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महुआ मोइत्रा का अधिकारियों पर आरोप, लोकसभा स्पीकर को विशेषाधिकार हनन नोटिस

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष विशेषाधिकार हनन का नोटिस पेश किया है। महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि एक सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहे जाने के दौरान उनके साथ प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन किया गया और अपमानजनक व्यवहार किया गया।
महुआ मोइत्रा ने लोकसभा में कामकाज के संचालन और प्रक्रिया से जुड़े नियम 222 के तहत 16 अगस्त को यह नोटिस भेजा है। इसमें उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारियों द्वारा एक निर्वाचित सांसद के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों का उल्लंघन है।
अपने नोटिस में महुआ मोइत्रा ने नादिया जिले के जिला मजिस्ट्रेट (DM) श्रीकांत पल्ली, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) निरपेंद्र सिंह और नाज़रेथ नामक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का व्यवहार सांसद के पद और गरिमा के अनुरूप नहीं था।
मामला पश्चिम बंगाल के एक सर्किट हाउस से जुड़ा बताया जा रहा है। महुआ मोइत्रा का आरोप है कि उन्हें वहां से खाली करने के लिए कहा गया और इस दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों की ओर से किया गया व्यवहार न केवल अनुचित था, बल्कि एक जनप्रतिनिधि के सम्मान को भी प्रभावित करने वाला था।
सांसद ने अपने नोटिस में कहा कि संसद सदस्यों के लिए कुछ विशेष प्रोटोकॉल निर्धारित होते हैं, जिनका पालन सरकारी अधिकारियों को करना होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों ने इन नियमों की अनदेखी की और अपने पद का गलत इस्तेमाल किया।
विशेषाधिकार हनन का मामला संसद सदस्यों के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा होता है। जब किसी सांसद को लगता है कि उसके संसदीय अधिकारों या गरिमा को नुकसान पहुंचाया गया है, तो वह लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति के सामने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे सकता है। इसके बाद मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है, जो जांच कर अपनी रिपोर्ट देती है।
महुआ मोइत्रा ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि अधिकारियों को इस तरह का व्यवहार करने की अनुमति दी जाएगी तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित होगी।
टीएमसी सांसद के इस कदम के बाद राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। पार्टी नेताओं ने महुआ मोइत्रा के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। वहीं, विपक्षी दलों की ओर से भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है।
हालांकि, अभी तक संबंधित अधिकारियों की ओर से इस आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
यह पहली बार नहीं है जब महुआ मोइत्रा किसी विवाद को लेकर चर्चा में आई हैं। वह संसद में अपने मुखर अंदाज और सरकार तथा प्रशासन से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए जानी जाती हैं। इससे पहले भी वह कई मामलों में सरकार और अधिकारियों पर सवाल उठा चुकी हैं।
लोकसभा अध्यक्ष के पास दिए गए इस नोटिस पर अब आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि अध्यक्ष इसे स्वीकार करते हैं तो मामला संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जा सकता है। समिति दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपनी रिपोर्ट दे सकती है।
फिलहाल यह मामला सांसद और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच अधिकारों और प्रोटोकॉल को लेकर बहस का विषय बन गया है। महुआ मोइत्रा ने जहां इसे अपने विशेषाधिकार का उल्लंघन बताया है, वहीं आगे की कार्रवाई लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगी।





