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फ्लाइट टर्बुलेंस के बाद बड़ा एक्शन पायलट की दोबारा होगी मेडिकल जांच

Ratna Netam
9 Aug 2026 6:22 PM IST
फ्लाइट टर्बुलेंस के बाद बड़ा एक्शन पायलट की दोबारा होगी मेडिकल जांच
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दिल्ली : फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में 4 अगस्त को लैंडिंग से पहले हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना की जांच अब एविएशन एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) करेगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रविवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि मामले को गंभीर श्रेणी की घटना के तौर पर लिया गया है। इससे पहले घटना की प्राथमिक जांच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से की जा रही थी। जांच का दायरा बढ़ाए जाने के बाद अब घटना से जुड़े तकनीकी, परिचालन और सुरक्षा पहलुओं की विस्तृत जांच की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 फुकेट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। विमान में कुल 137 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे। यात्रियों में तीन नवजात शिशु भी शामिल थे। विमान अपनी यात्रा के दौरान क्रूज स्टेज में था, तभी अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। इस दौरान विमान में जोरदार झटके महसूस किए गए और बताया गया कि विमान कुछ समय के लिए लगभग 300 फीट नीचे की ओर चला गया।
अचानक आए टर्बुलेंस के कारण विमान में सवार यात्रियों और क्रू मेंबर्स के बीच अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई। कई यात्रियों और केबिन क्रू को चोटें आईं। हालांकि पायलटों ने स्थिति को संभालते हुए विमान को दोबारा स्थिर किया और बाद में इसे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतार लिया गया। घटना के बाद घायल यात्रियों और क्रू मेंबर्स को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने भी घटना को गंभीरता से लिया है। उनके अनुसार टर्बुलेंस के दौरान दो क्रू मेंबर्स को रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए विमानन सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे मामले की जांच शुरू की।
इस मामले में पायलटों की स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़े पहलू की भी जांच की जा रही है। मानक संचालन प्रक्रिया के तहत घटना के बाद विमान के दोनों पायलटों का साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग टेस्ट यानी ड्रग टेस्ट कराया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार को-पायलट की जांच सामान्य रही, जबकि पायलट इन कमांड यानी मुख्य पायलट की शुरुआती स्क्रीनिंग रिपोर्ट में परिणाम 'नॉन-नेगेटिव' आया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 'नॉन-नेगेटिव' को सीधे तौर पर ड्रग टेस्ट का पॉजिटिव परिणाम नहीं माना जा सकता। शुरुआती स्क्रीनिंग में ऐसा परिणाम आने पर नमूने को आगे की पुष्टि के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेजा जाता है। अब मुख्य पायलट के सैंपल की विस्तृत जांच की जा रही है। अंतिम पुष्टि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शुरुआती स्क्रीनिंग में आया परिणाम किस वजह से था।
बताया गया है कि विस्तृत लैब रिपोर्ट आने में कुछ समय लग सकता है। इसी वजह से फिलहाल दोनों पायलटों को फ्लाइंग ड्यूटी से हटा दिया गया है। जांच पूरी होने और संबंधित रिपोर्ट सामने आने तक दोनों पायलट रोस्टर पर उपलब्ध नहीं होंगे। विमानन सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य जांच के दौरान किसी भी तरह के जोखिम को रोकना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।
अब पूरे मामले की जांच AAIB के हवाले किए जाने के बाद टर्बुलेंस की परिस्थितियों, विमान के संचालन, मौसम संबंधी परिस्थितियों, पायलटों की कार्रवाई, विमान के तकनीकी पहलुओं और घटना के दौरान अपनाई गई सुरक्षा प्रक्रियाओं की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि विमान के क्रू ने अचानक आए टर्बुलेंस के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का किस तरह पालन किया।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA ने स्पष्ट किया है कि विमानन सुरक्षा के मामले में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। जांच से सामने आने वाले तथ्यों और पायलटों की लैब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर विमान में टर्बुलेंस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है। विशेषज्ञों के अनुसार टर्बुलेंस विमानन क्षेत्र में सामान्य मौसम संबंधी चुनौती हो सकती है, लेकिन यदि यह अचानक और अत्यधिक तीव्र हो तो यात्रियों तथा क्रू के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे मामलों में सीट बेल्ट बांधे रखना, क्रू के निर्देशों का पालन करना और विमान संचालन से जुड़ी सुरक्षा प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
फिलहाल AAIB की विस्तृत जांच और मुख्य पायलट की पुष्टि वाली लैब रिपोर्ट का इंतजार है। इन दोनों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में हुई इस गंभीर घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन अतिरिक्त कदमों की जरूरत होगी।
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