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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी कार्रवाई, BMC कमिश्नर की सैलरी रोकी
Ratna Netam
4 Nov 2026 3:24 PM IST

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नई दिल्ली/मुंबई। देश की सबसे अमीर नगरपालिकाओं में शामिल बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की आयुक्त अश्विनी भिड़े को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मुंबई के बोरीवली इलाके में बस स्टेशन के लिए निर्धारित जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताते हुए उनका वेतन रोकने का आदेश दिया है। अदालत ने बीएमसी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा न्यायालय ने अश्विनी भिड़े को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को इस मामले की सुनवाई के दौरान बीएमसी के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने समय पर आवश्यक कदम नहीं उठाए। न्यायालय ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता जताई।
बोरीवली में बस स्टेशन की जमीन पर अतिक्रमण
यह पूरा मामला मुंबई के बोरीवली इलाके में बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट यानी BEST के बस स्टेशन के लिए निर्धारित जमीन से जुड़ा है।इस जमीन को सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विकास के लिए आरक्षित किया गया था। हालांकि, यहां अतिक्रमण होने के कारण संबंधित परियोजना प्रभावित हो रही थी।मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद अदालत ने बीएमसी को जमीन से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद निर्धारित समय में पूरी तरह अतिक्रमण नहीं हटाया गयासुनवाई के दौरान बीएमसी ने अदालत से आदेश का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन न्यायालय ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले ही पर्याप्त अवसर दिए जा चुके हैं और लगातार समय मांगना स्वीकार्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार
इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की।पीठ ने अधिकारियों के कामकाज पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायालय के निर्देशों का पालन करना संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है।अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि स्पष्ट आदेश होने के बावजूद अतिक्रमण हटाने में लगातार देरी क्यों हो रही है।सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने आशंका जताई कि कहीं संबंधित अधिकारी अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत करके कार्रवाई में देरी तो नहीं कर रहे हैं।हालांकि, यह अदालत की ओर से व्यक्त की गई आशंका थी। किसी अधिकारी और अतिक्रमणकारी के बीच मिलीभगत का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
1 दिसंबर तक वेतन रोकने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े के नवंबर महीने के वेतन पर रोक लगाने का निर्देश दिया।अदालत ने महाराष्ट्र सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया कि न्यायालय के आदेशों का पालन होने और अवमानना संबंधी मामले का निपटारा होने तक संबंधित वेतन जारी नहीं किया जाए।इस दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया कि आयुक्त को 1 दिसंबर 2026 तक वेतन नहीं मिलेगा और उससे पहले अदालत के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने आयुक्त के निजी स्टाफ तथा संबंधित अधिकारियों के वेतन को लेकर भी निर्देश दिए हैं।इस आदेश को प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
BMC पर लगाया पांच लाख रुपये का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम की ओर से अतिरिक्त 30 दिन का समय दिए जाने की मांग भी खारिज कर दी।इसके साथ ही अदालत ने बीएमसी पर पांच लाख रुपये की लागत लगाई।न्यायालय ने इस बात पर नाराजगी जताई कि सार्वजनिक परिवहन परियोजना के लिए आरक्षित जमीन को खाली कराने के संबंध में पहले दिए गए निर्देशों का समय पर पालन नहीं किया गया।अदालत का रुख स्पष्ट था कि प्रशासनिक संस्थाएं न्यायिक आदेशों को अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रख सकतीं।विशेष रूप से सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं के मामलों में देरी से नागरिकों को होने वाली असुविधा भी महत्वपूर्ण विषय है।
पहले भी दो बार दिए गए थे निर्देश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे।इन आदेशों में बीएमसी को अतिक्रमण हटाने और संबंधित भूमि को सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया थाइसके बावजूद निर्धारित समयसीमा में निर्देशों का पालन नहीं हुआ।तीन नवंबर की सुनवाई में अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि पूर्व के समयबद्ध निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना की गई है।इसी आधार पर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, नोटिस जारी होना अवमानना के मामले में अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। आयुक्त को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
आदेश के बाद हरकत में आया नगर निगम
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बीएमसी प्रशासन ने बोरीवली की संबंधित जमीन से अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने की दिशा में कार्रवाई तेज की।चार नवंबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, नगर निगम ने न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित स्थान पर अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया।इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि अदालत की फटकार और वेतन रोकने के आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन पर आदेश का जल्द अनुपालन करने का दबाव बढ़ा है।हालांकि, पूरी जमीन कब तक अतिक्रमण मुक्त होगी और अदालत के सामने अनुपालन की क्या स्थिति प्रस्तुत की जाएगी, यह आगे की कार्यवाही में स्पष्ट होगा।
अश्विनी भिड़े कौन हैं?
अश्विनी भिड़े महाराष्ट्र कैडर की वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैंउन्हें मार्च 2026 में बृहन्मुंबई महानगरपालिका का आयुक्त नियुक्त किया गया था। वह इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बनी थीं।मुंबई के प्रशासनिक ढांचे में बीएमसी आयुक्त का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नगर निगम शहर की सड़कों, जलापूर्ति, सफाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्रमुख जिम्मेदारियां निभाता है।ऐसे में बीएमसी के शीर्ष अधिकारी के वेतन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को एक असाधारण प्रशासनिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा संदेश
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने एक बार फिर सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही और न्यायिक निर्देशों के अनुपालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।अदालत ने अपने निर्देशों के पालन में देरी को गंभीरता से लेते हुए व्यक्तिगत स्तर पर जिम्मेदारी तय करने का संकेत दिया है।यह मामला केवल बोरीवली में बस स्टेशन की जमीन से अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक परियोजनाओं को लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा है।अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि बीएमसी कितनी जल्दी अतिक्रमण हटाने का काम पूरा करती है और आयुक्त अश्विनी भिड़े अदालत के कारण बताओ नोटिस का क्या जवाब देती हैं।
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