दिल्ली-एनसीआर

जनगणना के नियमों में केंद्र सरकार का बड़ा बदलाव

Ratna Netam
16 Oct 2026 5:46 PM IST
जनगणना के नियमों में केंद्र सरकार का बड़ा बदलाव
x
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में जनगणना की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और व्यापक बनाने के उद्देश्य से जनगणना नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को 'जनगणना नियम, 1990' में बदलाव करते हुए जनगणना कर्मियों यानी प्रगणकों (Enumerators) के रूप में नियुक्त किए जाने वाले लोगों की पात्रता का दायरा बढ़ा दिया है। नए प्रावधानों के तहत अब सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, क्लर्क और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े अन्य पात्र व्यक्तियों को भी जनगणना कार्य में लगाया जा सकेगा।गृह मंत्रालय ने जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 18 की उपधारा (1) के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 'जनगणना (संशोधन) नियम, 2026' को अधिसूचित किया है। यह संशोधन सरकारी राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रभावी हो गया है।
निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी मिलेगी जिम्मेदारी
नए नियमों के अनुसार, सरकारी शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ स्थानीय प्राधिकरणों, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी जनगणना कर्मी बनाया जा सकता है।इसके अलावा सोसायटियों और ट्रस्टों द्वारा संचालित स्कूलों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत शिक्षक भी इस श्रेणी में शामिल होंगे।इस संशोधन से जनगणना कार्य के लिए उपलब्ध कर्मचारियों का दायरा बढ़ जाएगा। सरकार को अलग-अलग क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार अधिक संख्या में प्रगणकों की नियुक्ति करने का विकल्प मिलेगा।
सरकारी अधिकारी और क्लर्क भी होंगे पात्र
अधिसूचना में शिक्षकों के अलावा केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के अधिकारियों तथा क्लर्कों को भी जनगणना कार्य के लिए पात्र बताया गया है।इसके अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, वैधानिक निकायों, बैंकों, कंपनियों, संस्थानों, सोसायटियों और ट्रस्टों से जुड़े कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है।सरकार के इस निर्णय से जनगणना के लिए मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में कर्मचारियों की तैनाती आसान हो सकती है, जहां बड़ी आबादी के कारण अधिक जनगणना कर्मियों की आवश्यकता होती है।
राज्य सरकारों को भी मिला चयन का अधिकार
संशोधित नियमों में राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को भी महत्वपूर्ण अधिकार दिया गया है।नए प्रावधान के अनुसार, राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन किसी ऐसे व्यक्ति को भी प्रगणक नियुक्त करने के लिए उपयुक्त मान सकता है, जो जनगणना का कार्य करने में सक्षम हो।इससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कर्मचारियों के चयन में प्रशासन को अधिक विकल्प मिलेंगे। हालांकि, किसी व्यक्ति का पात्र श्रेणी में शामिल होना अपने आप उसकी नियुक्ति नहीं माना जाएगा। नियुक्ति संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।
जनगणना नियम, 1990 में किया गया संशोधन
केंद्र सरकार ने जनगणना नियम, 1990 के नियम 3 की तालिका में क्रम संख्या 5 के अंतर्गत निर्धारित पात्रता संबंधी प्रावधानों को बदला है।नई अधिसूचना संख्या जीएसआर 896(ई) भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से जारी की गई है।इसके माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि किन श्रेणियों के व्यक्तियों को जनगणना संबंधी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
निजी शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े विवाद के बीच फैसला
जनगणना नियमों में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाए जाने का मामला न्यायिक चुनौती का विषय बना हुआ है।नए संशोधन में निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों की पात्रता को स्पष्ट रूप से शामिल कर दिया गया है। इससे संबंधित प्रशासनिक प्रावधानों की व्याख्या में अधिक स्पष्टता आने की संभावना है।
जनगणना 2027 की तैयारियों को मिलेगी मजबूती
भारत में जनगणना एक व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से जनसंख्या, परिवारों और आवास से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है।जनगणना 2027 के लिए विभिन्न चरणों में तैयारियां की जा रही हैं। इतनी बड़ी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।नियमों में संशोधन से केंद्र और राज्य सरकारों को जनगणना कार्य के लिए अधिक व्यापक कर्मचारी समूह उपलब्ध हो सकेगा।सरकार के इस फैसले से जनगणना के संचालन में प्रशासनिक सुविधा बढ़ने और कार्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
Next Story