दिल्ली-एनसीआर

निजी बैंक का DSA बनकर लोन दिलाने का झांसा

Ratna Netam
28 Sept 2026 2:15 PM IST
निजी बैंक का DSA बनकर लोन दिलाने का झांसा
x
दिल्ली : पुलिस ने साइबर ठगी के एक मामले में कार्रवाई करते हुए ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (DSA) बनकर लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करता था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने लोन और ओवरड्राफ्ट सुविधा दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी की।पुलिस के मुताबिक, साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा ने कार्रवाई करते हुए कथित गिरोह के मास्टरमाइंड अदीब खान (36) और अनीश अली को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 6.95 लाख रुपये बरामद किए हैं। वहीं, इस मामले में एक अन्य आरोपी राजेंद्र की तलाश जारी है।
लोन दिलाने के नाम पर बनाया था जाल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को कम ब्याज दर पर लोन और ओवरड्राफ्ट सुविधा उपलब्ध कराने का झांसा देते थे। इसके लिए वे खुद को नामी निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों का डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (DSA) बताकर लोगों से संपर्क करते थे।पुलिस के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब शिकायतकर्ता अक्षय वर्मा लोन या ओवरड्राफ्ट सुविधा लेने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात अदीब खान से हुई। आरोप है कि खान ने खुद को बजाज फिनसर्व और अन्य निजी बैंकों का DSA बताया और कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।इसके बाद आरोपी ने लोन प्रक्रिया पूरी करने और दस्तावेजों के नाम पर शिकायतकर्ता से संपर्क बनाए रखा। पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान आरोपी ने धोखाधड़ी कर करीब 15 लाख रुपये के लोन/ओवरड्राफ्ट से जुड़ी ठगी को अंजाम दिया।
खच्चर बैंक खाते का किया इस्तेमाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर उसे निकालने का काम करता था। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी अनीश अली ने कथित तौर पर गिरोह को एक खच्चर बैंक खाता उपलब्ध कराया और नकद निकासी में मदद की।खच्चर बैंक खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अपराधी अवैध रूप से प्राप्त धन को इधर-उधर भेजने के लिए करते हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि गिरोह ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई।
पुलिस ने ऐसे किया खुलासा
साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा की टीम ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबर, बैंक खातों और लेन-देन की जानकारी जुटाई। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों से गिरोह के काम करने के तरीके और अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस फरार आरोपी राजेंद्र की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि लोन दिलाने के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या दस्तावेज साझा न करें। साइबर ठग अक्सर बैंक अधिकारी, एजेंट या वित्तीय संस्थान के प्रतिनिधि बनकर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।पुलिस ने कहा कि किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था से जुड़ी लोन प्रक्रिया के लिए हमेशा आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए। कम ब्याज दर या तुरंत लोन दिलाने जैसे लालच देने वाले प्रस्तावों से सतर्क रहने की जरूरत है।फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर ठगी से जुड़े और मामलों का खुलासा हो सकता है।
Next Story