- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- NIA की बड़ी कार्रवाई,...
NIA की बड़ी कार्रवाई, ISIS से जुड़ी कथित बायोटेरर साजिश में डॉक्टर समेत तीन पर चार्जशीट

Delhi दिल्ली: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एक डॉक्टर सहित तीन लोगों के खिलाफ ISIS से जुड़ी एक कथित साजिश के मामले में चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला बायोलॉजिकल टॉक्सिन का उपयोग कर सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर जहर फैलाने की योजना से जुड़ा बताया जा रहा है। एजेंसी ने मंगलवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में इस कार्रवाई की जानकारी दी।
NIA के अनुसार, जिन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है उनमें हैदराबाद निवासी डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन, सह-आरोपी आज़ाद और उत्तर प्रदेश के मोहम्मद सुहेल शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ गुजरात के अहमदाबाद स्थित विशेष NIA कोर्ट में मामला दर्ज किया गया है।
एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि जांच के दौरान यह सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से इस्लामिक स्टेट से जुड़े विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे और उनके निर्देशों पर काम कर रहे थे। इनका उद्देश्य कथित तौर पर जिहाद को बढ़ावा देना और प्रतिबंधित हथियारों तथा बायोटेररिज्म के माध्यम से आतंक फैलाना था।
NIA का कहना है कि आरोपियों ने मिलकर ऐसे युवाओं को भर्ती करने की योजना बनाई थी जिन्हें सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया गया था। इन युवाओं का उपयोग कथित रूप से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाना था।
एजेंसी के मुताबिक, इस साजिश का एक अहम हिस्सा रिसिन नामक जहरीले पदार्थ का उपयोग था, जिसे अरंडी के बीजों से प्राप्त किया जाता है। यह पदार्थ अत्यंत घातक माना जाता है और इसे केमिकल वेपन्स कन्वेंशन के शेड्यूल I में शामिल किया गया है, जहां इसे प्रतिबंधित रासायनिक हथियारों की श्रेणी में रखा गया है।
NIA ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने ISIS के कथित एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस पदार्थ के इस्तेमाल की योजना बनाई थी, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने की आशंका थी।
फिलहाल इस मामले की सुनवाई विशेष NIA कोर्ट में जारी है और एजेंसी आगे की जांच में अन्य संभावित नेटवर्क और संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले को गंभीर आतंकवादी साजिश के रूप में देख रही हैं और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।
इस कार्रवाई को भारत में आतंकवाद के खिलाफ चल रही जांचों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसमें संगठित नेटवर्क और कट्टरपंथी गतिविधियों को उजागर करने पर जोर दिया जा रहा है।





