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विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित

Kavita2
4 Aug 2026 1:07 PM IST
विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित
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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के कारण प्रभावित हुई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके चलते प्रश्नकाल नहीं चल सका। लगातार विरोध और शोर-शराबे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

मंगलवार को लोकसभा की बैठक शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सदस्य अपनी मांगों को लेकर सदन के वेल के पास आ गए और सरकार से जवाब मांगते हुए नारे लगाए। इस दौरान प्रश्नकाल की कार्यवाही बाधित रही।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने और प्रश्नकाल होने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल संसद की कार्यवाही का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके जरिए सांसद जनता से जुड़े मुद्दे उठाते हैं।

स्पीकर ने सदस्यों को याद दिलाया कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में सभी दलों के नेताओं से संसद का कामकाज व्यवस्थित तरीके से चलाने का आग्रह किया गया था। उन्होंने कहा कि सभी दलों की जिम्मेदारी है कि सदन की गरिमा बनाए रखें और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करें।

हालांकि, विपक्षी सदस्य अपने विरोध पर कायम रहे। वे 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग की और सदन में नारे लगाए।

प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों की ओर से "गृह मंत्री, हमें जवाब दें" जैसे नारे लगाए गए। उनका कहना था कि छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर जवाबदेही तय करनी चाहिए।

विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए था और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से इस मामले में नियमों और कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया जाता रहा है।

संसद में हंगामा कोई नई बात नहीं है। अलग-अलग मुद्दों को लेकर अक्सर विपक्ष और सरकार के बीच मतभेद देखने को मिलते हैं, जिसका असर सदन की कार्यवाही पर पड़ता है। हालांकि, संसद में प्रश्नकाल को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस दौरान सांसद सीधे सरकार के मंत्रियों से सवाल पूछते हैं और जवाब मांगते हैं।

मंगलवार की घटना में प्रश्नकाल शुरू नहीं हो सका, जिससे कई सांसदों के निर्धारित सवालों पर चर्चा नहीं हो पाई। इसके बाद अध्यक्ष ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन लगातार नारेबाजी के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

लोकसभा अध्यक्ष ने पहले भी कई बार सभी दलों से सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की है। उनका कहना रहा है कि जनता के प्रतिनिधि होने के नाते सांसदों को चर्चा और संवाद के माध्यम से मुद्दे उठाने चाहिए।

विपक्ष की ओर से कहा गया कि वह जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को उठाने के लिए बाध्य है और सरकार को उन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। विपक्ष ने संकेत दिया है कि वह संबंधित मुद्दों पर अपनी मांग जारी रखेगा।

संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद अब सबकी नजर दोपहर बाद होने वाली बैठक पर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन पाती है या सदन में गतिरोध आगे भी जारी रहता है।

संसदीय कार्यवाही में व्यवधान को लेकर अक्सर यह बहस होती रही है कि विरोध दर्ज कराने और सदन का कामकाज चलाने के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सरकार और विपक्ष दोनों ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका को अहम बताते हैं, लेकिन कई बार राजनीतिक मतभेदों के कारण कार्यवाही प्रभावित हो जाती है।

मंगलवार को भी ऐसा ही देखने को मिला, जब विपक्षी विरोध के कारण लोकसभा का महत्वपूर्ण प्रश्नकाल नहीं हो सका और सदन को तय समय से पहले स्थगित करना पड़ा।

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