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28,000 करोड़ के साइबर धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई, मुंबई एयरपोर्ट से वकील गिरफ्तार

Kavita2
25 Oct 2026 3:30 PM IST
28,000 करोड़ के साइबर धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई, मुंबई एयरपोर्ट से वकील गिरफ्तार
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मुंबई/नई दिल्ली। देशभर में कथित साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल गिरफ्तारी के जरिए लोगों से ठगी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने करीब 28,000 करोड़ रुपये के लेनदेन से जुड़े कथित अखिल भारतीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में शनिवार को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से एक वकील को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार वकील की पहचान राशेष उपाध्याय उर्फ राशेष शाह के रूप में हुई है।

ईडी की पणजी इकाई ने वकील को उस समय हिरासत में लिया, जब वह मुंबई से दिल्ली जाने वाली उड़ान में सवार होने की तैयारी कर रहे थे। अधिकारियों ने उन्हें बोर्डिंग गेट पर रोककर कार्रवाई की। इस गिरफ्तारी के साथ मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या सात हो गई है। जांच एजेंसी अब कथित साइबर ठगी नेटवर्क, उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन और धन शोधन की गतिविधियों की कड़ियों को खंगाल रही है।

बोर्डिंग गेट पर रोके गए वकील

मामले में कार्रवाई के दौरान ईडी की पणजी इकाई ने मुंबई हवाई अड्डे पर वकील राशेष उपाध्याय उर्फ राशेष शाह को रोका। वह दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले थे। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा शुल्क विभाग और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के कर्मियों ने ईडी को उनकी तलाश करने में मदद की।

हवाई अड्डे पर हुई इस कार्रवाई को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एजेंसी कथित तौर पर बड़े पैमाने पर संचालित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। हालांकि, गिरफ्तार वकील की कथित भूमिका, उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और नेटवर्क में उनकी जिम्मेदारी को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आना बाकी है।

28,000 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच

ईडी की यह कार्रवाई कथित तौर पर देशभर में फैले साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। मामले में लगभग 28,000 करोड़ रुपये के लेनदेन की बात सामने आई है। इतनी बड़ी राशि से जुड़े लेनदेन ने जांच एजेंसियों का ध्यान इस नेटवर्क की वित्तीय संरचना, धन के स्रोत और कथित अवैध गतिविधियों से अर्जित रकम के इस्तेमाल की ओर केंद्रित किया है।

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में आम तौर पर यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि अपराध से अर्जित धन किन खातों, कंपनियों, व्यक्तियों या अन्य माध्यमों से होकर गुजरा। इसके साथ ही यह भी जांचा जाता है कि कथित तौर पर अवैध रूप से प्राप्त रकम को वैध दिखाने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि, 28,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को मामले से जुड़े लेनदेन के रूप में बताया गया है। इसे सीधे तौर पर किसी एक व्यक्ति की कमाई या साबित हो चुकी ठगी की राशि मानना उचित नहीं होगा। जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक वित्तीय तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर कैसे होती है ठगी?

डिजिटल गिरफ्तारी साइबर अपराध का एक ऐसा तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी या अन्य सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। पीड़ितों को फोन कॉल, वीडियो कॉल या इंटरनेट के अन्य माध्यमों से संपर्क कर यह दावा किया जाता है कि वे किसी आपराधिक मामले में फंस गए हैं या उनके नाम से कोई गैरकानूनी गतिविधि हुई है।

इसके बाद कथित आरोपी पीड़ितों पर लगातार निगरानी रखने, किसी से संपर्क नहीं करने और जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। कई मामलों में सरकारी पहचान या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके लोगों के मन में भय पैदा किया जाता है।

ऐसे अपराधों में ठग अक्सर पीड़ितों की घबराहट और कानूनी कार्रवाई के डर का फायदा उठाते हैं। लोगों को यह समझना जरूरी है कि केवल वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति का खुद को पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी का प्रतिनिधि बताना उसकी वास्तविक पहचान का प्रमाण नहीं है।

सात आरोपियों की गिरफ्तारी, जांच जारी

राशेष उपाध्याय उर्फ राशेष शाह की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या सात हो गई है। ईडी की जांच का उद्देश्य कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों और वित्तीय गतिविधियों के बीच संबंधों का पता लगाना है।

अब जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि गिरफ्तार लोगों की कथित भूमिकाएं क्या थीं, उनके बीच वित्तीय लेनदेन किस प्रकार हुआ और क्या इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों या व्यक्तियों से भी जुड़े हैं। इन सवालों के जवाब जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों पर निर्भर करेंगे।

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में उसके दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं होती। मामले में आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

साइबर अपराध के खिलाफ सख्ती जरूरी

28,000 करोड़ रुपये के लेनदेन से जुड़े इस कथित नेटवर्क की जांच देश में बढ़ते साइबर अपराधों और डिजिटल माध्यम से होने वाली ठगी की गंभीरता को रेखांकित करती है। डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर लोगों को डराकर पैसे ऐंठने की घटनाएं आम नागरिकों के लिए बड़ी चिंता बन गई हैं।

विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि यदि कोई अनजान व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर गिरफ्तारी की धमकी दे या जांच के नाम पर तत्काल धनराशि जमा करने को कहे, तो बिना सत्यापन के कोई भुगतान नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में संबंधित विभाग से उसके आधिकारिक संपर्क माध्यमों के जरिए पुष्टि करनी चाहिए और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

फिलहाल, मुंबई हवाई अड्डे से वकील की गिरफ्तारी ने कथित साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल गिरफ्तारी नेटवर्क की जांच को एक नया मोड़ दिया है। मामले में सात गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि 28,000 करोड़ रुपये के लेनदेन से जुड़ी वित्तीय कड़ियों और आरोपियों की कथित भूमिकाओं का खुलासा जांच आगे बढ़ने के साथ होने की उम्मीद है।

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