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बैंकिंग कानून में बड़ा बदलाव राज्यसभा ने बैंकर्स बुक्स विधेयक को दी मंजूरी

Ratna Netam
10 Aug 2026 6:47 PM IST
बैंकिंग कानून में बड़ा बदलाव राज्यसभा ने बैंकर्स बुक्स विधेयक को दी मंजूरी
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नई दिल्ली : संसद के उच्च सदन राज्यसभा में बैंकिंग व्यवस्था और कर कानूनों से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों पर सोमवार को चर्चा हुई। चर्चा के बाद राज्यसभा ने 135 वर्ष पुराने ब्रिटिशकालीन कानून की जगह लेने वाले ‘द बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। वहीं ‘कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा के बाद इसे लोकसभा को वापस भेज दिया गया। इन दोनों विधेयकों को बैंकिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने, डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देने और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
‘द बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ के पारित होने के बाद बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानूनी प्रावधानों में बड़ा बदलाव होगा। यह विधेयक बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 की जगह लेगा। नए कानून में बैंकिंग रिकॉर्ड की परिभाषा को मौजूदा डिजिटल दौर के अनुरूप व्यापक बनाया गया है। अब इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड आधारित बैंकिंग रिकॉर्ड को भी अदालतों में साक्ष्य के तौर पर मान्यता देने का प्रावधान किया गया है।
इस बदलाव का सीधा असर बैंकिंग धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से जुड़े मामलों की न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अब बैंक अधिकारियों को पुराने कागजी रजिस्टर या मूल दस्तावेज लेकर अदालतों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। प्रमाणित डिजिटल प्रिंटआउट या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को भी कानूनी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे बैंकिंग संस्थानों के लिए रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आसान और तेज होने की उम्मीद है।
नए विधेयक में बैंकर्स बुक्स की परिभाषा को विशेष रूप से विस्तार दिया गया है। पुराने कानून में बैंक रिकॉर्ड मुख्य रूप से लिखित दस्तावेजों या माइक्रोफिल्म, मैग्नेटिक टेप और अन्य मैकेनिकल या इलेक्ट्रॉनिक डेटा-रिट्रीवल माध्यमों से जुड़े थे। 2026 के विधेयक में ऐसे रिकॉर्ड भी शामिल किए गए हैं जो इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रूप में ऑनसाइट, ऑफसाइट, वर्चुअल या क्लाउड लोकेशन पर सुरक्षित रखे गए हों। इससे बैंकिंग व्यवस्था में इस्तेमाल हो रहे आधुनिक डिजिटल डेटा को कानूनी ढांचे के भीतर लाने का रास्ता साफ होगा।
राज्यसभा में इसके बाद ‘कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा हुई। धन विधेयक होने के कारण इसे राज्यसभा में विचार और चर्चा के बाद लोकसभा को वापस भेज दिया गया। इस विधेयक का उद्देश्य टैक्स व्यवस्था को आधुनिक बनाना और कुछ क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना बताया गया है।
विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेंटर निर्माण क्षेत्र में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए वर्ष 2040-41 तक विशेष कर प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 तथा आयकर कानून में संशोधन का भी प्रावधान है। इससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े मर्चेंट चार्ज और मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर नीतिगत सुधारों का रास्ता खुल सकता है।
विधेयक में विदेशी फंड मैनेजरों के लिए भी कुछ राहत का प्रावधान किया गया है। विदेशों में काम कर रहे भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फंड मैनेजरों को अपना आधार भारत में स्थानांतरित करने के लिए टैक्स छूट और अनुपालन प्रक्रियाओं में राहत देने की व्यवस्था की गई है। सरकार का उद्देश्य इसके जरिए भारत को निवेश और वित्तीय गतिविधियों के लिए अधिक आकर्षक केंद्र बनाना बताया गया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयकों पर चर्चा के दौरान विपक्ष के रवैये पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ये महत्वपूर्ण और सुधारों से जुड़े विधेयक हैं, जिन पर विपक्ष को चर्चा में भाग लेना चाहिए। वित्त मंत्री के अनुसार, ऐसे सुधार देश को तेज गति से आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने विपक्ष द्वारा चर्चा में भाग लेने के बजाय सदन से वॉकआउट करने को लेकर भी नाराजगी जताई।
कुल मिलाकर, दोनों विधेयक बैंकिंग और कर व्यवस्था में तकनीकी बदलावों को कानूनी ढांचे के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। बैंकिंग रिकॉर्ड को डिजिटल और क्लाउड आधारित स्वरूप में मान्यता मिलने से न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं टैक्स संशोधन से निवेश, डिजिटल भुगतान और वित्तीय क्षेत्र में नई नीतियों के लिए रास्ता तैयार होने की उम्मीद है।
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