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गुरुग्राम जमीन विवाद में M3M की बढ़ीं मुश्किलें, अदालत ने दिया बड़ा आदेश

Ratna Netam
25 Oct 2026 2:12 PM IST
गुरुग्राम जमीन विवाद में M3M की बढ़ीं मुश्किलें, अदालत ने दिया बड़ा आदेश
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नई दिल्ली। गुरुग्राम के एक जमीन विवाद से जुड़े मामले में रियल एस्टेट कंपनी M3M इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, उसकी सहायक कंपनियों और कई अन्य आरोपियों को दिल्ली की अदालत से आंशिक राहत मिली है। अदालत ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित आपराधिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए मामले को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। हालांकि, अदालत ने आपराधिक विश्वासघात से संबंधित भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 के तहत लिए गए संज्ञान को रद्द कर दिया है।यह मामला गुरुग्राम में जमीन के लेन-देन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि जमीन के सौदे के बदले तय की गई राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसी विवाद को लेकर कंपनी और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई थी।
धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की कार्यवाही रहेगी जारी
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चंदना ने मामले की सुनवाई करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120B और 34 के तहत संज्ञान लेने के फैसले को बरकरार रखा है।IPC की धारा 420 धोखाधड़ी से संबंधित है, जबकि धारा 120B आपराधिक साजिश और धारा 34 समान इरादे से किए गए आपराधिक कृत्यों में संयुक्त जिम्मेदारी से जुड़ी है।अदालत के इस फैसले का अर्थ है कि इन धाराओं के अंतर्गत शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही फिलहाल जारी रहेगी। हालांकि, संज्ञान लेने के आदेश को बरकरार रखने का मतलब यह नहीं है कि आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित हो गया है। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
आरोप तय होने के दौरान अपना पक्ष रख सकेंगे आरोपी
अदालत ने M3M इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, उसकी सहायक कंपनियों और अन्य आरोपियों को यह छूट भी दी है कि वे आरोप तय किए जाने के चरण में मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी दलीलें पेश कर सकते हैं।इस चरण में अदालत यह विचार करती है कि उपलब्ध दस्तावेजों, आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं।आरोपी पक्ष को इस दौरान कानूनी आधारों पर आरोपों का विरोध करने का अवसर मिलेगा। संबंधित मजिस्ट्रेट सभी पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आगे की प्रक्रिया निर्धारित करेंगे।
IPC की धारा 406 के तहत मिली राहत
मामले में आरोपियों को महत्वपूर्ण राहत देते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चंदना ने IPC की धारा 406 के तहत लिए गए संज्ञान को रद्द कर दिया।अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक विश्वासघात का अपराध स्थापित करने के लिए कुछ आवश्यक कानूनी तत्वों का होना जरूरी है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण तत्व संपत्ति का किसी व्यक्ति को सौंपा जाना या उस पर विशेष अधिकार दिया जाना है, जिसे कानूनी भाषा में 'एंट्रस्टमेंट ऑफ प्रॉपर्टी' कहा जाता है।अदालत के अनुसार, प्रस्तुत मामले में इस अपराध के लिए आवश्यक संपत्ति सौंपे जाने का तत्व नहीं बनता है। इसी आधार पर धारा 406 के अंतर्गत लिए गए संज्ञान को रद्द करने का निर्णय दिया गया।हालांकि, इस राहत का प्रभाव धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित अन्य धाराओं पर नहीं पड़ेगा।
जमीन सौदे में भुगतान नहीं होने का आरोप
पूरा विवाद गुरुग्राम में जमीन के लेन-देन और उसके बदले निर्धारित रकम के भुगतान से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि जमीन के सौदे के लिए तय की गई राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद विवाद ने कानूनी रूप ले लिया।ऐसे मामलों में अदालत को यह देखना होता है कि विवाद केवल अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन से संबंधित है या उसमें आपराधिक अपराध के आवश्यक तत्व भी मौजूद हैं।विशेष रूप से धोखाधड़ी के मामलों में यह महत्वपूर्ण होता है कि लेन-देन के समय बेईमानी की मंशा से संबंधित आरोपों और उपलब्ध सामग्री का कानूनी परीक्षण किया जाए।वहीं, आपराधिक विश्वासघात के मामले में संपत्ति सौंपे जाने और उसके कथित दुरुपयोग जैसे तत्वों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
आगे की सुनवाई पर रहेंगी नजरें
दिल्ली की अदालत के इस आदेश के बाद M3M इंडिया और अन्य संबंधित आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश से जुड़ी कार्यवाही जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।मामले में अब महत्वपूर्ण चरण आरोप तय किए जाने का होगा। इस दौरान आरोपी पक्ष अपनी दलीलें रख सकेगा और अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय करेगी कि किन आरोपों पर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाई जानी चाहिए।फिलहाल अदालत ने धारा 406 के तहत संज्ञान रद्द करते हुए आरोपियों को आंशिक राहत दी है, लेकिन धारा 420, 120B और 34 के तहत कार्यवाही जारी रखने का फैसला बरकरार रखा है।इस मामले में अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण आगे की न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
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