 सवाल पूछे गए थे। इस बार प्रश्नों की संख्या बढ़ने से जनगणना कर्मियों को प्रत्येक परिवार से अधिक जानकारी जुटानी होगी।

नई प्रश्नावली में बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश से संबंधित जानकारियों को भी महत्व दिया गया है।

जनगणना में जाति से संबंधित सवाल भी शामिल

जनगणना 2027 का एक महत्वपूर्ण पहलू जाति संबंधी जानकारी एकत्र करना है। केंद्र सरकार ने इस बार जनगणना में जातियों की गणना करने का निर्णय लिया है।

जनगणना की 40 प्रश्नों वाली सूची में जाति संबंधी प्रश्न भी शामिल किया गया है। इससे देश में विभिन्न जातीय समुदायों की जनसंख्या के संबंध में अधिक विस्तृत आंकड़े प्राप्त हो सकेंगे।

सरकार के अनुसार, जाति संबंधी आंकड़ों का संकलन जनसंख्या की सामाजिक संरचना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हालांकि, इन आंकड़ों का भविष्य में किस प्रकार उपयोग किया जाएगा, यह संबंधित सरकारी नीतियों और निर्णयों पर निर्भर करेगा।

पहली बार डिजिटल व्यवस्था पर विशेष जोर

जनगणना 2027 में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। लोगों को स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके माध्यम से वे निर्धारित अवधि में अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।

स्व-गणना का उद्देश्य नागरिकों को सुविधा देना और आंकड़ों के संग्रह की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

जो लोग ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज नहीं कर पाएंगे, उनके लिए जनगणना कर्मी घर-घर जाकर आवश्यक विवरण एकत्र करेंगे।

इस व्यवस्था से डिजिटल सुविधाओं का उपयोग करने वाले लोगों के साथ ऐसे परिवार भी जनगणना में शामिल हो सकेंगे, जिनके पास इंटरनेट या स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं हैं।

स्व-गणना के लिए मिलेंगे 15 दिन

नई व्यवस्था के अंतर्गत नागरिकों को स्व-गणना के लिए 15 दिनों का समय मिलेगा। इस अवधि में वे निर्धारित पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

स्व-गणना के दौरान नागरिकों को पूछे गए प्रश्नों के सही और पूर्ण उत्तर देने होंगे। ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक सत्यापन व्यवस्था लागू होगी।

सरकार की ओर से जनगणना कर्मियों को घर-घर जाकर आंकड़ों का संकलन करने की जिम्मेदारी भी दी गई है, ताकि कोई व्यक्ति या परिवार गणना से छूट न जाए।

स्व-गणना सुविधा उन परिवारों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिनके सदस्य नौकरी या अन्य कारणों से दिन में घर पर उपलब्ध नहीं रहते।

शिक्षा और रोजगार से संबंधित जानकारी भी जुटाई जाएगी

जनगणना 2027 में शिक्षा और रोजगार की स्थिति से संबंधित सवालों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

व्यक्ति की शैक्षणिक योग्यता, रोजगार की स्थिति और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारियां देश की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को समझने में मदद कर सकती हैं।

इसके अलावा प्रवास संबंधी सवालों के माध्यम से यह पता लगाने में सहायता मिलेगी कि लोग किन कारणों से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं।

इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं की तैयारी में किया जा सकता है।

दो चरणों में पूरी होगी जनगणना

जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है।

पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास गणना का कार्य शामिल है। इस दौरान मकानों, आवासीय सुविधाओं और परिवारों की बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है।

दूसरे चरण में जनसंख्या गणना होगी। इसमें प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित निर्धारित विवरण दर्ज किए जाएंगे।

सरकार ने पहले चरण का कार्यक्रम अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच राज्यों की सुविधा के अनुसार निर्धारित किया था। अब दूसरे चरण का कार्यक्रम भी अधिसूचित किया गया है।

जनगणना के आंकड़े क्यों हैं महत्वपूर्ण?

जनगणना देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और आर्थिक परिस्थितियों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

इससे प्राप्त आंकड़ों का उपयोग सरकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण, आधारभूत ढांचे के विकास और विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं के आकलन में किया जाता है।

स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों, पेयजल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की योजना तैयार करने में भी जनसंख्या संबंधी आंकड़े उपयोगी होते हैं।

इस बार विस्तृत प्रश्नावली के माध्यम से सरकार को नए सामाजिक और आर्थिक आंकड़े उपलब्ध होने की उम्मीद है।

जनगणना में नागरिकों द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी को जनगणना अधिनियम के तहत गोपनीयता संबंधी संरक्षण प्राप्त है।

फिलहाल जनगणना 2027 के दूसरे चरण की तैयारियां जारी हैं। नागरिकों को निर्धारित समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराने और जनगणना कर्मियों का सहयोग करने की आवश्यकता होगी।

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