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बागी सांसदों पर महुआ का वार, 'संसद में अब गद्दारों के लिए अलग बेंच'

Ratna Netam
20 July 2026 3:16 PM IST
बागी सांसदों पर महुआ का वार, संसद में अब गद्दारों के लिए अलग बेंच
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New Delhi नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही लोकसभा में सीटों के नए आवंटन को लेकर सियासी विवाद शुरू हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी से अलग रुख अपनाने वाले सांसदों को लेकर तीखा हमला बोला है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से टीएमसी के 20 बागी सांसदों के लिए अलग सीटें आवंटित किए जाने पर महुआ मोइत्रा ने सोमवार को निशाना साधते हुए कहा कि अब संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष के अलावा एक नई श्रेणी 'गद्दार बेंच' भी बन गई है।

मानसून सत्र के पहले दिन मीडिया से बातचीत करते हुए महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों की स्थिति और उनके लिए की गई व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों को अलग सीटें दी गई हैं, उनके खिलाफ अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं अभी लंबित हैं। ऐसे में उन्हें अलग व्यवस्था देना उचित नहीं है।

महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि ये सांसद खुद को एक अलग राजनीतिक समूह का हिस्सा बता रहे हैं, लेकिन उनके दावे को लेकर अभी तक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है, उन्हें लेकर निर्णय लंबित है।

उन्होंने कहा कि इन सांसदों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बावजूद उन्हें रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का मौका दिया गया। महुआ मोइत्रा के अनुसार, विपक्षी दलों ने इसी मुद्दे को लेकर बैठक का विरोध किया था और वॉकआउट किया था।

टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सांसद की स्थिति तय करने के लिए नियमों और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उन्होंने बागी सांसदों को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता और पार्टी के विश्वास के साथ विश्वासघात करने वालों के लिए अलग पहचान बन गई है।

लोकसभा में सीटों के नए आवंटन को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब मानसून सत्र शुरू हुआ है। विपक्षी दलों और सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर पहले से ही टकराव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में टीएमसी सांसद का बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।

वहीं, लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सीटों के आवंटन को लेकर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संसद में सीटों का निर्धारण सदन की व्यवस्था और नियमों के अनुसार किया जाता है। अलग-अलग दलों के सांसदों को बैठने की व्यवस्था संसदीय कार्यों के संचालन को ध्यान में रखते हुए तय की जाती है।

टीएमसी के भीतर पिछले कुछ समय से राजनीतिक मतभेद सामने आते रहे हैं। पार्टी के कुछ सांसदों के रुख को लेकर नेतृत्व नाराजगी जाहिर कर चुका है। इसी पृष्ठभूमि में महुआ मोइत्रा का यह बयान आया है।

अब देखना होगा कि मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा कितना आगे बढ़ता है और क्या विपक्ष इस मामले को सदन में भी उठाता है। फिलहाल महुआ मोइत्रा के 'गद्दार बेंच' वाले बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है।

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