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दिल्ली में प्रदर्शनकारियों से व्यवहार पर भड़के एमए बेबी

Ratna Netam
12 Oct 2026 4:38 PM IST
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों से व्यवहार पर भड़के एमए बेबी
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नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) के महासचिव एमए बेबी ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की कड़ी आलोचना की। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार को 'बर्बरता' करार देते हुए कहा कि जनता का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। एमए बेबी ने देशभर में व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने के लिए छात्रों, युवाओं, महिलाओं, मजदूरों, किसानों, नागरिक समाज के सदस्यों, बुद्धिजीवियों और सांस्कृतिक हस्तियों को एक मंच पर आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने की जरूरत है।एमए बेबी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में विभिन्न राजनीतिक संगठनों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के प्रति अपनाए गए रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आंदोलन को किसी एक संगठन या वर्ग तक सीमित रखने के बजाय समाज के व्यापक हिस्से को इससे जोड़ना चाहिए।
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों से व्यवहार पर जताई नाराजगी
सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने सोमवार को दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की आलोचना की। उन्होंने इस स्थिति को बर्बरता बताते हुए कहा कि लोगों का संघर्ष रुकने वाला नहीं है।बेबी ने कहा, "इन दिनों दिल्ली में बर्बरता हुई है। लोग संघर्ष जारी रखेंगे। हम चाहते हैं कि समाज के विभिन्न वर्गों के संगठन, सिविल सोसाइटी, बुद्धिजीवी और सांस्कृतिक हस्तियां मिलकर संघर्ष का एक ऐसा बड़ा मंच बनाएं जो हमारे देश में उभर रहा है।"उनके इस बयान में प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर नाराजगी के साथ व्यापक सामाजिक एकजुटता का संदेश भी शामिल था।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उन्होंने जिन विशिष्ट घटनाओं को बर्बरता बताया, उनका विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए उनके आरोपों को उनके राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
छात्रों और युवाओं को आंदोलन से जोड़ने का आह्वान
एमए बेबी ने देशभर में आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए छात्रों और युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि संघर्ष को जारी रखने के लिए समाज के अलग-अलग वर्गों के संगठनों को एक साथ आने की जरूरत है।छात्र और युवा संगठन सार्वजनिक मुद्दों पर आयोजित होने वाले आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
बेबी ने इन्हीं वर्गों को व्यापक मंच का हिस्सा बनाने की बात कही।
उनका जोर इस बात पर था कि विभिन्न संगठनों के बीच तालमेल स्थापित हो और आंदोलन को देशभर में आगे बढ़ाया जा सके।हालांकि, उन्होंने इस प्रस्तावित मंच के गठन की कोई निश्चित तारीख या संगठनात्मक रूपरेखा साझा नहीं की।
महिलाओं, मजदूरों और किसानों को भी साथ आने की अपील
सीपीआई(एम) महासचिव ने अपने बयान में महिलाओं, मजदूरों और किसानों को भी व्यापक आंदोलन से जोड़ने की बात कहीउन्होंने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी से संघर्ष को व्यापक स्वरूप दिया जा सकता है।मजदूर और किसान संगठन लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और नीतिगत मुद्दों पर अपनी मांगें उठाते रहे हैं।ऐसे में बेबी का आह्वान इन संगठनों को एक साझा मंच पर लाने की दिशा में राजनीतिक अपील के रूप में देखा जा सकता है।उन्होंने किसी विशेष संगठन के साथ समझौते या नए गठबंधन के गठन की घोषणा नहीं की, बल्कि विभिन्न वर्गों के बीच एकजुटता की आवश्यकता बताई।
नागरिक समाज और बुद्धिजीवियों की भूमिका पर जोर
एमए बेबी ने नागरिक समाज के सदस्यों और बुद्धिजीवियों को भी प्रस्तावित व्यापक मंच का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को एक साथ आकर संघर्ष को आगे बढ़ाना चाहिएनागरिक समाज के संगठन कई सार्वजनिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने, संवाद स्थापित करने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने का काम करते हैं।इसी तरह शिक्षाविद, लेखक और अन्य बुद्धिजीवी सामाजिक तथा राजनीतिक विषयों पर अपने विचार रखते हैं।
बेबी ने ऐसे लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
उनके बयान से स्पष्ट है कि वह आंदोलन को केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि विभिन्न सामाजिक समूहों को भी इसमें शामिल करने की अपील कर रहे हैं।सांस्कृतिक हस्तियों को भी मंच से जोड़ने की बातसीपीआई(एम) महासचिव ने सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी संघर्ष में भागीदारी करने का आह्वान कियाउन्होंने कहा कि नागरिक समाज और बुद्धिजीवियों के साथ सांस्कृतिक हस्तियां भी व्यापक मंच का हिस्सा बन सकती हैं।सांस्कृतिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग साहित्य, संगीत, रंगमंच और अन्य माध्यमों से सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करते हैं।बेबी के बयान में इन वर्गों को शामिल करने की अपील आंदोलन को व्यापक सामाजिक स्वरूप देने के उद्देश्य से जुड़ी दिखाई देती है।हालांकि, उन्होंने किसी सांस्कृतिक संगठन या व्यक्ति का नाम लेकर प्रस्तावित मंच में शामिल होने की पुष्टि नहीं की।
देशभर में संघर्ष जारी रखने की बात
एमए बेबी ने कहा कि दिल्ली में हुई घटनाओं के बावजूद लोगों का संघर्ष जारी रहेगा।उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय संगठनों और नागरिक समूहों के बीच एकजुटता की जरूरत बताई।उनका कहना था कि आंदोलन को बनाए रखने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।इस बयान के जरिए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर साझा प्रयासों का आह्वान किया।हालांकि, आंदोलन के अगले चरण, प्रस्तावित कार्यक्रमों या देशव्यापी प्रदर्शन की तारीखों के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है।इसलिए फिलहाल उनके बयान को व्यापक आंदोलन के लिए राजनीतिक और सामाजिक अपील के रूप में देखा जा सकता है।
विरोध प्रदर्शन और लोकतांत्रिक अधिकारों पर चर्चा
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर सामने आए राजनीतिक बयानों के बीच शांतिपूर्ण विरोध और सार्वजनिक व्यवस्था के सवाल भी महत्वपूर्ण हैं।भारत में नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्वक, बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन की जिम्मेदारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की होती है। वहीं, प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान भी आवश्यक हैएमए बेबी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों से व्यवहार की आलोचना की है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में संबंधित प्रशासन या पुलिस का पक्ष शामिल नहीं है।ऐसे में किसी विशिष्ट कार्रवाई की वैधता या परिस्थितियों के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित पक्षों की जानकारी आवश्यक होगी।
क्या बनेगा देशव्यापी साझा मंच?
एमए बेबी के बयान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक वर्गों को एक बड़े मंच पर लाने का आह्वान है।उन्होंने छात्रों, युवाओं, महिलाओं, मजदूरों, किसानों, नागरिक समाज, बुद्धिजीवियों और सांस्कृतिक हस्तियों को एक साथ आने की अपील की है।हालांकि, इस मंच का नाम, नेतृत्व, सदस्यता या भविष्य की रणनीति अभी स्पष्ट नहीं है।आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न संगठन इस अपील पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इसे किसी औपचारिक साझा मंच का स्वरूप मिलता है।फिलहाल सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की निंदा करते हुए साफ किया है कि वह व्यापक जनभागीदारी के साथ संघर्ष को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं।
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